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रियल एस्टेट टीवी: कब बदलेंगे हालात

प्रकाशित Mon, 08, 2014 पर 11:30  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोदी सरकार के पहले 6 महीनों में पूरे इकोनॉमी में एक नई एनर्जी आ गयी है। लेकिन, रियल्टी सेक्टर अब भी इससे अछूता है। खरीदार गायब हैं और निवेशक पैसे लगाने से कतरा रहा हैं। कर्ज के बोझ तले दबे इस सेक्टर को अब बैंक, एनबीएफसी और प्राइवेट इक्विटी फंड से भी राहत नहीं मिल रही है।


पूंजी की जबरदस्त किल्लत है। ऐसे में एफडीआई और आरईआईटी पर सरकार के फैसले क्या सेक्टर को बेल आउट कर पाएंगे। इसी मुद्दे आपनी राय दे रहे हैं शोभा डेवलपर्स के वाइस चेयरमैन और एमडी जे सी शर्मा, इंडिया बुल्स में प्राइवेट इक्विटी के सीईओ अंबर महेश्वरी और इंडिपेंडेंट कन्सल्टेंट अरविंद नंदन।


जे सी शर्मा के मुताबिक रियल एस्टेट कंपनियों के लिए लिक्विडीटी की समस्या बहुत बढ़ गई है। लेकिन जिन कंपनियों का अपना कैश फ्लो अच्छा है और जिनकी बिक्री अच्छी है उनको आज भी बैंकों से फंडिंग मिल रही है। एनबीएफसी और प्राइवेट इक्विटी भी इनको फंड दे रहे हैं। लेकिन जहां पर बिक्री में गिरावट आई है वहां एनबीएफसी और प्राइवेट इक्विटी फंड रियल एस्टेट कंपनियों की फंडिंग में हिचक रहे हैं। अगर ये फंडिंग कर भी रहे हैं तो इसकी शर्तें डेवलपर्स के हक में नहीं है। इसकी वजह बाजार पर आया दबाव और कुछ रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा किए गये डिफाल्ट हैं।


वहीं अरविंद नंदन के मुताबिक कंस्ट्रक्शन की लागत की वजह से या अन्य दूसरी वजहों से आज रियल एस्टेट कंपनियों की लागत बहुत बढ़ गई है। जिसकी बजह से डेवलपर जिस कीमत पर प्रॉपर्टी बेचना चाहता उस कीमत पर खरीद करना खरीदार के लिए संभव नहीं हो पाता। जिसकी वजह से सप्लाई और डिमांड में एक गैप आ गया है। जिसके लिए हमें एक ऐसे ब्रिज की जरूरत हैं जहां बेचने वाले की कीमत और खरीदार की क्षमता के बीच एक मीटिंग प्वाइंट बन सके जिससे बाजार में एक बार फिर खरीद फरोख्त को गति मिल सके।


अंबर महेश्वरी ने कहा कि बाजार में लिक्विडी बहुत है। निवेशक निवेश के सही समय का इंतजार कर रहे हैं। मोदी सरकार के आने के बाद सेंटीमेंट में सुधार भी आया है। जैसे ही अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा निवेशक रियल एस्टेट सेक्टर की तरफ रुख कर लेंगे।


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