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पहला कदमः कैसे करें म्युचुअल फंड्स की मॉनिटरिंग

प्रकाशित Sat, 26, 2015 पर 15:41  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी आवाज की फाइनेंशियल की लिटरेसी मुहिम पहला कदम में हर हफ्ते हम आपसे बचत और निवेश को लेकर बातचीत करते हैं। फाइनेंशियल लिटरेसी मुहिम पहला कदम में हम चाहते हैं कि देश में हर शख्स आर्थिक सिस्टम से जुड़े इसीलिए सीएनबीसी आवाज ने पहल की है पहला कदम की। इस कार्यक्रम में हम आपको निवेश के तौर तरीके ही नहीं बताते बल्कि आपके जेहन में उठ रहे सवालों के जवाब भी देते हैं। आप हमें लिख सकते हैं फेसबुक पर सीएनबीसी-आवाज़ पर या फिर आप हमारी वेबसाइट www.pehlakadam.in पर भी अपना मेसेज छोड़ सकते हैं। पहला कदम के पिछले एपिसोड में हमने बात की कि थी म्युचुअल फंड्स में निवेश के तौर तरीकों की और निवेश की शुरूआत की। आज हम बात कर रहे हैं कि कैसे म्युचुअल फंड्स की मॉनिटरिंग कैसे करें. इसके साथ ही बात करेंगे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, इंडेक्स लिंक्ड फंड और ईटीएफ में निवेश की।


म्युचुअल फंड निवेश पर नजर
म्युचुअल फंड निवेश पर नजर रखना बेहद जरूरी है और फंड के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखना चाहिए। स्टॉक्स की तर्ज पर म्युचुअल फंड पर भी नजर रखनी चाहिए। म्युचुअल फंड निवेश पर नजर रखने के लिए हर रोज एनएवी जारी की जाती है और एनएवी के जरिए फंड का प्रदर्शन जान सकते हैं।  फंड्स के परफॉर्मेंस की जानकारी वेबसाइट्स पर भी मिल जाती है और कई रिसर्च फर्म भी फंड्स का एनालिसिस करती हैं। ये फर्म फंड्स के प्रदर्शन की आपस में तुलना करती हैं। फंड का एनालिसिस करना ज्यादा कठिन नहीं होता है और लॉन्ग टर्म निवेश पर हर रोज नजर रखने की जरूरत नहीं है। लॉन्ग टर्म निवेश को एक निश्चित अवधि में देखते रहना चाहिए। - 3-6 महीने के बीच फंड के प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए। ज्यादा तेजी या गिरावट के दौरान फंड पर नजर रखनी चाहिए और डेट फंड पर भी ब्याज दर के उतार-चढ़ाव के दौरान नजर रखनी चाहिए।


पोर्टफोलियो के प्रदर्शन पर नजर  
पोर्टफोलियो के प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए इक्विटी फंड के स्टॉक का प्रदर्शन देखना चाहिए और फंड मैनेजर के कामकाज पर भी नजर रखनी चाहिए। थीमेटिक और सेक्टोरल फंड्स के प्रदर्शन पर नजर रखनी चाहिए और इनकी लगातार निगरानी जरूरी है।


सेक्टर फंड में सेक्टर और फंड के प्रदर्शन की तुलना करें और लार्ज कैप डाइवर्सिफाइड फंड की इंडेक्स के प्रदर्शन से तुलना करना चाहिए और फंड के लक्ष्य और बेंचमार्क के मुताबिक निगरानी रखनी चाहिए। बेंचमार्क, इंडेक्स और फंड के प्रदर्शन की एक-दूसरे से तुलना करनी चाहिए। तुलना करके समीक्षा करनी चाहिए और फंड मैनेजर के परफॉर्मेंस पर भी नजर रखनी चाहिए। फंड की एनएवी देखना लगातार जरूरी है लेकिन केवल एनएवी के आधार पर कोई फैसला ना करें तो बेहतर होगा। फंड बेहतर प्रदर्शन ना करे तो उसी एसेट क्लास में दूसरा फंड चुनना चाहिए।


