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आंत्रप्रेनेयोरः कस्टमाइज प्रोडक्ट का मार्केटप्लेस

प्रकाशित Sat, 11, 2015 पर 15:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इंटरनेशनल मैगजीन में देखा आलीशान फर्निचर पसंद आया हो या चमचमाती डायमंड रिंग, इतने महंगे शौक के लिए जेब पूरी नहीं पड़ती, तो क्या हुआ। टेक्नोलॉजी की इस दुनिया में एक क्लिक पर शॉपिंग करना जितना आसान बनाया है, उतना ही आसान हो गया है किसी युनीक डिजाइन या फिर एक अनोखा आयडिया को पूरा करना।  आपके लिए खास कस्टमाइजेशन का ऑप्शन लेकर आया पुणे का एक स्टार्ट अप आईकस्टममेडइट। बीस्पोक यानी  मेड टू ऑर्डर के इस रईसी ठाट को आम ग्राहकों के लिए लेकर आए है राज अय्यर।


33 केटेगरी जैसे ज्वेलरी, फर्निचर, फैशन एक्सेसरीज, क्लोथिंग, ऑटोमोबाइल में 8,000 से भी  ज्यादा प्रोडक्ट की वेरायटी आईकस्टममेडइट पर है, जिसे आप खरीद सकते है या कस्टमाइज करवा सकते है। ये कस्टमाइज प्रोडक्ट का मार्केटप्लेस है, 1000 से ज्यादा वेंडर्स कंपनी से जुड़े हुए है, जो आपकी पसंद के अनुसार प्रोडक्ट को बनाते हैं। कस्टमाइजेशन के प्रोसेस को आसान बनाने की कोशिश फाउंडर्स ने की है। साथ ही कस्टमाइजेशन के 3 अलग तरीके है, जिसमें से आपकी सहूलियत और पसंद के मुताबिक आप प्रोडक्ट ऑर्डर कर सकते है। कस्टमाइजेशन का ये शॉपिंग एक्सपीरियंस ग्राहकों के लिए पूरी तरह से फ्री है, आपकी कल्पना के मुताबिक कंपनी से आप मनचाहा प्रोडक्ट बनवा सकते है। कंपनी वेंडर्स से हर ऑर्डर पर ट्रांजेक्शन फीस चार्ज करती है।


भारतीय बाजार में बिस्पोक प्रोडेक्ट्स को लग्जरी का टैग पहले से ही लगा था, लेकिन अपनी पसंद के मुताबिक प्रोडक्टस बनवाकर लेना हमेशा ही महंगा नहीं होता इस बात का विश्वास आईकस्टममेडइट ने ग्राहकों में पैदा किया और देखते ही देखते कंपनी को ग्राहकों का बढ़िया रिस्पॉन्स मिला। हर दिन 8-10 ऑर्डर के हिसाब से कंपनी लगभग हर महीने 200 फीसदी की ग्रोथ से आगे बढ़ रही है, और जल्द ही दोगुनी ग्रोथ की उम्मीद फाउंडर जता रहे है।


आम ग्राहकों के लिए कस्टमाइजशेन का मार्केटप्लेस मॉडल बनाते वक्त वेंडर्स को इस प्लैटफॉर्म पर लाना फाउंडर के सामने बड़ी चुनौती थी। फिलहाल कंपनी के साथ काम कर रहे 1000 वेंडर्स में बहुत कम को इंटरनेट और ऑनलाइन मार्केट के बारे में कोई जानकारी थी। कंपनी इन वेंडर्स को अपने स्किल को ग्राहकों तक पहुंचाने का मौका दे रही हैं। साथ ही इस बात पर भी जोर देती है की बिस्पोक प्रोडेक्ट्स बनाते वक्त आईपी राइट्स के चलते ओरिजनल ब्रान्ड्स की कॉपी से बचना जरुरी है।


कपड़े, शूज, एक्सेसरीज इन आम प्रोडेक्ट्स के ऑर्डर्स के अलावा कंपनी को कुछ खास कस्टमाइजेशन की ऑर्ड्स भी मिलती है, इन यूनीक कस्टमाइजेशन रिक्सवेस्ट को पूरा करते वक्त एक अनोखे समाधान का अनुभव राज को मिलता है।


1.2 करोड़ के स्टार्टअप कैपिटल से राज ने इस वेंचर की शुरूआत की थी। कंपनी ने वर्टेक्स ग्रुप की एमडी सलमा चुग से 150,000 डॉलर की एंजेल फंडिंग जुटाई थी और हाल ही में 250,000 डॉलर यानी Rs 1.6 करोड़ टेलिविजन स्क्रिप्ट राइटर विरेंद्र साहनी और कार्डियोलॉजिस्ट परेश जोशी से एंजेल फंड जुटाएं है। इसका इस्तेमाल कंपनी बैकएंड मजबूत करने के लिए, खुद का लॉजिस्टीक्स सिस्टम शुरू करने के लिए इस्तेमाल करेगी। और अगले 6 महिने में कंपनी अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कदम रखने की तैयारी जोरों से कर रही है।


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