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टैक्स गुरु: स्क्रूटनी और क्लबिंग से जुड़ी अहम बातें

प्रकाशित Sat, 13, 2014 पर 17:30  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आइए टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया से हम जानेंगे क्लबिंग और स्क्रूटनी से जुड़ी अहम बातें और साथ ही सुलझाएंगे टैक्स से जुड़ी आपकी उलझन।
 
सुभाष लखोटिया का कहना है कि समय से रिटर्न भरने पर भी करदाता स्क्रूटनी में आ सकते हैं। अगर इनकम छुपाई जाएं या इनकम पर सही टैक्स नहीं दिया जाएं तो करदाता स्क्रूटनी के दायरे में आने की संभावना हैं। इसके अलावा स्क्रूटनी आने के और भी कई वजह हैं। करदाता ने कोई बड़ा खर्च किया है तो वो खर्च किए गए पैसे के स्त्रोत की जानकारी देना जरूरी है। सभी तरह के ब्याज को रिटर्न में दिखाना जरूरी है।


बचत खाते का ब्याज, बैंक एफडी के ब्याज पर टैक्स दिखलाना जरूरी है। सेक्शन 80टीटीए के तहत बचत खते का 10,000 रुपये तक का ब्याज टैक्स फ्री होता है। टैक्स फ्री बॉंन्ड का ब्याज रिटर्न में नहीं दिखाने पर कोई परेशानी नहीं होगी। करदाता दोस्त रिश्तेदार, बिजनेस एसोसिएट्स से ब्याज मुक्त लोन ले और दे सकते हैं। पत्नी, बहु, नाबालिग बच्चों को ब्याज मुक्त लोन नहीं दें बल्कि माइनर बच्चों का ब्याज भी रिटर्न में दिखाएं। 


बैंक एफडी पर सिर्फ 10 फीसदी ही टैक्स काटता है। ब्याज को इनकम में जोडकर स्लैब के मुताबिक करदाताओं को टैक्स देना चाहिए। नाबालिग ब्च्चे की सालाना 1500 रुपये से ज्यादा इनकम माता-पिता की इनकम में जुड़ेगी। पत्नी/बहु को गिफ्ट देने पर उससे हुई इनकम पति/सास/ससूर की इनकम में जुड़ेगी। करदाता गिफ्ट पर सेक्शन 56 के तहत टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं। रिश्तेदार या शादी पर मिले गिफ्ट पर टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन अगर गैर-रिश्तेदारों से सालाना 50,000 रुपये से ऊपर का गिफ्ट मिलता है तो उसपर टैक्स देना पड़ेगा।


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