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योर मनीः हेल्थ कवर पर बुजुर्गों का भी हक

प्रकाशित Fri, 27, 2015 पर 12:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है, स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ती जाती हैं। कुछ साल पहले तक ज्यादातर बीमा कंपनियां बुजुर्गों को हेल्थ इंश्योरेंस देने में आनाकानी करती थीं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत को देखते हुए साल 2013 में आईआरडीए ने बीमा कंपनियों को ये निर्देश दिया कि कोई भी बीमा कंपनी वरिष्ठ नागरिकों को हेल्थ इंश्योरेंस देने से मना नहीं कर सकती। अब वरिष्ठ नागरिक 65 साल की उम्र में भी पहली बार हेल्थ इंश्योरेंस ले सकते हैं। इसी पर आज शो में वाइजइंवेस्ट एडवाइजर्स के सीईओ हेमंत रुस्तगी के साथ चर्चा करेंगे।


नई गाइडलाइंस के मुताबित 60 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति भी हेल्थ इंश्योरेंस ले सकते हैं। हेल्थ इंश्योरेंस लेने के लिए प्री-इंश्योरेंस मेडिकल टेस्ट जरूरी हैं। अगर मेडिकल टेस्ट नहीं करवाना, तो खास सीनियर सिटीजन के ए प्लान ले सकते हैं। सीनियर सिटीजन के प्लान के प्रीमियम ज्यादा हैं और सीनियर सिटीजन प्लान को-पेमेंट के आधार पर बने हैं।


क्लेम की स्थिति में पॉलिसी धारक को रिस्क शेयर करना होता है। मौजूदा बीमारी के लिए रिस्क शेयरिंग 50 फीसदी तक है जबकि सामान्य हालातों में रिस्क शेयरिंग 15-30 फीसदी तक तय की गई है। पॉलिसी धारक को मौजूदा बीमारी की जानकारी देना जरूरी है। अगर मौजूदा बीमारी का इलाज जारी तो उसका कवर 12 महीने बाद चालू होगा। हालांकि अगर पहले की बीमारी है लेकिन पॉलिसी धारक को जानकारी नहीं तो शुरू से कवर मिलने की सुविधा मिलेगी।


हेमंत रुस्तगी का कहना है कि 60 साल और ज्यादा उम्र के लोगों के लिए हेल्थ बीमा जरूरी है क्योंकि हर साल इलाज का खर्च बढ़ रहा है। मेडिकल खर्च सालाना 10-15 फीसदी बढ़ रहा है। बुजुर्गों के लिए हेल्थ बीमा जरूरी है क्योंकि बुजुर्गों के सीमित इनकम स्त्रोत होते हैं और उनको स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं ज्यादा होती हैं।


आजकल फैमिली फ्लोटर प्लान काफी पॉपुलर हैं लेकिन ये कम उम्र लोग और छोटे परिवार के लिए होते हैं। बुजुर्गो के लिए हेल्थ बीमा के तहत उनके लिए इंडिविजुएल प्लान लें और खास बुजुर्गों के लिए बने हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लें।


बुजुर्ग हेल्थ बीमा कवर में अस्पताल का खर्च, डे केयर खर्च, अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के मेडिकल खर्च, - एंबुलेंस का खर्च और शर्तों के साथ मौजूदा बीमारियां कवर होती हैं। कई मामलों में पॉलिसी के लिए मेडिकल टेस्ट जरूरी होता है।


हेल्थ बीमा कराते समय को-पेमेंट नियम के बारे में पता करना चाहिए। को-पेमेंट यानि क्लेम राशि का एक निश्चित परसेंट पॉलिसी धारक देगा। पॉलिसी में कई बीमारियों के लिए सब-लिमिट होते हैं तो सब-लिमिट के बारे में जानना जरूरी है। सब लिमिट के बिना पॉलिसी बेहतर विकल्प होती है। मौजूदा बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड जांचना चाहिए और पता करें कि मौजूदा बीमारियों पर कोई प्रतिबंध तो नहीं है। आमतौर पर मौजूदा बीमारियों का कवर 2-3 साल बाद शुरू होता है। घर के पास के अच्छे अस्पताल नेटवर्क अस्पताल में होना बेहतर होता है।


बुजुर्गों के हेल्थ बीमा के लिए आजकल आलियांज की सिल्वर हेल्थ, नेशनल इंश्योरेंस की वरिष्ठ मेडिक्लेम, अपोलो म्युनिख की ऑप्टिमा सीनियर और मैक्स बूपा की हार्टबीट गोल्ड पॉलिसी चल रही हैं। इस बार बजट 2015 में वरिष्ठ नागरिकों के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट बढ़ाई गई है। ये छूट 20,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये की गई है। यानी सरकार भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा की जरूरत को समझती है।


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