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सुलझाएंगे टैक्स से जुड़ी आपकी उलझन

प्रकाशित Mon, 25, 2014 पर 16:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पूरे साल हमारी कोशिश रहती है कि हम ज्यादा से ज्यादा टैक्स बचाएं और इसके लिए हम कई तरह के निवेश भी करते हैं लेकिन फिर भी कई बार हम इनमें उलझ जाते हैं। आपकी इसी टैक्स से जुड़ी उलझन को सुलझाकर आसान बनाते हैं टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया। तो जानिए टैक्स से जुड़े आपके सभी सवालों का जवाब टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया से।


सवाल : कैपिटल गेन टैक्स कैसे बचाया जा सकता है?


सुभाष लखोटिया : लॉंन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स बचाया जा सकता है, लेकिन समय पर निवेश नहीं किया तो टैक्स देना पड़ेगा। 31 मार्च 2014 को खत्म हुए साल में हुआ लॉंन्ग टर्म कैपिटल गेन बचाया जा सकता है। करदाता लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की राशि को कैपिटल गेन बॉन्ड्स में निवेश कर सकते है, इसमें अधिकतम 50 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। ध्यान रखें कि प्रॉपर्टी बेचने के 6 महीने में बॉंन्ड में निवेश जरूर करना चाहिए। रिटर्न भरने से पहले पैसा कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम में डालना जरूरी होता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं किया तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स देना होगा। 


सवाल : गलती से दो रिवाइज रिटर्न भरा। दूसरा आईटीआर-5 भेज दिया है। कोई परेशानी तो नहीं होगी?


सुभाष लखोटिया : रिटर्न को जितनी बार चाहे रिवाइज कर सकते हैं। लेकिन रिवाइज रिटर्न का आईटीआर-5 बंगलुरु जरूर भेजें। 


सवाल : 2009 में फ्लैट खरीदा था, जो 2014 में 20 लाख रुपये में बेचा। टैक्स कैसे देना होगा? 


सुभाष लखोटिया : पुरानी प्रॉपर्टी बेचने के 2 साल अंदर नई प्रॉपर्टी खरीदना जरूरी होता है। रिटर्न भरने से पहले इन पैसों को इंवेस्ट करें या कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम में रखें। ध्यान रखें कि कैपिटल गेन अकाउंट रिटर्न भरने की आखिरी तारीख से पहले खोलना जरूरी है। अगर आपने खाता नहीं खोला तो टैक्स पर छूट का फायदा नहीं मिलेगा।  


सवाल : सीनियर सिटीजन हूं। कुल इनकम पर 5419 रुपये का टैक्स दिया है। बाद में जाना कि ज्यादा टैक्स दिया है। अब क्या करें?   


सुभाष लखोटिया : आपने सेक्शन 87ए का फायदा नहीं लिया, इसलिए ज्यादा टैक्स देना पड़ा। आप रिवाइज रिटर्न भरकर अपना रिफंड ले सकते हैं।  


सवाल : क्यों आईटी विभाग की नजर है कॉर्पोरेट टैक्सपेयर्स पर और हमारी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा? 


सुभाष लखोटिया : सेक्शन 37 के तहत तनख्वाह, भत्ते का निर्णय कंपनी का होगा। कर्मचारी की तनख्वाह आदि के फैसले में आईटी विभाग का कोई रोल नहीं होगा। हालांकि उच्च अधिकारीयों को दिए जा रहे भत्तों पर आईटी विभाग की नजर होगी। कंपनी ध्यान से रुल 2, एबी, 2बीबी, रुल 3 के तहत भत्तों पर टैक्स लगाएं।  


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