Moneycontrol » समाचार » टैक्स

किन बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी पर कटेगा टीडीएस

प्रकाशित Sat, 22, 2014 पर 13:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स से जुड़ी आपकी हर परेशानी का हल जानते हैं टैक्स गुरू। टैक्स गुरू में हर हफ्ते हम बताते हैं कैसे बचा सकते हैं आप अपना टैक्स और बचा सकते हैं ज्यादा रकम। रहिए हमारे साथ आप बचाइये अपना ढेर सारा टैक्स। टैक्स की दुनिया का कोई सवाल नहीं जिसका जवाब हमारे टैक्स गुरू के पास नहीं है। आज टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया बताएंगे बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी पर टीडीएस काटने का जो नया नियम आया है उसकी बारिकियां क्या हैं।


इस बार बजट में नया नियम लाया गया है जिसके तहत बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी पर कंपनी द्वारा टीडीएस काटा जाएगा।  1 अक्टूबर 2014 से नया सेक्शन 194 डीए आया है। सेक्शन 194 डीए के तहत अब एलआईसी या अन्य बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी पर टीडीएस कटेगा। हालांकि ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि सभी पॉलिसी पर ये टीडीएस नहीं कटेगा। आयकर की धारा 10(10डी) के तहत नियम है कि जो पॉलिसी इसके अंतर्गत आती हैं उन पर टैक्स नहीं कटेगा। हालांकि ये भी राहत की बात है कि छोटी पॉलिसी जिनकी मैच्योरिटी राशि 1 लाख रुपये से कम हैं उन पर भी टैक्स नहीं लगेगा।


आयकर की धारा 10(10डी) के तहत नियम है कि अगर आपने कोई पॉलिसी 1 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2012 के बीच में ली है और इन पॉलिसियों का प्रीमियम सम अश्योर्ड का 20 फीसदी से ज्यादा नहीं है, तो उसकी मैच्योरिटी पर टीडीएस नहीं कटेगा। वहीं इसका दूसरा नियम है कि अगर आपने पॉलिसी 1 अप्रैल 2012 के बाद ली है और उसका किसी भी साल का प्रीमियम सम एश्योर्ड का 10 फीसदी से ज्यादा नहीं है तो उस पर भी टीडीएस नहीं कटेगा। वहीं एक अच्छी बात ये है कि 1 अप्रैल 2003 से पहले ली गई पॉलिसी है और उसका प्रीमियम कितना भी है तो भी उस पर टीडीएस नहीं कटेगा।


नए सैक्शन 194 डीए के तहत जो पॉलिसी इस परिभाषा के दायरे में नहीं आती है तो उनकी मैच्योरिटी पर बीमा कंपनी से मिलने वाली राशि पर 2 फीसदी टीडीएस लगेगा। हालांकि अगर किसी ने रिटर्न भरते वक्त पैन नंबर नहीं दिया है तो कंपनी पॉलिसी की मैच्योरिटी पर 20 फीसदी टीडीएस काट सकती है। वहीं अगर राशि पॉलिसी होल्डर की मृत्यु पर मिलती है तो पूरा राशि टैक्स फ्री हो जाएगी।


वीडियो देखें