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पहला कदमः जानें आरडी क्यों है निवेश का बेहतर विकल्प

प्रकाशित Fri, 25, 2015 पर 14:23  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लोगों को फाइनेंशियल सेक्टर से जोड़ने की मुहिम के तहत सीएनबीसी-आवाज़ फाइनेंशियल लिटरेसी की पहल करने के लिए पहला कदम सीरीज लेकर आया है। हर हफ्ते इस पहल के जरिए फाइनेंशियल इन्क्लूजन की तरफ हम छोटे छोटे ही सही लेकिन कारगर कदम बढ़ा रहे हैं। आप www.pehlakadam.in पर भी लॉगऑन कर सकते हैं और पहला कदम के एपिसोड में दी गई सारी जानकारी वहां से ले सकते हैं। इस बार पहला कदम में जानेंगे रेकेरिंग डिपॉजिट यानी आरडी के बारे में।


रेकेरिंग डिपॉजिट यानी आरडी बेहद लोकप्रिय निवेश विकल्प है और इसके लिए बैंक में आरडी करा सकते हैं। आरडी से आपको नियमित कमाई हो सकती है और अपना निवेश लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए नियमित सेविंग की आदत पड़ती है। हालांकि ब्याज दर गिरने का डर इसमें कम रहता है और कम रिस्क, सुरक्षित निवेश वाला विकल्प है। आरडी निवेश का बेहतर विकल्प है और ये लंबी अवधि के लिए होती है। समय की सुविधानुसार आरडी फिक्स हो सकती है। लंबी अवधि में इसकी अहमियत ज्यादा होती है।


आरडी और एफडी में फर्क
ज्यादा एफडी करने से हिसाब रखना मुश्किल होता है और इंटरेस्ट रेट लॉक हो जाता है। आरडी में टैक्स बैनेफिट नहीं मिलता है और 10,000 रुपये से ज्यादा आय पर टीडीएस कटता है। इसमें ब्याज दर लंबे वक्त तक एक समान रहती है।


आरडी ओपनिंग दो तरह से की जा सकती है। एक तरीका तो है कि खुद बैंक जाकर आरडी खोली जाए और दूसरे ऑनलाइन भी आरडी खोली जा सकती है। आरडी हमेशा सरकारी बैंक में ही करवानी चाहिए और अब आप मोबाइल एप से भी आरडी खुलवा सकते हैं। रेकरिंग डिपॉजिट निवेशक की सेविंग पर निर्भर करता है और हर महीने एक निश्चित रकम का निवेश इसमें कर सकते हैं। रेकरिंग डिपॉजिट से सेविंग मैनेजमेंट आसानहोता है और बार बार फिक्स डिपॉजिट के झंझट से मुक्ति मिल जाती है। इसके जरिए रीइन्वेस्टमेंट के पचड़ों से भी मुक्ति मिल जाती है और निवेश और ब्याज का हिसाब-किताब आसान हो जाता है। रेकरिंग डिपॉजिट निवेशकों के लिए सही विकल्प है।


आरडी में हर महीने एक निश्चित रकम जमा करने की सुविधा मिलती है और इस आय पर एक निश्चित ब्याज मिलता है। ये लंबे वक्त तक जारी रख सकते हैं और इसमें खाता खोलते वक्त अवधि तय हो जाती है। अवधि खत्म होने पर ब्याज समेत भुगतान मिल जाता है। 


रेकेरिंग डिपॉजिट या आरडी की खासियत है कि इसमें नियमित निवेश के साथ फिक्स डिपॉजिट के फायदे मिलते हैं। ब्याज तय होने से आय की निश्चितता रहती है और बैंकों की ओर से ऑफर मिलने से सहूलियत रहती है। आरडी में एक खास लक्ष्य के लिए रकम इकट्ठा की जा सकती है। आरडी के लॉक इन फीचर के तहत शुरुआत से आखिर तक ब्याज दर एक समान रहती है और डिपॉजिट पर इंटरेस्ट रेट शुरुआत में ही लॉक इन हो जाता है। ब्याज रेट गिरने पर रेकरिंग डिपॉजिट में फायदा होता है और रेकरिंग डिपॉजिट 10 साल तक हो सकती है। इसमें लंबे वक्त का इनवेस्टमेंट प्लान बनाया जा सकता है। 


रेकेरिंग डिपॉजिट कब करना चाहिए?
रेकेरिंग डिपॉजिट कब करें इसके लिए सलाह है कि जब निवेश के लिए एकमुश्त पैसा ना हो तो कैश फ्लो कम होने पर ये निवेश बेहतर रहते हैं। एक खास लक्ष्य के लिए ये निवेश बेहतर रहता है और अगर निवेश बिना किसी रिस्क के करना हो तो आरडी करनी चाहिए। कोई खास फाइनेंशियल लक्ष्य हासिल करने में ज्यादा वक्त ना बचा हो तो 2-3 साल की आरडी फाइनेंशियल लक्ष्य हासिल करने में मददगार रहती है।


आरडी में निवेश से पहले बैंक के बारे में जानकारी लें 
आरडी खाता खोलने के दो तरीके होते हैं जिसमें पहला तरीका ये है कि निवेशक को खाता खोलने का फॉर्म लेने बैंक की ब्रांच में जाना होगा। फॉर्म में निवेशक को मांगी गई सारी जानकारी भरनी होगी। फॉर्म के साथ केवाईसी भी भरना होगा और फॉर्म में हर महीने जमा किया जाने वाली रकम भरनी होगी। आपको निवेशक की अवधि भी बतानी होगी और आरडी में पैसा जमा कराने का तरीका भी बताना होगा।
 
आरडी में पेमेंट करने का तरीका
आरडी में पेमेंट करने के कई तरीके हैं जैसे कुछ बैंक शुरुआत में चेक मांगते हैं और इन्हीं से बाद में सेविंग अकाउंट से सीधे डेबिट किया जा सकता है। पेमेंट बैंक अलग है तो डायरेक्ट डेबिट इंस्ट्रक्शन से पेमेंट हो सकता है और आसान विकल्प सेविंग अकाउंट से सीधा पेमेंट हो जाए येही है।


रेकेरिंग डिपॉजिट की ऑनलाइन प्रक्रिया में नेट बैंकिंग अकाउंट में लॉग इन जरूरी होता है और लॉग इन के बाद डिपॉजिट के सेक्शन में जाना होगा। आरडी के तहत निवेश की अलग अलग जानकारी देनी होगी। निवेश की रकम और अवधि भरनी होगी और राशि का बैंक अकाउंट से ऑनलाइन पेमेंट हो जाएगा। अगर कई अकाउंट हैं तो सावधानी से अकाउंट नंबर डालें और अकाउंट होल्डर का नाम सावधानी से भरें। अकाउंट होल्डर का नाम और निवेशक का नाम सही होना चाहिए। 


रेकरिंग डिपॉजिट से पहले उसके टैक्स पर असर समझ लेने चाहिए क्योंकि आरडी में निवेश से टैक्स में कोई फायदा नहीं मिलता है। इसपर हर साल मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगेगा और अगर सालाना ब्याज 20,000 रुपये से ज्यादा है तो टीडीएस कटेगा। निवेशक का हर साल बैंक से डिपॉजिट पर हुई आय का सर्टिफिकेट लेना चाहिए ताकि आगे जाकर आयकर में कोई दिक्कत ना हो।


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