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कारोबारी फायदे की बात टैक्स गुरू के साथ

प्रकाशित Sat, 09, 2010 पर 13:41  |  स्रोत : Hindi.in.com

9 अक्टूबर 2010

सीएनबीसी आवाज़


टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया का कहना है कि कारोबारियों को अपने बही-खाते के अकाउंट सही ढंग से रखने चाहिए। आयकर की धारा 145 के तहत बिजनेस करने वालों को कारोबारी बही-खाते को बनाए रखना जरूरी है।



बिजनेस करने वालों को अकाउंट सही प्रकार से रखने काफी आवश्यक हैं अन्यथा इसका भारी नुक्सान हो सकता है। सहीं ढ़ंग से अकाउंट ना रखने पर आयकर विभाग स्वंय मूल्यांकन करता है और कारोबारी करदाता को वाजिब से ज्यादा आयकर भी देना पड़ सकता है।



कारोबारी, कैश सिस्टम्स ऑफ अकाउंटिंग या मर्केन्टाइल सिस्टम्स से अकाउंट रख सकते हैं। व्यापारी अपनी मर्जी के हिसाब से कैश सिस्टम्स ऑफ अकाउंटिंग या मर्केन्टाइल सिस्टम्स के जरिए अकाउंट मेंटेंन कर सकते हैं। हालांकि इसमें बार-बार परिवर्तन नहीं कर सकते हैं।


 



कैश सिस्टम्स ऑफ अकाउंटिंग के तहत जब पैसे का भुगतान हो जाए उसके बाद अकाउंट में एंट्री होती है।



मर्केन्टाइल सिस्टम्स के तहत अगर बिक्री हो गई है तो उसी समय अकाउंट में एंट्री हो जाती है चाहे पैसों का भुगतान बाद में हो। इसके अलावा मर्केन्टाइल सिस्टम्स के तहत अगर कारोबारी के पास भुगतान के बिल आ गए हैं तो भी उसी समय अकाउंट बुक में एंट्री करनी जरूरी होती है।



टैक्स गुरू के मुताबिक एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि सरकार कभी भी कारोबारियों के अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के मानकों में परिवर्तन कर सकती है।


टैक्स गुरू के मुताबिक छोटे कारोबारियों के लिए आयकर सेक्शन 44 एडी के नियमों के तहत 60 लाख तक के टर्नओवर पर व्यापारी को अकाउंट का रिकॉर्ड नहीं रखना पड़ता है। ऐसे व्यापारियों की कुल आय के 8 फीसदी पर आयकर लगता है।  




अगर आपने होमलोन ले रखा है और घर का पजेशन 2 साल बाद मिलने वाला है। अगर आपने होमलोन के साथ एम्पलॉयर से एचआरए बेनेफिट भी लिया हुआ है तो टैक्स गुरू के मुताबिक एचआरए बेनेफिट भी मिलता रहेगा।



आपको होमलोन पर लगने वाले ब्याज पर आयकर कानूनों के तहत छूट मिलती है। हालांकि ये छूट करदाता को तभी मिलती है जब उसके घर का निर्माण पूरा हो जाए। जो घर फिलहाल कंस्ट्रक्शन के दौर में चल रहा है उस पर आयकर में छूट नहीं मिल पाएगी।


टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया ने कहा कि आयकर कानूनों के तहत 65 साल की आयु के बाद आप सीनियर सिटीजन की श्रेणी में आते हैं। 65 साल के बाद ही सीनियर सिटीजन को मिलने वाली कर छूट का लाभ उठा सकते हैं।


आयकर कानूनों के तहत सीनियर सिटीजन की 2.4 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता है। 2.4 लाख से 5 लाख तक की आमदनी पर 10 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। 5 लाख से 8 लाख तक की आय पर 20 फीसदी की दर से आयकर लगता है।



8 लाख से ज्यादा की आय पर सीनियर सिटीजन को 30 फीसदी की दर से आयकर देना होगा।



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