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कर्जदारों पर बैंकों का दबाव, डूबते कर्ज से उबरने की कोशिश

प्रकाशित Wed, 02, 2015 पर 15:19  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कर्ज के बोझ तले दबी कंपनियों पर बैंकों का शिकंजा मजबूत होता जा रहा है। कर्ज चुकाने के लिए कंपनियां अपने एसेट्स बेचने को मजबूर हो रही हैं।


हाल ही में एसबीआई ने विजय माल्या और यूबी होल्डिंग्स को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है। एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्शियम ने विजय माल्या के बंगले, ऑफिस और किंगफिशर हाउस पर कब्जा किया है। विजय माल्या की कार, ट्रैक्टर, एयरक्राफ्ट पूल्लर जैसी चीजों की भी नीलामी होगी।


वहीं कर्ज कम करने के लिए भूषण स्टील अपना ऑक्सीजन प्लांट बेचने पर मजबूर हैं। बैंकों ने भूषण स्टील के कर्ज की रीफाइनेंसिंग की और बैंकों ने बोर्ड में भी बदलाव किया है। साथ ही एस्सार ग्रुप की बात करें तो पूरे ग्रुप पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। बैंकों के दबाव के चलते अगले 4 महीने में एस्सार ग्रुप की कंपनियों में हिस्सा बिकेगा। एस्सार ग्रुप ने एस्सार ऑयल में 49 फीसदी हिस्सा रूस की कंपनी रॉसनेफ्ट को बेचा है। एस्सार ग्रुप, एस्सार स्टील के दो प्लांट में हिस्सा बेचने के लिए मजबूर हैं।


एम्टेक ग्रुप की बात करें तो ग्रुप के चुनिंदा विदेशी सब्सिडियरी में हिस्सा बेचने का दबाव बढ़ा है। एम्टेक ग्रुप पर बैंकों का जल्द भुगतान का दबाव है, ऐसे में जल्द ही रियल्टी प्रोजेक्ट बेचने की योजना है। एम्टेक ग्रुप के बॉन्ड में डिफॉल्ट के कारण बैंकों ने दबाव बढ़ाया है।


आईवीआरसीएल कर्ज घटाने के लिए 1,000 करोड़ रुपये के रोड प्रोजेक्ट बेचेगी। वहीं एसडीआर के जरिए बैंकों ने आईवीआरसीएल के कर्ज को इक्विटी में बदला है। साथ ही गैमन इंडिया की टीएंडडी और ईपीसी कारोबार को बेचने की योजना है। कर्ज चुकाने के लिए गैमन इंडिया की ईपीसी कारोबार बेचने की योजना है। बैंकों ने गैमन इंडिया के कर्ज को इक्विटी में बदला है।


माना जा रहा है कि बैंकों की सख्ती से एनपीए यानि बैंकों के डूबते कर्ज की रिकवरी तेज होगी। निवेशकों का बैंकों पर भरोसा बढ़ेगा और आगे कंपनियां भी सही मकसद के लिए ही कर्ज लेंगी।


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