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टैक्स गुरू: जाने ट्रस्ट से जुड़े कानून

प्रकाशित Sat, 14, 2015 पर 15:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अगर टैक्स का मतलब आपके लिए टेंशन है तो हम आपके लिए एक बार फिर से हाजिर हैं टैक्स गुरु के साथ। टैक्स गुरु है आपका पर्सनल टैक्स गाइड जो करता है टैक्स से जुड़े हर छोटी-बड़ी उलझन को दूर। यहां आपको मिलता है टैक्स से जुड़े हर सवाल का जवाब। आपके लिए इनकम टैक्स को आसान बनाने के लिए हमारे साथ हैं हमारे टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया


सवालः टैक्स गुरु बताइये कि अगर कोई ट्रस्ट पहले से बना हुआ है या कोई ट्रस्ट बनाना चाहता है तो ट्रस्ट से जुड़े हुए इनकम टैक्स के कानून क्या हैं?


सुभाष लखोटिया: आयकर कानून के तहत 3 तरह के ट्रस्ट होते हैं। ये हैं चैरिटी ट्रस्ट, गॉड ट्रस्ट और फैमिली ट्रस्ट। चैरिटी ट्रस्ट परोपकार के लिए होते हैं। ज्यादातर मामलों में चैरिटी ट्रस्ट की इनकम पर टैक्स छूट मिलती है। गॉड ट्रस्ट की टैक्स के मामलों में अलग हस्ती होती है। गॉड ट्रस्ट पर टैक्स देनदारी एक इंडिविजुअल की तरह होती है।


फैमिली ट्रस्ट भी दो तरह के होते हैं, जिसमें पहला होता है स्पेसिफिक बेनेफिशियरी ट्रस्ट। स्पेसिफिक बेनेफिशियरी ट्रस्ट पर टैक्स देनदारी एक इंडिविजुअल की तरह होती है। जबकी दूसरे फैमिली ट्रस्ट डिस्क्रेशनरी ट्रस्ट की टैक्स देनदारी सेक्शन 164 के तहत होती है। 1970 से पहले बने डिस्क्रेशनरी ट्रस्ट पर सामान्य दर से टैक्स लगाता है। वहीं वसीयत के जरिए बने डिस्क्रेशनरी ट्रस्ट पर टैक्स देनदारी एक इंडिविजुअल की तरह होती है।


सवालः मैं न्यू पेंशन स्कीम में 50000 रुपये निवेश करना चाहता हूं। मुझे ये बताएं कि ये निवेश मैच्योरिटी पर टैक्सेबल होगा या नान-टैक्सेबल?


सुभाष लखोटिया: एनपीएस की रकम किश्तों में ही मिलेगी। और एनपीएस से पैसे निकालने पर टैक्स देना होगा।


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