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आईटीआर फॉर्म में किन बातों का रखें ध्यान

प्रकाशित Tue, 02, 2015 पर 12:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कई लोग निवेश नहीं करना चाहते हैं क्योंकि वो नुकसान से डरते हैं। आमतौर पर लोग भूल जाते हैं कि निवेश किसी ना किसी जरूरत को पूरा करने के लिए किया जाता है। यहां हम आपको सिखाते हैं निवेश के गुर और साथ ही खर्च करने का सही सलीका जो आपको देता है जिंदगी जीने का एक नया नजरिया। आज आपको निवेश के ये गुर सिखा रहे हैं एटिका वेल्थ मैनेजमेंट के निखिल कोठारी और फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पांड्या


आज सबसे पहले बात करते हैं नए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म की। सरकार ने इनकम टैक्स पेयर्स को बड़ी राहत देते हुए रिटर्न फॉर्म आसान कर दिए हैं। अब टैक्स रिटर्न भरने वालों को अपनी विदेश यात्रा या बैंक एकाउंट के ब्यौरे देने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही फॉर्म आईटीआर 2 भरने वालों को आसानी के लिए एक नए फॉर्म आईटीआर 2 ए भी लाने का प्रस्ताव है। ये भी कहा गया है कि आईटीआर 2 या आईटीआर 2 ए में मुख्य फॉर्म में 3 से ज्यादा पेज नहीं होंगे। सीएनबीसी-आवाज़ ने आपको पहले ही ये जानकारी दी थी कि वित्त मंत्रालय रिटर्न फॉर्म में अधिकतम 3 पेज रखने पर विचार कर रहा है।


आईटीआर 2 ए उन लोगों के लिए होगा जिनकी कैपिटल गेंस, बिजनेस/प्रोफेशन या विदेश से आय नहीं है। अब आईटीआर 2 या आईटीआर 2ए में सिर्फ पासपोर्ट नंबर की जानकारी देनी होगी, विदेश यात्रा की जानकारी या खर्च बताना जरूरी नहीं होगा।


इन फार्मों को भरते समय आपको बैंक के एकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड की जानकारी देनी होगी। लेकिन बैंक में रखे बैलेंस और डॉरमैंट बैंक एकाउंट की जानकारी नहीं देनी होगी।


नये फार्म जून के तीसरे हफ्ते से भरे जा सकेंगे। अब रिटर्न भरने की तारीख भी एक महीने बढ़ाई गई है। अब आईटी रिटर्न 31 अगस्त 2015 तक भरे जा सकेंगे।


सैलरी, एक प्रॉपर्टी कोई अन्य आय के होने पर आपको आटीआर 1 फार्म भरना होगा। सैलरी, एक से ज्यादा प्रॉपर्टी, कैपिटल गेंस, अन्य आय होने पर आटीआर 1 फार्म भरना होगा। सैलरी, एक से ज्यादा प्रॉपर्टी, अन्य आय होने पर आटीआर 2 ए फार्म भरना होगा। बिजनेस या पार्टनर के तौर पर प्रोफेशन से आय होने पर आटीआर 3 फार्म भरना होगा। बिजनेस या प्रोपराइटर के तौर पर प्रोफेशन से इनकम होने पर आईटीआर 4 फार्म भरना होगा।


अब आपके टैक्स से ही जुड़ी एक और खबर। 1 जून से टैक्स से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव हो गए हैं, जिसके बाद सर्विस टैक्स की दरें बढ़कर 14 फीसदी हो जाएंगी, अब तक सर्विस टैक्स की दर 12.36 फीसदी थी। सर्विस टैक्स बढ़ने से आपका मोबाइल बिल, इंटरनेट, एसी रेल यात्रा, हवाई टिकट, रेस्टोरेंट, इंश्योरेंस पॉलिसी और रेडियो टैक्सी का खर्च बढ़ जाएगा।


इसी के साथ टीडीएस का दायरा भी बढ़ जाएगा। अब तक आरडी से ब्याज आय पर टीडीएस नहीं काटा जाता था, लेकिन अब बैंक की सभी ब्रांच में जमा डिपॉजिट पर ब्याज को जोड़कर टीडीएस काटा जाएगा। अब तक किसी एक ब्रांच में रखे डिपॉजिट के ब्याज पर ही टीडीएस काटा जाता था। अब बैंक डिपॉजिट पर मिले ब्याज के 10,000 रुपये से ज्यादा होने पर 10 फीसदी टीडीएस लगेगा।


अब 5 साल के पहले ईपीएफ से पैसे निकालने पर 10 फीसदी टीडीएस की कटौती होगी। लेकिन 30,000 से कम की निकासी पर टीडीएस नहीं कटेगा। पैन नहीं होने पर टीडीएस की दर 30 फीसदी होगी।


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