ईटीएफ किसे कहते हैं?
एक्सचेंज पर ट्रेड करने वाले फंड ईटीएफ कहलाते हैं और इनमें एमएफ यूनिट एक्सचेंज पर खरीदी और बेची जाती हैं। इनमें शेयरों की तर्ज पर यूनिट्स की ट्रेडिंग होती है और ये फंड किसी खास एसेट क्लास के होते हैं। ये फंड किसी खास इंडेक्स के हो सकते हैं और एमएफ यूनिट्स को एक्सचेंज पर लिस्ट करवाते हैं। ओपन एडेंड स्कीम एक्सचेंज पर लिस्ट नहीं होती हैं और क्लोज्ड एंडेड स्कीम लिस्ट होती है लेकिन इनमें वॉल्यूम काफी होता है।


ईटीएफ कैसे काम करता है?
ईटीएफ स्कीम ही एक्सचेंज पर लिस्ट होती हैं और ईटीएफ में दिनभर में कभी भी ट्रेड मुमकिन होता है। इनमें जिस वक्त ट्रेड होता है उसी वक्त की कीमत मिलती है। एमएफ में निवेश पर फंड निवेशक से पैसा लेकर यूनिट खरीदता है लेकिन ईटीएफ में यूनिट की खरीद फरोख्त निवेशक खुद ही करते हैं। लेकिन कभी कभी यहां लिक्विडिटी की समस्या हो जाती है।


इंडेक्स लिंक्ड ईटीएफ
ये ईटीएफ किसी ना किसी इंडेक्स से जुड़े होते हैं मसलन निफ्टी, बैंक निफ्टी या सेक्टर इंडेक्स। इंडेक्स लिंक्ड ईटीएफ में म्युचुअल फंड यूनिट बनाते हैं।


ईटीएफ कैसे काम करता है?
ये यूनिट एक्सचेंज पर डाल दी जाती हैं और मांग बढ़ने पर फंड ज्यादा यूनिट बनाते हैं। ईटीएफ में शेयरों की तर्ज पर रोजाना ट्रेडिंग होती है और इसमें एंट्री-एक्जिट का झंझट नहीं होता है। इंडेक्स लिंक्ड ईटीएफ के लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट बेहद जरूरी है।


ईटीएफ की सीमाएं
ईटीएफ केवल एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं और यहां एसआईपी करना मुश्किल होता है। इनमें कभी कभी लिक्विडिटी की समस्या होती है और आम तौर पर भारी मात्रा में यूनिट बेचने पर लिक्विडिटी की समस्या हो सकती है।


गोल्ड ईटीएफ क्या है?
सेंसेक्स और निफ्टी की तर्ज पर गोल्ड ईटीएफ होता है और गोल्ड ईटीएफ की एक्सचेंज पर खरीद-बिक्री हो सकती है। गोल्ड ईटीएफ में सोना फिजिकल फॉर्म में रखना जरूरी नहीं होता है और गोल्ड के पीछे गोल्ड एसेट्स की गारंटी मिलती है। गोल्ड ईटीएफ से सोने में सुरक्षित निवेश किया जा सकता है और सोने के रखरखाव के झंझट से मुक्ति मिल जाती है। गोल्ड ईटीएफ में लिक्विडिटी की समस्या नहीं होती और गोल्ड ईटीएफ बाजार भाव के आसपास ट्रेड करते हैं। गोल्ड ईटीएफ के चार्जेज बेहद कम होते हैं और गोल्ड ईटीएफ से भाव के उतार-चढ़ाव में फायदा मिलता है। एसआईपी से गोल्ड फंड खरीदने चाहिए और सारे गोल्ड ईटीएफ एक जैसे होते हैं। गोल्ड ईटीएफ में ट्रेड कभी भी मुमकिन हो सकता है।
 
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