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सटीक फाइनेंशियल प्लानिंग के गुरुमंत्र

प्रकाशित Sat, 07, 2014 पर 15:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जब आप अपना फाइनेशियल पोर्टफोलियो बनाते हैं तो अपने लक्ष्य के मुताबिक एसेट एलोकेशन करना बेहद जरूरी है। योर मनी में हम फिनकार्ट के एमडी और फाउंडर तनवीर आलम से जानेंगे पसर्नल फाइनेंस के गुरु मंत्र और साथ ही जानेंगे कैसे सही प्लानिंग से आप सालों में जोड़ सकते हैं करोड़ों रुपये और कर सकते हैं अपने सभी सपनों को साकार।

सवाल : 2007 में अमेरिका शिफ्ट हुआ था, तब क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाया था, लेकिन कार्ड को रद्द नहीं किया था। 2013 में भारत लौटा और आईसीआईसीआई बैंक में क्रेडिट कार्ड के लिए जब अर्जी दी तो उन्होंने मना कर दिया। आईसीआईसीआई बैंक में सैलरी खाता है कोई बकाया भी नहीं है तो कंपनी कार्ड देने से क्यों मना कर रही है, क्या इससे क्रेडिट स्कोर पर असर दिखेगा?  


जवाब : आपको अपना क्रेडिट कार्ड पहले ही रद्द कर देना चाहिए था। आपने 2007-2013 तक  क्रेडिट कार्ड पर सालाना फीस नहीं दी और ना ही बैंक से कोई संपर्क रहा। आप विदेश में थे और इस कारण कंपनी भी आप से संपर्क नहीं कर सकी। अभी आपको कंपनी के साथ क्रेडिट कार्ड से जुड़ा मुद्दा जल्द सुलझाना होगा, क्योंकि क्रेडिट कार्ड से सिबिल स्कोर जुड़ा होता है। अगर आपका सिबिल स्कोर अच्छा रहा, 800 से ज्यादा रहा तो आगे लोन मिलने में दिक्कते नहीं आएगी। लेकिन अगर सिबिल स्कोर खराब रहा तो लोन मिलना मुश्किल होगा। इसलिए आपको अपने बैंकर से सिबिल स्कोर सुधारने के लिए जल्द संपर्क करना चाहिए।


सवाल : ईएलएसएस या फिर पीपीएफ में से कोई एक विकल्प चुनना है तो कौन-सा विकल्प बेहतर होगा और इनमें निवेश की प्रक्रिया क्या है?

जवाब : पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) में निवेश से करीब 8.7 फीसदी तक के रिटर्न मिल सकते हैं। पीपीएफ में लगभग 500 रुपये से 1 लाख रुपये तक की राशि निवेश की जा सकती है। इसका 15 साल का लॉक इन पीरियड होता है। ज्यादा जोखिम नहीं उठाने वालों के लिए पीपीएफ अच्छा विकल्प है। वहीं ईएलएसएस में आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल टैक्स प्लान, फ्रैंकलिन इंडिया टैक्स शील्ड अच्छे विकल्प है। ईएलएसएस में इक्विटी में पैसा लगाया जाता है और इसमें टैक्स छूट का फायदा भी मिलता है। इसका लॉक इन पिरियड करीब 3 साल का होता है।  


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