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योर मनी: नई पॉलिसी, इलाज के साथ बचत

प्रकाशित Wed, 03, 2015 पर 15:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

निवेश के लिए सबसे पहला कदम है अपने लक्ष्य तय करना। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर सही लक्ष्य नहीं तो फिर निवेश का कोई मकसद नहीं। पहले लक्ष्य बनाएं और फिर पैसे लगाएं। आमतौर पर लोग, लक्ष्य तो तय कर लेते हैं लेकिन वो पर्याप्त नहीं होते क्योंकि हम सभी महंगाई को भूल जाते हैं। महंगाई को ध्यान में रखकर तय किया गया लक्ष्य ही सही रिटर्न देगा। ऐसे में सही लक्ष्य तय करें ताकि आपको मिले निवेश का पूरा फायदा। आज यहां निवेश से जुड़े गुरुमंत्र दे रहे हैं, गौरव मशुरुवाला और गजेंद्र कोठारी


इलाज के खर्च को पूरा करने में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हमारी मदद करती है। लेकिन जल्द ही एक नई हेल्थ पॉलिसी आने वाली है जो ना सिर्फ इलाज का खर्च उठाएगी बल्कि सेविंग अकाउंट जैसी सुविधा भी देगी। पॉलिसी धारक को हेल्थ इंश्योरेंस के साथ रिटर्न भी मिलेगा जो वह भविष्य में होने बीमारियों पर खर्च कर सकता है। आईआरडीए जल्द ही हेल्थ इंश्योरेंस के साथ सेविंग अकाउंट की सुविधा वाली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की मंजूरी दे सकती है।


इस पॉलिसी का प्रीमियम 3 भागों में बांटा जाएगा। पहला होगा हेल्थ इंश्योरेंस का रिस्क कवर। दूसरा, बीमा कंपनी के खर्च के लिए इस्तेमाल होगा और तीसरा भाग सेविंग खाते में जमा होगा। इस पॉलिसी के तहत बचत खाते में जमा रकम पर ब्याज मिलेगा। लेकिन ध्यान रहे इस खाते का इस्तेमाल आम सेविंग अकाउंट की तरह नहीं होगा। इस पॉलिसी के तहत प्रीमियम के अनुसार हेल्थ इंश्योरेंस कवर मिलेगा और पॉलिसी का प्रीमियम सालाना देना होगा।


इस पॉलिसी में टैक्स छूट का लाभ भी मिलेगा। ये छूट सेक्शन 80 डी के तहत होगी। इसमें प्रीमियम पर 20000 रुपये तक की छूट मुमकिन है। इस पॉलिसी में भविष्य में इलाज खर्च के लिए पैसे जमा किए जा सकते हैं और प्रीमियम के एक हिस्से पर बचत खाते की भी सुविधा है। लेकिन बचत खाते की रकम मेडिकल खर्च के लिए इस्तेमाल करनी होगी।


नई पॉलिसी में 3 साल का लॉक-इन मुमकिन है जिसमें 25000 का न्यूनतम निवेश जरूरी होगा। इसमें मैच्योरिटी से पहले रकम निकालने की सुविधा होगी लेकिन पैसे सिर्फ इलाज के खर्च के लिए ही निकाले  जा सकेंगे।


अब बात करते हैं एक नई क्रेडिट पॉलिसी की। रिजर्व बैंक के रेपो रेट घटाने के साथ ही बैंकों ने भी कर्ज सस्ता करना शुरू कर दिया है। देश के सबसे बडे़ बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बेस रेट 0.15 फीसदी घटा दिया है जिसके बाद अब बैंक का बेस रेट घटकर 9.7 फीसदी हो गया है।


इसके अलावा इलाहाबाद बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और देना बैंक ने भी अपने बेस रेट घटाए हैं। आईडीबीआई बैंक ने कुछ चुनिंदा डिपॉजिट्स पर रेट कम की हैं। इलाहाबाद ने अपना बेस रेट 0.3 फीसदी कम कर दिया है जिससे बैंक का बेस रेट 10.25 फीसदी से घटकर 9.95 फीसदी हो गया है। बैंक की नई दरें 8 जून से लागू होंगी।


आरबीआई गवर्नर ने बैंकों को रेट कट का फायदा लोगों को देने के लिए कहा है। कम रेपो रेट से बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता होगा। जिससे बैंक अपने बेस रेट में कमी कर सकते हैं। इससे सभी तरह के लोन सस्ते होंगे।


जानकारों का मानना है कि रेपो रेट में कमी से बैंक ब्याज दर घटा सकते हैं। बैंकों को कॉस्ट ऑफ फंड कम करना होगा। आग चलकर डिपॉजिट रेट भी कम होने की उम्मीद। ये लॉन्ग टर्म डिपॉजिट कराने का सही वक्त है।


जानकारों का कहना है कि ये बैंक एफडी में निवेश के लिए सही समय हैं। क्योंकि बैंक अगले 6-9 महीनों में एफडी रेट और कम कर सकते हैं। जनकारों की निवेश को को सलाह है कि वे लंबे समय के लिए लॉन्ग टर्म डेट फंड/ गिल्ट में निवेश करें क्योंकि आने वाले समय में अच्छे रिटर्न की उम्मीद है।


रेपो रेट के घटने पर डेट मार्केट पर क्या असर पड़ सकता है इस पर जानकारों की राय है कि ब्याज दरें गिरने से बॉन्ड की कीमतें बढ़ती हैं। जानकारों का कहना है कि लॉन्ग टर्म बॉन्ड की कीमत शॉर्ट टर्म बॉन्ड के मुकाबले ज्यादा बढ़ेंगी। बॉन्ड की कीमत बढ़ने से यील्ड में गिरावट आएगी और सेकेंडरी मार्केट में बॉन्ड की डिमांड बढ़ेगी। डेट म्युचुअल फंड की एनएवी में बढ़ोतरी होगी। कैश फंड या लिक्विड फंड को थोड़ा फायदा होगा। इसके अलावा मौजूदा डेट इंस्ट्रूमेंट निवेशकों को फायदा होगा।


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