Facebook Pixel Code = /home/moneycontrol/commonstore/commonfiles/header_tag_manager.php
Moneycontrol » समाचार » फाइनेंशियल प्लानिंग

बजट के बाद क्या हो फाइनेंशियल प्लानिंग

प्रकाशित Sat, 12, 2014 पर 13:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में अच्छे दिनों का जो रोडमैप सामने रखा है, उसमें सबसे ज्यादा अगर कोई खुश हुआ है, तो वो हैं टैक्सपेयर्स। और हों भी क्यों नहीं, एक ही झटके में वित्त मंत्री ने टैक्स छूट की भरमार जो दे दी है। बजट 2014 में जहां थोड़ी खुशी मिली है, वहीं थोड़ा गम भी। अब नए बदलावों के मुताबिक नई फाइनेंशियल प्लानिंग करना भी जरूरी है।


बजट में निवेशकों को क्या मिला
सरकार ने पीपीएफ की निवेश सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये की है। अब नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट के साथ बीमा कवर मिलेगा। किसान विकास पत्र फिर से शुरू किया जाएगा। साथ ही, बेटी की शादी, पढ़ाई के लिए स्पेशल सेविंग स्कीम बनाई जाएगा। ईपीएफ में भी बदलाव हुआ है। अब 15000 रुपये तक के वेतन के लिए ईपीएफ में पैसा डालना जरूरी हो गया है। निवेशकों की सुविधा के लिए एक ही डीमैट में एफडी, म्यूचुअल फंड, शेयर और इंश्योरेंस की जानकारी होगी। सभी वित्तीय लेन-देन के लिए एक ही केवाईसी पर्याप्त होगा।


बजट में टैक्स पेयर्स को राहत
अब आयकर छूट सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये की गई है। इससे सालाना 5150 रुपये के टैक्स की बचत होगी। वहीं, 80सी के तहत निवेश सीमा 1 लाख रुपये से बढ़कर 1.5 लाख रुपये की गई है। यानी हर साल अधिकतम 16995 रुपये का टैक्स बचाया जा सकेगा। 80सी के तहत ईपीएफ, पीपीएफ, जीवन बीमा पॉलिसी, ईएलएसएस फंड, किसान विकास पत्र, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट, टैक्स सेविंग एफडी में किए निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। साथ ही, होम लोन पर ब्याज छूट सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़कर 2 लाख रुपये हुई है, इससे अधिकतम सालाना टैक्स बचत 16995 रुपये होगी।


म्यूचुअल फंड पर बढ़ा टैक्स
बजट में नॉन-इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी हुआ है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के लिए फंड में 3 साल तक बने रहना जरूरी है। वहीं, इक्विटी म्यूचुअल फंड की डिविडेंड आय पर टैक्स और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है। हालांकि, इक्विटी म्यूचुअल फंड पर 15 फीसदी का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है।


डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स में बदलाव
बजट में सरकार का एक छोटा सा बदलाव कॉरपोरेट और म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। सरकार ने कहा है कि अब डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स का कैलकुलेशन नेट के बजाय ग्रॉस डिविडेंड पर होगा। सिर्फ इतने बदलाव से म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स की देनदारी करीब 15 फीसदी बढ़ जाएगी।


वीडियो देखें