पहले बचत फिर खर्च से निवेश लक्ष्य पूरे -
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पहले बचत फिर खर्च से निवेश लक्ष्य पूरे

प्रकाशित Wed, 11, 2014 पर 12:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पहले बचत और फिर निवेश, फाइनेंशियल प्लानिंग का ये सबसे बड़ा गुरुमंत्र है, और इसी गुरुमंत्र को अपनाकर आप अपने छोटे बड़े सभी लक्ष्य बड़ी आसानी से हासिल कर सकते हैं, योर मनी में आज बात करेंगे आपके निवेश की, और साथ ही देंगे पैसे बढ़ाने और बचाने के नुस्खे, आज आपके बचत और निवेश से जुड़े सवालों के जवाब देंगे आनंद राठी फाइनेंशियल सर्विसेज के डायरेक्टर फिरोज अजीज।


बच्चों में बचत की आदत पहले से ही डल जाए, तो ये आपके लिए भी काफी अच्छा है, साथ ही आपके बच्चे के लिए भी, और जिस तरह से खर्चें बढ़ते जा रहे हैं, महंगाई चरम पर है, ऐसे समय में मनी मैनेजमेंट सबसे बड़ी समस्या बन गई है। तो कैसे बच्चे अपनी पॉकेट मनी का सही इस्तेमाल करें और कैसे इसे समझदारी से मैनेज करें इसके लिए कुछ खास टिप्स।


अकसर पॉकेट मनी को सिर्फ खर्च के लिए ही सोचा जाता है, ना कि सेविंग के लिए, लेकिन योर मनी में हम हमेशा आपको बताते हैं पहले बचत फिर खर्च का नुस्खा, इसका सबसे आसान तरीका है कि पॉकेट मनी मिलते ही महीने की शुरूआत में ही, इसका कुछ हिस्सा निकालकर बचाएं और बाकी बची रकम को खर्च के लिए इस्तेमाल करें, कम से कम 30 फीसदी हिस्सा अपनी पॉकेट मनी का हर महीने खर्च करने के लिए इस्तेमाल करें, अब जो पैसे आपने अलग रखें हैं, उन्हे बेकार नहीं रखे, बल्कि उसे बचाएं, इसमें आप अपने माता-पिता की मदद ले सकते हैं, और सेविंग खाते के जरिए या फिर आरडी और म्युचुअल फंड में एसआईपी के जरिए भी सेविंग कर सकते हैं, एक तो इससे आपको लगातार बचत की आदत लगेगी ही, साथ ही आप अपने भविष्य के लिए बड़ा कोष इकट्ठा कर सकेंगे। अब जो आपकी पॉकेट मनी का बाकी बचा हिस्सा है, उसे समझदारी से खर्च करने के लिए बजट बनाने की आदत जरूर डालें, जैसे कभी आपको अच्छी ड्रेस खरीदनी है, या फिर मूवी देखनी है, या फिर फ्रेंड्स के लिए गिफ्ट्स खरीदना है, इन सबको अपने बजट में शामिल करें, और फिर वरीयता के हिसाब से खर्च करें, इससे आप जरूरत की चीजों पर ही खर्च करेंगे और आपको अपने अभिभावकों से भी पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रोजाना आधार पर अपने खर्चों को ट्रैक करें, और हां पूरी पॉकेट मनी लेकर बाहर नहीं निकलें, पॉकेट मनी को किसी पिगी बैंक या किसी लिफाफे में रखें।


माता पिता के लिए भी सलाह है कि अपने बच्चे की जरूरतों के हिसाब से ही उन्हें पॉकेट मनी दें, बच्चों को एक लॉग बुक बनाने के लिए कहें, जिस पर आप भी नजर बनाए रखें, उन्हें बताएं कि जो पैसे आप इन्हें दे रहे हैं, उसका किस तरह समझदारी से खर्च करना चाहिए। उन्हें समझाएं कि पॉकेट मनी सिर्फ खर्च के लिए ही नहीं बल्कि इससे अच्छी खासी बचत भी की जा सकती है। इससे उन्हें कम उम्र से ही आर्थिक रूप से स्वतंत्र और अनुशासन से खर्च करने का आदी बना सकते हैं।


सवालः मेरी उम्र 31 साल है और मासिक आय 65000 रुपये है। मैंने एर टर्म प्लान लिया है जिसका कवर 1 करोड़ रुपये है। 2 एलआईसी की पॉलिसी ली हुई हैं। मैं 7 म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहा हूं। 10 साल के बाद बच्चे के पढ़ाई के लिए 20 लाख रुपये चाहिए, 15 साल के बाद रिटायरमेंट के लिए 2 करोड़ रुपये चाहिए। मुझे अपने पोर्टफोलियो में कौन से बदलाव करने चाहिए?


फिरोज अजीजः आपका मौजूदा निवेश लार्ज कैप में ज्यादा है और मौजूदा मिडकैप रैली को देखते हुए मिड कैप में निवेश बढाएं। डेट के लिहाज से एलआईसी और ईपीएफ पोर्टफोलियो में मौजूद हैं, इसलिए बैलेंस्ड फंड में निवेश जरूरी नहीं है। एक्सिस लॉन्ग टर्म इक्विटी एक ईएलएसएस स्कीम है जिसमें सेक्शन 80सी के तेहत टैक्स बेनपिट मिलता है, लेकिन अगर आपकी टैक्स लिमिट एलआईसी, पीपीएफ और लोन ईएमआई से भी पूरी नही होती तो इसे जारी रखें, वरना डाइवर्सिफाइड इक्विटी एमएफ में निवेश करें। आपके मौजूदा निवेश से बच्चे की पढाई का लक्ष्य पूरा हो सकता है और आपके बाकी लक्ष्य के लिए आपको 37,000 रुपये की एसआईपी करनी होगी।


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