आईपीएल के 20-20 मैच शुरू हुए थे तो पहले मैच की टीवी पर टीआरपी रेटिंग काफी अच्छी थी। उसके बाद दर्शक घट गए। और उसी अनुपात में, आईपीएल के मैदान से बाहर विवादों की संख्या बढ़ गई।

जिन चीयर लीडर्स पर पब्लिक का ध्यान भी नहीं था उनका जोर-शोर से कुछ लोग विरोध करने लगे। खूब मसला उछला और खूब प्रचार हुआ आईपीएल का। फिर हरभजन- श्रीसंत विवाद हो गया। और अब प्रतिद्वंदी कप्तान शेन वॉर्न और सौरव गांगुली के बीच वाक-युद्ध तो हो ही रहा है, स्वयं सौरव की टीम के एक खिलाड़ी उमर गुल अपने कप्तान की खुले आम आलोचना कर रहे हैं।

थोड़ी ज्यादा ही नूरा कुश्ती नहीं लग रही यह? ऎसे तो दर्शक जुट नहीं रहे (स्टेडियम में सब फोकटिया दर्शक ही भरे रहते हैं) तो चलो विवाद खड़ा कर ध्यान खींचा जाए।

अब इन्हें कौन बताए, ये अमेरिकी खेलों के हथकंडे क्रिकेट से प्यार करने वाले और जुनूनी दर्शकों पर नहीं चलते, उन्हें क्रिकेट से से प्यार है, तमाशों से नहीं। आईपीएल जितने ज्यादा तमाशे करेगी , उतने दर्शक खोएगी। नहीं क्या?


कभी कहा जाता था, जहां लक्ष्मी (धन) होती है वहां सरस्वती (बुद्धि) नहीं होती। आईपीएल के एक मैच में यह बात ऎसी खुल कर सामने आई कि उनके अपने कमेंटेटर हंस- हंस कर लोटपोट हो गए।

मैच था कोलकाता में और शाहरुख खान की कोलकाता टीम अपनी पारी खेल रही थी तभी मैदान पर लगी एक “फ्लड लाइट” बंद हो गई। क्रिकेट के नियमों के अनुसार अगर मैच वहीं खत्म हो जाता तो कोलकाता की टीम मैच जीत नहीं पाती और उसे अपनी प्रतिद्वंदी टीम से अंक बांटने पड़ते। लेकिन यह सब शाहरुख खान के धनकुबेर मित्रों के दिमाग में कहां आता। सो बत्तियां बंद थीं और शाहरुख खान के परम मित्र करण जौहर सहित कई अन्य फिल्मी हस्तियां तेज बजते संगीत पर नाच रही थीं।

और आईपीएल मैचों की कमेंटरी कर रहे कमेंटेटर उन्हें दिखा-दिखा कर ठहाके लगा रहे थे कि देखो, इन्हें इतनी भी समझ नहीं कि इनकी टीम मैच जीतने से वंचित होने वाली है।

एक और शर्मनाक स्थिति तब आई जब उस टीवी चैनल की एक महिला एंकर ने मैच अंपायर से बात की। अंपायर महोदय ने मैच की स्थिति बताई, खेल शुरू होने वाला है यह जानकारी दी और जाने लगे।

उस महिला एंकर ने अंपायर को रोका और पूछ बैठीं- “मैच कौन जीतेगा?” अंपायर महोदय कुछ सेकेण्ड तो उनका चेहरा ही देखते रह गए, फिर शब्दों पर जोर दे-देकर, ( ताकि उस बेवकूफ के भेजे में बात अच्छी तरह आ जाए) बोले- “ मैं अंपयार हूं, निर्णय करता हूं, कमेंट नहीं करता” और फिर उस एंकर की बेवकूफी पर खुल कर हंसते हुए रवाना हो गए।

खूबसूरत चेहरे हमेशा बेवकूफ नहीं होते, लेकिन बेवकूफ कितने खूबसूरत हो सकते हैं- यह जानने के लिए देखते रहिए आईपीएल के मैच।


अर्जुन सिंह जैसे लोगों से सावधान रहें राहुल गांधी, जो उन्हें प्रधानमंत्री पद के योग्य बता कर चाटुकारिता की सीमाएं लांघ रहे हैं।

अर्जुन सिंह का कहना है कि राहुल गांधी को अगला प्रधानमंत्री बनाना चाहिए क्योंकि उनमें इस पद के लिए सभी योग्यताएं हैं।

ऎसा कह कर न सिर्फ अर्जुन सिंह वर्तमान प्रधानमंत्री और अपनी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता, मनमोहन सिंह का अपमान कर रहे हैं बल्कि वे छिपी कोशिश कर रहे हैं राहुल गांधी को सत्ता लोलुप साबित करने की और उनके तथा मनमोहन सिंह के बीच दरार पैदा करने की।

शायद अर्जुन सिंह को यह बात रास नहीं आती कि उनके जैसे “वरिष्ठ” ( और प्रधानमंत्री बनने की मह्त्वाकांक्षा रखने वाले) नेता के मौजूद रहते, सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह को कैसे प्रधानमंत्री पद सौंप दिया।

