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शेयर बाजार में कमाई के मंत्रः ट्रेडबुल्स इंवेस्टर फोरम

प्रकाशित Mon, 30, 2015 पर 13:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

शेयर बाजार में कमाई करना एक कला है और इस कला के जानकार मानते हैं कि बाजार में कमाई करना इतना मुश्किल भी नहीं है। थोड़ी सी समझदारी और जानकारी से आम नागरिक भी शेयर बाजार में अच्छे रिटर्न कमा सकता है। सीएनबीसी-आवाज़ की पहल इंवेस्टर फोरम ऐसी ही कुछ मूलभूत बातें निवेशकों तक पहुंचाने की कोशिश है जिससे आम आदमी भी शेयर बाजार और इक्विटी की दुनिया से रूबरू हो सके। ट्रेडबुल्स इंवेस्टर फोरम के जरिए सीएनबीसी-आवाज़ शेयर बाजार में कमाई के मंत्र आप तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।


ट्रेडबुल्स के डायरेक्टर और सीओओ ध्रुव देसाई का कहना है कि बाजार में निवेश करने के लिए जब जागो तभी सवेरा की नीति पर काम करना चाहिए। नए निवेशक बाजार में शुरुआत करने के लिए कुछ छोटी पूंजी से शुरुआत कर सकते हैं। बाजार बड़े और लंबे बुल रन के लिए तैयार है और अभी निवेश करने के लिए देर नहीं हुई है। अच्छे शेयरों में लंबी अवधि का निवेश हमेशा फायदेमंद रहता है। इक्विटी में 1 साल बाद कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है तो इक्विटी में निवेश अच्छा विकल्प है। हालांकि सिर्फ टैक्स से बचने के लिए निवेश नहीं करना चाहिए और इसे एक अच्छे निवेश साधन के रूप में देखना चाहिए।


शेयर बाजार में निवेश की राय इसलिए दी जा रही है क्योंकि अन्य साधनों जैसे एफडी में तयशुदा रिटर्न से ज्यादा नहीं मिलेगा। यूथ के लिए रियल एस्टेट में निवेश आसान नहीं है और सोने में भी फिलहाल अच्छे रिटर्न की उम्मीद कम है। तो इक्विटी में निवेश से आप कम समय में अच्छा पैसा बनाने की भी उम्मीद कर सकते हैं और लंबी अवधि में तो बाजार शानदार रिटर्न देता ही है। ट्रेडर एक दिन या कुछ दिनों के लिए बाजार में पैसा लगाता है और ट्रेडर बाजार के छोटे उतार-चढ़ावों का फायदा उठाने की कोशिश करता है। हालांकि निवेशक किसी भी कंपनी के बारे में पूरी जानकारी जुटाने के बाद लंबी अवधि का निवेश करते हैं। आपको तय कर लेना चाहिए कि आप एक ट्रेडर के तौर पर बाजार में उतरेंगे या निवेशक के तौर पर बाजार में पैसा लगाकर रिटर्न कमाना चाहते हैं। अच्छा ट्रेडर बनने के लिए ज्यादा अनुशासन और कुशलता की जरूरत होती है और लंबे समय के लिए अच्छे शेयरों में पैसा लगाने में रिस्क कम होता है। अगर रिस्क कम लेना है तो निवेशक बनकर बाजार में पूंजी लगाएं।


मार्केट एक्सपर्ट हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि बाजार में छोटी अवधि में करेक्शन दिख रहा है और शॉर्ट टर्म में दिक्कतें दिख सकती हैं। हालांकि लंबी अवधि के लिए बाजार तो अच्छे ही लग रहे हैं। बाजार के 7500 का निचला स्तर नहीं तोड़ने के संकेत हैं लेकिन ऊपरी तरफ 8300 का स्तर भी नहीं टूटता दिख रहा है। बाजार थोड़ा सा बढ़ते ही थक जाता है और जो पहले का उच्च स्तर 9100 का था वो छूना इस समय काफी मुशिकल लग रहा है। अगले साल यानी 2016 में बाजार में फिर से 9100 तक के स्तर आने की उम्मीद कर सकते हैं। 8300-8400 के पार निकलने के बाद बाजार में असली तेजी देखने को मिल सकती है।


निवेश के विकल्प कई हैं जैसे सीधे शेयर खरीदें और बेचें या म्युचुअल फंड में पैसा लगाएं। ब्रोकर का पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (पीएमएस) स्कीम भी चुना जा सकता है। लेकिन नए निवेशकों के लिए म्युचुअल फंड सबसे अच्छा तरीका है। म्युचुअल फंड में फंड मैनेजर आपके फंड का ध्यान रखेंगे और शुरुआत में बड़ा पैसा लगाने के लिए पीएमएस का विकल्प आपके पास होता है। सीधे शेयर खरीदने में रिस्क ज्यादा होता है लेकिन अगर आपने अच्छी रिसर्च के बाद शेयर चुना है तो आपके पैसे पर जोखिम कम होगा।


आस्कसंदीपसभरवाल डॉटकॉम के संदीप सभरवाल का कहना है कि इकोनॉमी अच्छा करना शुरू कर चुकी है और अगले 4 साल तक बेहतर ही रहेगी। इसके आधार पर बाजार में भी तेजी जरूर आएगी। बाजार में अगले 3-4 साल की तेजी तो साफ तौर पर देखी जा सकती है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर काफी तेजी से भाग रहे हैं लेकिन इनमें भी निवेश करते समय ध्यान रखना चाहिए कि सारे मिडकैप-स्मॉलकैप शेयर अच्छे नहीं हैं। इनमें भी अच्छी क्वालिटी और बढ़िया फंडामेंटल वाले शेयरों में पैसा लगाना चाहिए। बाजार में आमतौर पर तेजी एफआईआई निवेश बढ़ने से आती है लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशक भी जब जमकर पैसा लगाते हैं तो बाजार चढ़ते हैं। दब एफआईआई पैसा ज्यादा आएगा तो लार्जकैप चढ़ेंगे और जब डीआईआई (घरेलू संस्थागत निवेशक) पैसा लगाते हैं तो मिड-स्मॉलकैप शेयर ज्यादा भागते हैं।


भारत में एफआईआई का निवेश फिर लौट कर आएगा और इसके बाद बाजार जरूर चढ़ेंगे। छोटे निवेशक हर महीने निवेश करें और अच्छा निवेशक बनने के लिए अनुभव जरूरी होता है। बाजार में नए निवेशक म्युचुअल फंड का रास्ता चुनें। समय के साथ बाजार में निवेश बढ़ेगा तो तेजी भी आएगी। अपनी गलतियों से सीखना जरूरी होता है और यही नियम शेयर बाजार में भी लागू होता है। निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी आपको फायदा भी उतना ही ज्यादा मिलेगा।


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