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टैक्स गुरू स्पेशलः टैक्स पर बजट में उम्मीदें

प्रकाशित Fri, 04, 2014 पर 19:07  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया का मानना है कि टैक्स छूट का दायरा और बढ़ना चाहिए क्योंकि महंगाई से राहत बहुत जरूरी है। टैक्स छूट सीमा 3 लाख रुपये होनी चाहिए। 80सी की सीमा बढ़नी चाहिए और ये छूट बढ़कर 2 लाख रुपये होनी चाहिए। इसके अलावा टैक्स चोरों को पकड़ना भी जरूरी है। टैक्स चोरों से सरकार को टैक्स वसूलना चाहिए और टैक्स का दायरा बढ़ाना भी जरूरी है।


स्टैंडर्ड डिडक्शन की छूट मिलने से नौकरीपेशा लोगों को फायदा होगा और अब स्टैंडर्ड डिडक्शन 2 लाख रुपये होना चाहिए। अन्य भत्तों पर सरकार टैक्स लगाए लेकिन स्टैंडर्ड डिडक्शन की छूट मिले तो लोगों को ज्यादा फायदा होगा। लोन के ब्याज पर छूट बढ़नी चाहिए और ब्याज पर 3 लाख रुपये तक छूट मिलनी चाहिए। सेक्शन 80जीजी की छूट भी बढ़नी चाहिए। किराए पर मिलने वाली छूट बढ़नी चाहिए और ये छूट आय का 25 फीसदी होनी चाहिए। 


सुभाष लखोटिया के मुताबिक देश में 1 करोड़ रुपये की आय वाले 42,300 लोग हैं। अगर सुपर रिच पर टैक्स नहीं लगे तो देश का पैसा देश में ही रहेगा। अमीर किसानों पर टैक्स लगना चाहिए। कृषि की इनकम पर टैक्स लगना चाहिए। सरकारी भत्तों पर छूट बढ़ाने की जरूरत है और मेडिकल रीइंबर्समेंट का दायरा बढ़ना चाहिए। सरकार को ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी बढ़ाना चाहिए। बच्चों की पढ़ाई पर छूट बढ़नी चाहिए इस पर 100 रुपये हर माह छूट बढ़ानी चाहिए। टैक्सपेयर्स की जिंदगी आसान बननी चाहिए। लोगों पर कम टैक्स लगना चाहिए। इनकम पर सरचार्ज, सेस नहीं लगना चाहिए। इस समय देश में सबसे ज्यादा टैक्स चोरों को पकड़ना जरूरी है।


केपीएमजी इंडिया के पार्टनर- टैक्स आशीष गुप्ता का कहना है कि महंगाई को देखते हुए टैक्स छूट बढ़नी चाहिए। टैक्स छूट कम से कम 2.50 लाख रुपये की आय पर होनी चाहिए और 3 लाख रुपये तक टैक्स छूट की सीमा चाहते हैं। वित्त वर्ष 2005-06 में 80सी की सीमा तय हुई थी और अब सीमा कम से कम दोगुनी करनी चाहिए। नागरिकों की आमदनी के हिसाब से टैक्स छूट बढ़नी चाहिए।


स्टैंडर्ड डिडक्शन के मुद्दे पर आशीष गुप्ता का जवाब है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन से कारोबारी और वेतनभोगी लोगों के बीच बैलेंस होगा कारोबारियों को कारोबार के लिए किए खर्च पर छूट मिलनी चाहिए। वेतनभोगी कर्मचारियों को ऐसी छूट नहीं मिल पा रही है। साल 2000 में होमलोन के ब्याज पर छूट 1.50 लाख रुपये हो गई है और उसके बाद से महंगाई और घर की कीमत तेजी से बढ़ी है। होम लोन का ब्याज भी काफी बढ़ा है और होम लोन के ब्याज पर छूट की मांग जायज है।


बजट में सुपर रिच टैक्स हटना चाहिए। ट्रांसपोर्ट अलाउंस 800 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये होना चाहिए। 1998 में 800 रुपये की सीमा तय की गई थी और तब से इसे काफी समय बीत चुका है। डीजल-पेट्रोल के बढ़ते हुए दाम को देखते हुए इसे बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा महिलाओं के लिए टैक्स छूट की अलग सीमा होनी चाहिए। ये महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता का एक जरिया है।


सक्षम वेंचर्स के फाउंडर अमिताभ सिंह का कहना है कि 123 करोड़ जनसंख्या में सिर्फ 3.50 करोड़ टैक्सपेयर्स हैं और सरकार को टैक्स पेयर्स की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। टैक्स के लिए आय सीमा बढ़ाने से लोग टैक्स के दायरे से बाहर होंगे। सेक्शन 80सी की सीमा बढने से वित्त वर्ष 2012-13 में इस छूट से सरकार को 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अब अगर सीमा दोगुनी करेंगे तो नुकसान भी दोगुना होगा।


स्टैंडर्ड डिडक्शन का प्रावधान 2006 में खत्म कर दिया गया हैं क्योंकि वेतनभोगी कर्मचारियों को कई सुविधाएं मिलती हैं। कंपनियां कर्मचारियों को कई रियायतें देती हैं और इसलिए उन्हें अलग से टैक्स छूट की जरूरत नहीं है। 


होमलोन के ब्याज पर छूट बढने पर अमिताभ का जवाब है कि हर फायदे में बैलेंस होना चाहिए। लोन के ब्याज पर छूट मिलनी चाहिए। सेक्शन 80जीजी की छूट बढ़नी चाहिए। 1998 से सेक्शन 80जीजी के तहत घर किराए पर 2000 रुपये की छूट मिल रही है इसलिए अब घर किराए पर मिलने वाली छूट बढ़नी चाहिए।


अमिताभ का मानना है कि सरकार को सुपर रिच टैक्स हटाना चाहिए। सरकार सुपर रिच टैक्स चोरी करने वालों को पकड़े औरजो बहुत पैसा कमाते हैं और टैक्स नहीं देते उन्हें टैक्स के दायरे में लाए। महिलाओं के लिए छूट की अलग सीमा पर अमिताभ का मत है कि उनके लिए अलग छूट की सीमा नहीं होनी चाहिए। जब महिला और पुरुष के लिए समान अधिकारों की बात है तो अलग फायदे क्यों चाहिए।


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