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आम बजट से क्या मिला टैक्सपेयर्स को

प्रकाशित Sat, 28, 2015 पर 17:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट में टैक्सपेयर्स के लिए तो अच्छे दिनों का कोई सिग्नल नहीं मिला। वित्त मंत्री ने न तो पर्सनल टैक्स के मोर्चे पर बड़ी छूट दी, और न ही एक्जेंप्शन लिमिट बढ़ाने की लोगों की उम्मीद पूरी की। ट्रांसपोर्ट अलाउंस और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की लिमिट जरूर बढ़ाई, लेकिन इससे मिडिल क्लास की जेब में वाकई में कितने रुपए ज्यादा आएंगे, और क्यों ये बजट टैक्सपेयर्स को निराश कर रहा है, ये हम जानेंगे अपने टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया से।


इनकम टैक्स स्लैब या न्यूनतम टैक्सेबल इनकम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ट्रांसपोर्ट अलाउंस 800 रुपये से बढ़ाकर 1,600 रुपये किया गया है। हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट 30,000 रुपये हो गई है। 80 साल से ज्यादा के लोगों को मेडिकल खर्च पर 30,000 रुपये की छूट मिलेगी। गंभीर बीमारियों के लिए वरिष्ठ नागरिकों की छूट सीमा बढ़कर 80,000 रुपये कर दी गई है। वहीं पेंशन फंड में निवेश की छूट सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये की गई है। सेक्शन 80सीसीडी के तहत एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की एक्स्ट्रा छूट मिल सकेगी।


वरिष्ठ बीमा योजना को सर्विस टैक्स से छूट दी गई है। सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश पर 80सी के तहत छूट मिल सकेगी। काले धन पर लगाम के लिए कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार प्लास्टिक मनी को बढ़ावा देगी। विदेशों में काला धन छुपाए रखने पर 10 साल तक की सजा मिल सकती है। रिटर्न में विदेश में जायदाद का खुलासा करना होगा। काले धन के लिए नया कानून बनेगा। वही 1 करोड़ से अधिक आय वाले लोगों को 2 फीसदी एक्स्ट्रा सरचार्ज लगेगा।


टैक्स गुरू, सुभाष लखोटिया का कहना है कि बजट से पहले करदाताओं को काफी उम्मीदें थीं लेकिन बजट में नौकरीपेशा वर्ग, कर्मचारियों के लिए कुछ खास छूट नहीं दी गई है। करदाताओं को लुभाने के लिए उन्होंने कॉरपोरेट टैक्स कम करने के लिए कहा जरूर है लेकिन ये भी धीरे धीरे घटाया जाएगा।


हालांकि 80डी के तहत अगर मेडिकल पॉलिसी लेते हैं तो इसके प्रीमियम पर अब 25000 रुपये तक की छूट मिल सकेगी और अब बुजुर्गों को लिए भी हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट बढ़ाई गई है। ये कुछ अच्छे कदम है लेकिन फिर भी ये छूट तो तभी मिलेगी जब नागरिक निवेश करेंगे। यानी पैसा बचाने के लिए पैसा खर्च करना होगा।


हालांकि ट्रैवल अलाउंस में बढ़ोतरी कर कुछ राहत देने की बात की है लेकिन दूसरी तरफ सर्विस टैक्स में इजाफा करके जेब खाली करने का प्रावधान भी कर दिया गया है। दूसरी तरफ एजूकेशन सेस और स्वच्छ बारत सेस लगाकर भी करदाताओं की जेब हल्की करने का रास्ता खोल दिया गया है।


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