अपनी यही खुन्नस वे मनमोहन सिंह का अप्रत्यक्ष अपमान कर के निकाल रहे हैं।

अगर सोनिया सोनिया गांधी प्रधामनंत्री होतीं तो अर्जुन सिंह की हिम्मत होती यह कहने की, कि अगला प्रधानमंत्री राहुल को बनाना चाहिए? अगर अर्जुन सिंह सच में राहुल गांधी को प्रतिभाशाली मानते हैं तो यह कह कर दिखाएं कि अगला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बनाया जाए क्योंकि उनमें इसकी पूरी योग्यता है।


सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए पहले फाइनल में सचिन ने 117 रनों की जो नाबाद पारी खेली, उसकी महानता हर देखने वाला जानता है। मैच के बाद जब सचिन का इंटरव्यू लिया गया तो सचिन ने अपने बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में नए खिलाड़ी रोहित शर्मा की प्रशंसा के पुल बांध दिए।

यह सचिन का बड़प्पन है और टीम के प्रति उनका स्नेह है कि वे बखूबी समझते हैं कि नए खिलाड़ियों को कैसे बढ़ावा दिया जाए, कि कैसे अपनी महानता की छाया से उनके अच्छे प्रदर्शन को धुंधला न होने दिया जाए।

और दूसरी तरफ हैं एक दिवसीय टीम के कप्तान धोनी। जब उनसे सचिन की पारी के बारे में पूछा गया तो टाल-मटोल भरे अंदाज में दो-चार बातें बोलने के बाद धोनी ने कहा “लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि अभी दो मैच और बाकी हैं।”
तो धोनी यह कहना चाहते थे कि एक मैच में खेल लिया तो क्या, अगले दो मैचों में भी अच्छा खेलें सचिन तो जाने?
ऎसी टिप्पणी करना धोनी का छोटापन था, दिल की जलन थी।

धोनी शायद नहीं सहन कर पाते हैं कि उनके अलावा और कोई प्रशंसा का पात्र न बने, कोई और भारतीय क्रिकेट टीम का सिरमौर बने।

इसीलिए पहले उन्होंने सौरव गांगुली को टीम से निकलवाया और फिर सचिन के खिलाफ कड़वी बातें कहीं और अब सचिन की तारीफ तक उनसे बर्दाश्त नहीं हो रही है।

सचिन इस बात को बखूबी समझते हैं इसीलिए जीत कर वापस लौटते समय भी उनके चेहरे पर दुख की छाया थी, खुशी की मुस्कान नहीं। और इसीलिए वे जीत कर धोनी के साथ पेवेलियन वापस नहीं लौटे बल्कि धोनी से अलग, अकेले ही मैदान से लौटे।

एक अंग्रेजी फिल्म में संवाद सुना था: “ मैं हमेशा इसलिए जीतता रहा क्योंकि मैं हमेशा अपनी जीत के बारे में सोचता रहा। तुम हमेशा इसलिए हारते रहे क्योंकि तुम हमेशा मेरी हार के बारे में सोचते रहे।”

यही हाल धोनी का भी होगा।


आपने कभी देखा है, कि जापानी समारोह में सभी चीनी बोलें और जापानी भाषा की हंसी उड़ाएं? या फ्रांस के समारोह में अंग्रेजी बोली जाए और फ्रांसीसी भाषा की खिल्ली उड़ाई जाए? दुनिया का कोई देश अपनी भाषा की उस तरह खिल्ली नहीं उड़ाता जिस तरह भारत के फिल्मोदद्योग से जुड़े व्यक्तियों द्वारा उड़ाया जाता है।

पिछले दिनों हुए “स्टार स्क्रीन अवार्ड” में कुछ ऎसा ही नजार देखा जो किसी भी भारतीय का सिर शरम से झुकाने के लिए काफी था, सिवाय “हिन्दी फिल्मों” से जुड़े लोगों का।

मंच पर साजिद खान “प्रोफेसर परिमल” बन कर शुद्ध हिन्दी बोल रहे थे और उनके साथ खड़ी अभिनेत्री उनकी हिन्दी को कोस रही थीं, अंग्रेजी में। और उनके साथ ठहाके लगा रहे थे दर्शक के रूप में बैठे “हिन्दी” अभिनेता और अभिनेत्रियां।

शर्म की इंतिहा तब हुई जब गायिका श्रेया घोषाल अपना पुरस्कार लेने मंच पर आईं और हिंदी में धन्यवाद-भाषण दोहराने के आग्रह पर ऎसी कठिनाई से, ऎसे अटक-अटक कर दो पंक्तियां हिंदी में बोल गईं जैसे शुद्ध अंग्रेजों की औलाद हैं और हिंदी बोल कर भारतीयों पर एहसान कर रही हैं।

बचपन में राष्ट्रभक्ति की एक कविता पढ़ी थी कि जिसे अपने देश और राष्ट्रीयता पर अभिमान नहीं, वह इंसान नहीं, नर- पशु समान है।

उस फिल्म समारोह में ऎसे ही नरपशु भरे पड़े थे। न पढ़े, न लिखे, दिखावे की ज़िंदगी जीने वाले ये नर-पशु अन्य देशवासियों से अपनी कमतरी छिपाने के लिए विदेशी भाषा का आश्रय लेते हैं।

जरा कस कर एक जूता इनके सिर पर मारें तो चिल्ला पड़ेंगे अपनी मातृभाषा में।