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फाइनेंशियल प्लानिंग देगी सपनों को सही दिशा

प्रकाशित Sat, 14, 2015 पर 13:01  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

स्वतंत्र, स्वाभिमानी, संयम से भरी, शालीन भी और शरारती भी, कुछ ऐसी है आज की नारी। जो सपने देखती है तो उसे पूरा करने का जज्बा भी रखती है। लक्ष्य बनाती है तो उसे हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का दम भी लगाती है। रिटर्न के लिए रिस्क लेने से पीछे नहीं हटती।


योर मनी में हम ऐसी ही कुछ महिला निवेशकों की पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग करेंगे। ताकि उनके सपनों को दिशा मिल सके और उन्हें अपने गोल हासिल करने के लिए सही और सटीक रोडमैप मिल सके। आइए इन्हीं मुद्दों पर राय लेंगे फाइनेंशियल प्लानर्स सीईआईएल की एमडी उमा शशिकांत और कंपोजिट इन्वेस्टमेंट सर्विस की जीनत जगानी से।


महिलाओं का इन्वेस्टमेंट ट्रेंड बदल गया है और अब महिलाएं रिस्क लेने में आगे हैं। इक्विटी म्युचुअल फंड स्कीम में महिलाओं की दिलचस्पी ज्यादा बढ़ी है। 2013 के मुकाबले 2014 में इक्विटी म्युचुअल फंड स्कीम में महिलाओं ने 8 फीसदी ज्यादा निवेश किया है। 2014 में महिलाओं ने इक्विटी स्कीम में पुरुषों से 6 फीसदी ज्यादा निवेश किया है। 40 से 60 साल की महिलाओं ने इक्विटी स्कीम में ज्यादा इन्वेस्ट किया है। 2013 के मुकाबले 2014 में एसआईपी में महिलाओं का निवेश दोगुना हुआ है।


सवाल : मेरी उम्र 31 साल है और सालाना आय 20 लाख रुपये है। मेरा एफडी में 10 लाख रुपये, म्युचुअल फंड में 1 लाख रुपये का निवेश है। मेरे पास अभी कोई इंश्योरेंस और इमर्जेंसी फंड नहीं है। खुद का घर खरीदना है और कीमती सॉलिटेयर खरीदने की भी इच्छा है। खुद का स्टोर खरीदने के लिए 1.5 साल में रकम जुटानी है।


उमा शशिकांत: आपको सबसे पहले अपने बिजनेस गोल और पर्सनल गोल को और उसकी स्ट्रैटेजी को अलग रखना चाहिए। बिजनेस का असर आपके पर्सनल गोल पर, लाइफ पर नहीं पड़ना चाहिए इसके लिए आपके इमर्जेंसी फंड बनाए रखना चाहिए।   


जीनत जगानी: आपको अपनी 3 महीने की आय लिक्विड फंड में अलग से रखनी चाहिए और अपने लिए मेडिक्लेम पॉलिसी लेनी चाहिए। साथ ही 6 लाख रुपये का इमर्जेंसी फंड बनाए रखना चाहिए और अपने बचत को भी बढ़ाना चाहिए। हर एक व्यक्ति को 5 करोड़ रुपये का लाइफ कवर और 10 लाख रुपये का मेडिक्लेम लेना जरूरी है।


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