Moneycontrol » समाचार » बीमा

योर मनी: मिस सेलिंग के जाल से कैसे मिले मुक्ति

प्रकाशित Thu, 03, 2015 पर 13:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आमदनी अठ्टनी खर्चा रूपया। आजकल, अमूमन, हर किसी की ये ही कहानी है। लेकिन, क्या ऐसा कभी हो सकता है, कि खर्च के लिए भी आपके पास पैसे हों, और साथ ही आपका निवेश और बचत भी लगातार बढ़ते रहे। आप सोचेगें, शायद नहीं, लेकिन यहीं काम आता है आपका फाइनेंशियल गुरू योर मनी। योर मनी में आज आपको निवेश के गुर बता रहे हैं हर्ष रूंगटा डॉट कॉम के हर्ष रूंगटा।


सबसे पहले हम बात करते हैं मिस सेलिंग की। मिस सेलिंग सबसे ज्यादा इंश्योरेंस में होती है क्योंकि इसमें डिस्ट्रब्यूटर्स का कमीशन सबसे ज्यादा होता है। डिस्ट्रीब्यूटर अपने निजी फायदे के लिए मिस सेलिंग करते हैं। इंश्योरेंस को निवेश इंस्ट्रूमेंट न बनाएं। इंश्योरेंस एक सुरक्षा कवर है। हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म प्लान लेना सही होता है। अगर किसी खास मकसद से पॉलिसी ली है तो वो निवेश हुआ। मिस सेलिंग से बचने के लिए पॉलिसी पर रिसर्च करें। ध्या रखें कि रिटर्न दावा करने वाले प्रोडक्ट प्योर इंश्योरेंस नहीं होते।


सवाल: मैं हेल्थ इंश्योरेंस के बारे में जानना चाहता हूं। मेडिक्लेम, हेल्थ इंश्यरेंस और लाइफ इंश्योरेंस से कितना अलग होता है?


जवाब: हेल्थ इंश्योरेंस में हॉस्पिटल से जुड़े खर्च कवर होते हैं। मेडिक्लेम चर्चित टर्म है। लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में क्लेम पॉलिसी होल्डर के परिवार वालों को दिया जाता है। क्रिटिकल इलनेस पलिसी भी हैल्थ इंस्योरेंश के तहत ही आती है। जिसमें बड़ी बीमारी होने पर पॉलिसी होल्डर को कवर अमाउंट दिया जाता है। इसमें कैंसर, स्ट्रोक, पैरालिसिस जैसी बीमारियां कवर्ड होती हैं। ध्यान रखें कि लाइफ इंश्योरेंस कवर जितना कवरेज क्रिटिकल इलनेस का भी होना चाहिए।


वीडियो देखें