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कॉर्पोरेट एफडी बनाम बैंक एफडी, बेहतर कौन

प्रकाशित Sat, 17, 2015 पर 15:17  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

फाइनेंशियल प्लानिंग के जरिए आप ना सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकते हैं। बल्की अपने लक्ष्यों को भी हकीकत में बदल सकते हैं। आपकी जिम्मेदारियों और गोल्स को पूरा करने में आपकी मदद करता है सीएनबीसी-आवाज़ का खास शो योर मनी। योर मनी में आज आपके सवालों के जवाबों जरिए आपकी निवेश की उलझनों को सुलझा रहे हैं एटिका वेल्थ के गजेंद्र कोठारी


लेकिन सबसे पहले बात करते हैं एफडी यानी फिक्स्ड डिपॉजिट की। कॉर्पोरेट एफडी और बैंक एफडी के बीच आरबीआई की रेटकट पॉलिसी के बाद अंतर हो गया है। बैंकों ने अपनी डिपॉजिट दरें घटानी शुरू कर दी हैं। उसके बाद कॉर्पोरेट एफडी काफी आकर्षक ब्याज दरों पर अपनी योजनाएं पेश कर रहे हैं। लेकिन दोनों में फर्क क्या है और दोनों में से किसमें निवेश करना बेहतर रहेगा, यहां हम गजेंद्र कोठारी से सबसे पहले यही जानने की कोशिश कर रहे हैं।


गजेंद्र कोठारी ने कहा कि ज्यादातर लोग बैंक एफडी या रेकरिंग में पैसा लगाते हैं। लेकिन अगर आप रिस्क ले सकतें हैं तो कॉरपोरेट एफडी में निवेश करें। एसबीआई में 3 साल के लिए एफडी पर 7.25 फीसदी ब्याज मिल रहा है। वहीं एचडीएफसी बैंक में 3 साल के लिए एफडी पर 7.65 फीसदी ब्याज मिल रहा है। जबकि कॉरपोरेट एफडी ज्यादा आकर्षक दरों पर एफडी की सुविधा दे रहे हैं। जैसे महिंद्रा फाइनेंस 3 साल की एफडी पर 9.25 फीसदी ब्याज दे रहा है। लेकिन बैंकों की तुलना में कॉरपोरेट एफडी में रिस्क ज्यादा होता है। इसलिए रिस्क ले सकतें हैं तभी कॉरपोरेट एफडी में निवेश करें।


गजेंद्र कोठारी की सलाह है कि कॉरपोरेट एफडी में निवेश करने के पहले प्राइवेट कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग की जांच जरूर करें और एएए रेटिंग वाली कंपनियों में ही पैसा लगाएं। कॉरपोरेट एफडी में इस बात का भी ख्याल रखें कि हर कंपनी का पे-आउट ऑप्शन अलग-अलग होता है। कई बार इनमें चेक बाउंस होने जैसी दिक्कतें भी आती हैं।


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