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एस्बा से आम निवेशकों को क्या है फायदा

प्रकाशित Sat, 27, 2015 पर 16:20  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एक कंपलीट फाइनेंशियल गाइड होने का मतलब होता है, न सिर्फ आपको सही निवेश की सलाह देना, बल्कि निवेश का मकसद भी बताना। और यहां काम आते हैं हम, यानि योर मनी। यहां आपको सवाल जवाब के जरिए बताई जा रही हैं निवेश से जुड़ी वो तमाम बातें, जो आपकी मेहनत की कमाई को बढ़ाने में मदद करती हैं। आज हमारे साथ हैं, एटिका वेल्थ मैनेजमेंट के डायरेक्टर और चीफ फाइनेंशियल प्लानर निखिल कोठारी और PolicyX.com के सीईओ और फाउंडर नवल गोयल


आज सबसे पहले बात करते हैं एएसबीए (एस्बा) यानी अप्लीकेशन सपोर्टेड बाई ब्लॉक्ड एमाउंट की। सेबी ने अब आईपीओ के लिए एस्बा को अनिवार्य कर दिया है। ये नया सिस्टम 1 जनवरी 2016 के बाद आने वाले सभी आईपीओ के लिए अनिवार्य होगा। एस्बा क्या है, ये कैसे काम करता है, इस सुविधा के लिए आपको क्या करना होगा, कैसे ये है आपके लिए फायदे की बात, आइए जानते हैं।


एस्बा यानी एप्लीकेशन सपोर्टेड बाइ ब्लॉक्ड अमाउंट निवेशकों के लिए फायदे की बात है। इसके तहत बैंक अकाउंट में एप्लीकेशन के पैसे ब्लॉक करने की अर्जी दी जा सकती है। एस्बा के ये नए नियम 1 जनवरी 2016 से लागू होंगे। जानकारों के मुताबिक एस्बा का चुनाव आवेदकों के हित में है। इसके आवेदन किए शेयरों की रकम शेयर आबंटन के बाद ही खाते से निकाले जाते हैं और आवेदक को रिफंड के लिए इंतजार नहीं करना होता। इसके तहत बैंक खाते में एप्लीकेशन मनी ब्लॉक करने के लिए आवेदन देना पड़ता है। इसके बाद शेयर आवंटन होने पर ही अकाउंट से रकम निकाली जाती है।


जानकारों के मुताबिक एस्बा के कई फायदे हैं। इसकी वजह से शेयर आबंटन नहीं होने पर रिफंड का झंझट नहीं रहता और बिना ब्याज के नुकसान के निवेशक आईपीओ के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके अलावा आवेदक को रिफंड चेक गुम होने या देरी का भी डर नहीं रहता।


एस्बा के लिए आवेदन करने हेतु बैंक, स्टॉक ब्रोकर, आरटीए और डीपी को आवेदन फॉर्म स्वीकर करने की अनुमति दी गई है। ये आवेदन ऑनलाइन और फिजिकल दोनों तरीके से हो सकेंगे। इसके लिए निवेशकों को एस्बा के तहत फॉर्म भरने होंगे और फॉर्म भरकर एससीएसबी /आरटीए/डीपी वाले बैंकों में जमा करने होंगे।


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