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क्या हैं बेहतरः ऑफलाइन प्लान या डायरेक्ट प्लान

प्रकाशित Fri, 06, 2015 पर 16:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बिना लक्ष्य के फाइनेंशियल प्लनिंग नही हो सकती। योर मनी के जरिए, हम आपको न सिर्फ निवेश की सही रणनिती सुझाते हैं, बल्कि लक्ष्यों को पहचान ने में आपकी मदद भी करते हैं। तो आइए एटिका वैल्थ मैनेजमेंट के गजेंद्र कोठारी से जानते हैं ऑफलाइन प्लान को डायरेक्ट प्लान में तबदील करने पर फंड की परफॉर्मेंस पर क्या असर पडेगा और क्या एफडी से बेहतर हैं गिल्ट फंड।


सवालः 7-8 साल से म्युचुअल फंड स्कीम में निवेश कर रहा हूं, एजेंट और डायरेक्ट प्लान के जरिए निवेश किया है, अब मैं ब्रोकर बदलना चाहता हूं, क्या इससे मेरे डायरेक्ट प्लान पर असर पडे़गा?


गजेंद्र कोठारीः डायरेक्ट प्लान 1 जनवरी 2013 से शुरू हुए है। डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेश्यो रेगुलर प्लान से थोड़ा कम होता है। डायरेक्ट प्लान में एएमसी डिस्ट्रीब्यूटर को कोई कमीशन नहीं देता है। डायरेक्ट प्लान में निवेशक को 0.15 फीसदी से 0.75 फीसदी तक ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। स्कीम के बारे में अच्छी जानकारी होने पर ही डायरेक्ट प्लान लेना बेहतर होगा। डायरेक्ट प्लान से रेगुलर प्लान में जाने पर आपको ज्यादा एक्सपेंस रेश्यो लगता है। 


सवालः पिता किसान हैं और परिवार में आर्थिक हालात को देखते हुए, मुझे और मेरी बहन को अपनी बी.टेक की पढ़ाई के लिए 4 लाख रु जमा करने हैं। मेरी बहन को अगले साल बी.टेक के लिए लोन लेना है, क्या इस लोन के लिए सिक्योरिटी की जरूरत पडे़गी? लोन चुकाने की प्रक्रिया समझाएं, ब्याज और ईएमआई कैसे देनी होंगी?


गजेंद्र कोठारीः ज्यादातर बैंक एक सीमा तक एजुकेशन लोन पर कुछ गिरवी नहीं रखते हैं। छात्र अपने नाम पर लोन ले सकते हैं, हालांकि पेरेंट्स या अभिभावक का को-एप्लिकेंट बनना जरूरी है। कोर्स पूरा होने के तुरंत बाद या वेटिंग पीरियड खत्म होने के बाद छात्र लोन चुका सकते हैं। एजुकेशन लोन की ब्याज दर 10 फीसदी से 15 फीसदी के बीच होती है। यह ब्याज दर कोर्स, लोन की रकम और अवधि पर निर्भर होती है। लोन के प्री-पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगता है।


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