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पहला कदमः टेक्नोलॉजी से बैंकिंग हुई आसान

प्रकाशित Sat, 03, 2015 पर 15:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी आवाज़ के कार्यक्रम पहला कदम की मुहिम का मक्सद है ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचत और निवेश की जरूरत को समझाना और देश के फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ना। अपनी इस मुहिम को हम देश के स्कूल, कॉलेजों और गांवों तक ले जा रहे हैं। अगर आप भी अपने गांव, रेसिडेंशियल सोसायटी, ऑफिस, कॉलेज या स्कूल में जागरुक्ता फैलाना चाहते हैं। आप हमारी वेब साईट pehlakadam.in पर भी अपना संदेश छोड़ सकते हैं। टीवी पर हमने आपके लिए पहली बार एक खास डिप्लोमा कोर्स शुरू किया है। पिछले हफ्ते हमने आपको रेकरिंग डिपॉजिट और डेबिट कार्ड के बारे में बताया था और इस हफ्ते आपको बताएंगे एटीएम और मोबाईल बैंकिंग के बारे में। 


एटीएम से कहीं भी-कभी भी बैंकिंग की जा सकती है और एटीएम ने पैसा निकालना बेहद आसान कर दिया है। एटीएम से भरकम रकम रखने का झंझट खत्म हो गया है। इसके अलावा नेट बैंकिंग भी आजकल के जमाने में वो जरिया बन गया है जो बिना बैंक जाए बैंक की सारी सुविधाएं आपको घर बैठे देता है। हालांकि ये जानना भी बेहद जरूर है कि सुरक्षित नेट बैंकिंग कैसे करें। सुरक्षित नेट बैंकिंग के पुख्ता इंतजाम करे बिना आपके पैसे पर जोखिम हो सकता है।


परंपरागत बैंकिग बनाम नए जमाने की बैंकिंग में बहुत से अंतर है और आज की बैंकिंग बहुत आसान हो गई है। पहले ट्रांजैक्शन करने बैंक जाना होता था यानी परंपरागत बैंकिंग में वक्त की बर्बादी ज्यादा होती थी। बैंक खुलने का एक निश्चित वक्त होता था जिससे आप हर वक्त बैंकिंग सेवाएं नहीं ले सकते थे। लेकिन आजकल टेक्नोलॉजी ने ये सारी मुश्किल आसान कर दी हैं और एटीएम यानि ऑटोमैटेड टेलर मशीन या जिसको ऑल टाइम मनी भी कहते हैं ने बैंकिंग की तस्वीर बदल दी है।


एटीएम से बैंकिंग
एटीएम से बैंकिंग ट्रांजैक्शन में फायदा होता है और आज के समय में एटीएम देश के हर हिस्से में मौजूद हैं। एटीएम से कभी भी-कहीं भी बैंकिंग की जा सकती है और एटीएम ट्रांजैक्शन में वक्त की पाबंदी नहीं होती है। एटीएम केवल पैसा निकालने की मशीन नहीं है बल्कि एटीएम में दूसरे ट्रांजैक्शन हो सकते हैं। एटीएम से मिनी स्टेटमेंट निकालना, बैंक बैलेंस चेक करना, चेक बुक ऑर्डर करना, टेलिफोन-बिजली बिल का पेमेंट किया जा सकता है यानी एटीएम का इस्तेमाल कई कामों के लिए किया जा सकता है। एटीएम के लिए डेबिट कार्ड जरूरी होता है और बैंक डेबिट कार्ड बैंक कस्टमर को देता है। एटीएम में डेबिट कार्ड स्वाइप करना पड़ता है और एटीएम ट्रांजैक्शन से पहले पिन नंबर मांगता है। 4 डिजिट पिन नंबर के बिना ट्रांजैक्शन नहीं हो सकता है और पिन नंबर ट्रांजैक्शन का सीक्रेट पासवर्ड होता है। पिन नंबर किसी को बताना नहीं चाहिए। सही पिन नंबर से ही एटीएम ट्रांजैक्शन संभव होता है। एटीएम में ट्रांजैक्शन के कई ऑप्शन होते हैं और एटीएम से ट्रांजैक्शन रसीद भी निकलती है।
 
