इंफ्रास्ट्रकचर बॉन्ड में निवेश से फायदा -
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इंफ्रास्ट्रकचर बॉन्ड में निवेश से फायदा

प्रकाशित Sat, 16, 2010 पर 15:08  |  स्रोत : Hindi.in.com

16 अक्टूबर 2010

सीएनबीसी आवाज़



टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया
का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड के रूप में निवेश के लिए नया विकल्प सामने आया है। निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश करके आयकर छूट के साथ-साथ 8 फीसदी का एश्योर्ड रिटर्न भी मिल सकता है।



आयकर धारा 80सीसीएफ के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में 1 साल में 20,000 रुपये तक के निवेश पर टैक्स में छूट मिल सकती है। इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में 5 साल का लॉक-इन पीरियड है। इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड की अवधि 10 साल है लेकिन निवेशक 5 साल के बाद बॉन्ड को बेच सकते हैं।



1.6-5 लाख रुपये तक की आय वाले निवेशक इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में 2060 रुपये तक की अधिकतम टैक्स छूट ले सकते हैं, 5-8 लाख रुपये तक के निवेश पर 4,120 रुपये की टैक्स छूट मिल सकती है। 8 लाख से ज्यादा आय वाले व्यक्ति 6,180 रुपये तक की टैक्स छूट ले सकते हैं।



डायरेक्ट टैक्स कोड लागू होने के बाद भी रिजर्व बैंक के बॉन्ड, इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड की मेच्योरिटी की रकम पर टैक्स नहीं  लगेगा। केवल निवेश से हुई रकम की आमदनी पर ही टैक्स लगाया जाएगा।


कैपिटल गेन टैक्स

सुभाष लखोटिया का कहना है कि इक्विटी म्युचु्अल फंड में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स नहीं लगता है। जबकि इक्विटी म्युचु्अल फंड में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 15 फीसदी की दर से टैक्स लगता है।


टीडीएस की नई लिमिट



जुलाई 2010 से टीडीएस की नई सीमा लागू हो गई है। टैक्स गुरु के मुताबिक इसमें भी कर धारकों के फायदे की ही बात कही गई है।


नई टीडीएस लिमिट में लॉटरी से हुई आमदनी पर टैक्स की लिमिट 5000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई है। साथ ही घुड़दौड़ में 2,500 की बजाय 5000 रुपये तक की आय पर टैक्स लगेगा।


कॉन्ट्रैक्ट पेमेंट से मिलने वाली राशि पर 20,000 रुपये से टैक्स छूट लिमिट बढ़कर 30,000 रुपये हो गई है। अब बीमा  कमीशन, ब्रोकरेज से मिलने वाली 2500 की बजाए 5000 रुपये तक की आय पर टैक्स लगेगा। साथ ही मकान के किराए से आने वाली आय की टैक्स छूट भी 1,20,000 रुपये से बढ़कर 1,80,000 रुपये हो गई है।



गिफ्ट पर टैक्स छूट



टैक्स गुरु का कहना है कि अगर आपको एनआरआई से तोहफे मिलते हैं तो उस आय पर टैक्स नहीं लगेगा अगर व्यक्ति आपके ब्लड रिलेशन में है। अगर तोहफे की कीमत 50,000 रुपये से ज्यादा है तो टैक्स लग सकता है।



टैक्स गुरु के मुताबिक आगर कोई पति अपनी पत्नी को शेयर उपहार स्वरूप देता है तो इस पर पति पर ही टैक्स देनदारी बनती है। पत्नी को आयकर नहीं देना होगा।


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