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गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ईटीएफ कौन बेहतर

प्रकाशित Sat, 27, 2015 पर 14:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

निवेश के लिए सबसे पहला कदम है अपने लक्ष्य तय करना। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर सही लक्ष्य नहीं तो फिर निवेश का कोई मकसद नहीं। पहले लक्ष्य बनाएं और फिर पैसे लगाएं। आमतौर पर लोग, लक्ष्य तो तय कर लेते हैं लेकिन वो पर्याप्त नहीं होते क्योंकि हम सभी महंगाई को भूल जाते हैं। महंगाई को ध्यान में रखकर तय किया गया लक्ष्य ही सही रिटर्न देगा। ऐसे में सही लक्ष्य तय करें ताकि आपको मिले निवेश का पूरा फायदा। आज आपके निवेश से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे हैं वाइज इनवेस्ट एडवाइजर्स के हेमंत रुस्तगी


आज सबसे पहले बात करते हैं गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ईटीएफ की। हेमंत रुस्तगी के मुताबिक गोल्ड बॉन्ड लाने का मकसद फिजिकल गोल्ड की मांग में कमी लाना है। गोल्ड बॉन्ड 2, 5 और 10 ग्राम सोने के मूल्य में होंगे। जिनकी अवधि 5-7 साल  हो सकती है। गोल्ड बॉन्ड पर कुछ ब्याज भी मिलेगा। इन बॉन्डों को कमोडिटी एक्सचेंजों पर बेचा जा सकेगा। इनसे संबंधित कर नियम फिजिकल गोल्ड पर लागू कर नियमों की तरह ही होंगे।


गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ईटीएफ की तुलना करते हुए हेमंत रुस्तगी ने बताया कि दोनों में निवेश के लिए फिजिकल गोल्ड लेने की जरूरत नहीं होती। गोल्ड ईटीएफ के मुकाबले गोल्ड बॉन्ड थोड़े बेहतर हैं। गोल्ड बॉन्ड पर ब्याज का भी फायदा मिलेगा। इसके अलावा गोल्ड बॉन्ड में गोल्ड ईटीएफ की तरह कोई बाहरी खर्च नहीं है। गोल्ड बॉन्डों की बिक्री बैंकों और डाकघरों के जरिए की जाएगी। हेमंत रुस्तगी ने कहा कि हमें अभी ये देखना होगा कि लिक्विडिटी के मामले में गोल्ड बॉन्ड का परफॉर्मेंस कैसा है। हेमंत रुस्तगी ने ये भी बताया कि गोल्ड बॉन्ड में निवेश की सीमा है। लेकिन गोल्ड ईटीएफ में निवेश की कोई सीमा नहीं है।


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