जानें इंटरनेट बैंकिंग के क्या हैं फायदे
इंटरनेट पर घर बैठे बैंकिंग करने से आपको बैंक जाने के झंझट से मुक्ति मिलती है। इंटरनेट ने बैंकिंग आसान की है और इसके लिए बैंक वेबसाइट पर लॉग इन करना जरूरी होता है। नेट बैंकिंग में लॉगइन आईडी और पासवर्ड जरूरी होता है और नेट बैंकिंग से हर तरह का ट्रांजैक्शन संभव होता है। नेट बैंकिंग से पैसा दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर सकते हैं, नेट बैंकिंग से अकाउंट बैलेंस जान सकते हैं, टेलिफोन-बिजली और दूसरे बिल का भुगतान कर सकते हैं, नेट बैंकिंग से डीटीएच रिचार्ज भी संभव है और नेट बैंकिंग से फिक्स्ड डिपॉजिट कराया जा सकता है। इससे रेकरिंग अकाउंट भी खोल सकते हैं और टैक्स भुगतान भी मुमकिन है। आप अपने क्रेडिट कार्ड पेमेंट भी कर सकते हैं। नेट बैंकिंग के लिए दूसरा अकाउंट रजिस्टर करना जरूरी होता है और फिर बैंक लॉगइन आईडी मुहैया कराते हैं जिसके जरिए आप नेट बैंकिंग कर सकते हैं।


इंटरनेट बैंकिंग कैसे करें
इंटरनेट बैंकिंग के लिए बैंक कस्टमर को पासवर्ड भी मुहैया कराते हैं और एटीएम पासवर्ड की तरह ही नेट बैकिंग पासवर्ड सीक्रेट रखना चाहिए। सुरक्षा के लिए 15 दिन-1 महीने में पासवर्ड बदलना चाहिए और कई बैंक टू स्टेप प्रक्रिया अपनाते हैं। जैसे पासवर्ड के अलावा वन टाइम पासवर्ड भेजते है। वन टाइम पासवर्ड को ओटीपी भी कहते हैं और ओटीपी कस्टमर के रजिस्टर्ड मोबाइल पर आता है। बैंक ओटीपी रजिस्टर्ड ईमेल पर भी भेजते हैं। पासवर्ड और ओटीपी सही होने पर नेट बैंकिंग मुमकिन होती है। ओटीपी और नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी और को बताना नहीं चाहिए और अपने अकाउंट की जानकारी सबको नहीं देनी चाहिए। सही वेबसाइट पर नेट बैंकिंग करनी चाहिए और सुरक्षित जगह से ही नेट बैंकिंग करनी चाहिए।


मोबाइल बैंकिंग
एटीएम और मोबाइल फोन पर बैंकिंग पर जाने की जरूरत नहीं मोबाइल से बैंक ट्रांजैक्शन किये जा सकते हैं। मोबाइल पर चलते-फिरते बैंकिंग हो जाती है तो बैंक जाने की जरूरत खत्म हो जाती है। मोबाइल बैंकिंग से वक्त की बचत भी होती है। मोबाइल बैंकिंग के लिए स्मार्ट फोन होना जरूरी होता है और स्मार्ट फोन पर बैंक का एप डाउनलोड करना होगा। बैंक एप पर कस्टमर को रजिस्टर करना होगा। मोबाइल बैंकिंग का सिक्योरिटी पर फोकस रहता है और मोबाइल बैंकिंग का गलत इस्तेमाल रोकने पर जोर रहता है। मोबाइल बैंकिंग सुरक्षित तरीका है और मोबाइल बैंकिंग से वक्त की बचत होती है। मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल आसान होता है और मोबाइल बैंकिंग में ट्रांजैक्शन के आसान स्टेप्स होते हैं और मोबाइल बैंकिंग में वक्त की पाबंदी नहीं होती है। मोबाइल फोन से दूसरे अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हो सकता है। मोबाइल पर अकाउंट बैलेंस जान सकते हैं और मोबाइल से फिक्स्ड डिपॉजिट करा सकते हैं। मोबाइल से रेकरिंग अकाउंट खोल सकते हैं।


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