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टैक्स कंफ्यूजन, आपके निवेश पर कैसा असर

प्रकाशित Tue, 15, 2014 पर 18:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने पहले बजट में टैक्स को लेकर कई सारे कंफ्यूजन पैदा कर दिए हैं। डेट फंड पर टैक्स, एनपीएस, जीएएआर नियमों को लेकर कई सारे सवालों के जवाब मिलना अभी भी बाकी है। बड़ा सवाल ये है कि डेट फंड पर वित्त मंत्री ने जो टैक्स बोझ डाला है उससे आपके निवेश पर कैसा असर पड़ेगा। क्या अब आपको ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा, क्या एफआईआई के निवेश पर टैक्स दिक्कतें भी बढ़ने वाली हैं। इन्हीं सब सवालों का जबाव जानने की कोशिश इस खास शो में की गई है।


बजट में नॉन इक्विटी म्युचुअल फंड पर टैक्स बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्री ने इक्विटी स्कीमों के अलावा सभी स्कीमों पर 20 फीसदी कैपिटल गेन्स टैक्स कर दिया है। डेट फंड में 1 साल के बदले 3 साल रहने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगाया जाएगा। 3 साल से पहले पैसा निकालने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब वसूला जाएगा। बजट में आए इन ऐलानों के बाद म्युचुअल फंड कंपनियों ने डेट स्कीमों का लॉन्च रद्द कर दिया है। डेट म्युचुअल फंड पर बढ़े लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स पर म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री एकजुट हो गई है।


बजट में वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि अब ग्रॉस डिविडेंड पर डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स (डीडीटी) लगेगा, जबकि पहले नेट डिविडेंड पर डीडीटी लगता था। वित्त मंत्री के इस ऐलान से डिविडेंड स्कीमों पर टैक्स 2.5-3 फीसदी बढ़ेगा। साथ ही नियम बदलने से निवेशकों को कम डिविडेंड मिलेगा।


सरकार ने 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारियों को एनपीएस में निवेश जरूर कर दिया है। सरकारी कर्मचारियों के लिए एनपीएस में जमा राशि पर टैक्स नहीं लगेगा। वहीं 1 मई 2009 के बाद एनपीएस की सुविधा प्राइवेट कर्मचारियों के लिए भी लागू की गई है, लेकिन प्राइवेट कर्मचारियों को टैक्स छूट को लेकर बजट में कोई ठोस भरोसा नहीं मिला है। ऐसे में प्राइवेट कर्मचारियों को 2009 से 2014 के बीच जमा एनपीएस पर टैक्स लगने का डर है।


बजट में जनरल एंटी एवॉयडंस रूल्स (जीएएआर) को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। जीएएआर लागू होने की समयसीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बजट में जीएएआर को लेकर सरकार ने कोई चर्चा नहीं की है। जीएएआर 1 अप्रैल 2015 से लागू होना है। लेकिन सरकार जीएएआर लागू करेगी या नहीं इस पर सफाई नहीं आई है।


हालांकि सरकार ने बजट में आम लोगों को तोहफा देते हुए टैक्स सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दी है। होम लोन ब्याज पर टैक्स छूट सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी है। पीपीएफ की निवेश सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी है। 80सी के तहत निवेश सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी है। बजट में केवाईसी नियमों को आसान बनाने का ऐलान किया गया है।


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