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पहला कदमः जानें गोल्ड फंड, गोल्ड ईटीएफ की जानकारियां

प्रकाशित Sat, 09, 2016 पर 15:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

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जानें गोल्ड फंड क्या हैं
गोल्ड फंड वो हैं म्यूचुअल फंड हैं जो निवेशकों का पैसा सोने में निवेश करते हैं। ये फंड निवेशकों को सोने की कीमत के आधार पर वैल्यू देते हैं।


गोल्ड फंड के कुछ खास फीचर्स
निवेशक गोल्ड फंड 2 तरह से खरीद सकते हैं। एक तरीका ईटीएफ है और वो शेयर, म्यूचुअल फंड की तरह काम करता है। अन्य तरीका है साधारण म्युचुअल फंड की तरह काम करता है यानी वो किसी और फंड में निवेश करता है। इसमें भी निवेशकों को सोने में ही एक्सपोजर मिलता है। सोने को खरीदने की जगह निवेशक इन फंड को खरीद सकते हैं।


गोल्ड ईटीएफ
गोल्ड फंड का सबसे बड़ा तरीका है गोल्ड ईटीएफ। ये एक्सचेंज ट्रेडेड फंड होते हैं तो स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होते हैं। ट्रेडिंग के दौरान निवेशक किसी भी समय इन फंड को खरीद सकता है। इनकी वैल्यू  ठीक इसी तरह मांग और सप्लाई के आधार पर तय होती है जिस तरह शेयर के दाम तय होते हैं और ये बदलती भी रहती है। इन फंड की एनएवी सोने की कीमत के साथ जु़ड़ी रहती है। इसका अर्थ है कि फंड की कीमत सोने की कीमत के आधार पर बदलती रहती है। ये फंड उन निवेशकों के लिए हैं जो सोने की बदलती कीमतों के आधार पर मुनाफा कमाना चाहते हैं। ये खास तौर पर उन निवेशकों के लिए हैं जो सोने में निवेश करना चाहते हैं। चूंकि कारोबार के आखिर में निवेशकों को पैसे के रूप में रिर्टन मिलता है तो वो इस पैसे से सोना या और कोई माध्यम खरीद सकते हैं।


गोल्ड ईटीएफ के फायदे
इसमें निवेशक जितनी चाहें उतनी चाहें उतनी यूनिट खरीद सकते हैं और इससे निवेशक जितनी चाहें उतनी राशि से फंड खरीद सकते हैं। एक कारोबारी दिन के दौरान निवेशकों को बहुत अलग अलग वैल्यू मिलती हैं तो वो किसी भी तरह का ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। इसके जरिए निवेशकों को इंट्राडे मूवमेंट में भी पैसा कमाने के मौके मिल पाते हैं। इस फंड का एक्सपेंस रेशयो काफी सस्ता है तो इससे निवेशकों को अच्छा फायदा मिल पाता है। इसके जरिए निवेशकों को सोने को सुरक्षित रखने के जोखिम से आजादी मिल पाती है। इसमें सोने को खरीदने की तरह कई अन्य तरह के चार्ज नहीं होते जैसे मेकिंग चार्ज आदि। इसमें निवेशक अपनी सहूलियत के अनुसार एंट्री और एक्जिट ले पाता है तो फिजिकल गोल्ड में नहीं हो पाता है। 


गोल्ड फंड का टैक्सेशन
गोल्ड फंड में डेट आधारित फंड की तरह टैक्स लगता है। इसमें शॉर्ट टर्म गेन और लॉन्ग टर्म गेन के बीच 3 साल का समय होता है। अगर निवेश 3 साल से पहले बेच दिया जाए और फिर इसमें मुनाफा हो तो इसे शॉर्ट टर्म गेन की श्रेणी में रखा जाएगा। इसे आय में जोड़ा जाएगा और हरे व्यक्ति पर अलग अलग तरीके से लगता है। अगर यूनिट 3 साल के बाद बेची जाएगी तो इसे लॉन्ग टर्म गेन की श्रेणी में रखा जाएगा। इंडेक्सेशन के साथ इसमें 20 फीसदी का टैक्स रेट लगाया जाएगा।


गोल्ड सेविंग फंड
छोटे निवेशकों को खासतौर पर ईटीफ में ट्रेड करने में दिक्कत होती है तो उनके लिए गोल्ड सेविंग फंड बेहतर हैं। इसके पीछे एक कारण ये भी है कि उनकी ब्रोकर तक सीधी पहुंच नहीं हो पाती है। डीमैट अकाउंट की कमी भी इसकी एक बड़ी वजह है। इन सब समस्याओं को देखते हुए म्यूचुअल फंड ने गोल्ड सेविंग फंड लॉन्च किए। ये भी साधारण म्यूचुअल फंड की तरह होते हैं। इसमें भी सोने में एक्सपोजर की तरह ही वैल्यू मिलती है। निवेशक इन फंड में एसआईपी भी कर सकते हैं। आप इसमें सामान्य म्यूचुअल फंड की तरह छोटी राशि भी निवेश कर सकते हैं। इसमें हालांकि लागत थोड़ी ज्यादा होती है क्योंकि इसमें निवेश की दो तरह की प्रक्रिया होती है। इन तरह के फंड्स में कई सहूलियत होती हैं।


गोल्ड फंड का कब उपयोग करें
सोने में निवेश एक पूरी तरह अलग ऐसेट क्लास है और आपके पोर्टफोलियो में इस ऐसेट क्लास का भी समावेश होना चाहिए। ये आपके पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन की जरूरत को पूरा करता है तो आप इसके लिए इस फंड का उपयोग कर सकते हैं। अगर आप सोने में निवेश करना चाहते हैं और ज्वेलरी के रूप में नहीं करना चाहते तो आपके लिए अच्छा विकल्प है। ये निवेश मध्यम से लंबी अवधि के लिए किया जा सकता है। साथ ही अगर आप लगातार निवेश करना चाहते हैं तो भी ये एक बढ़िया विकल्प है। इसके जरिए आप कम राशि में इस ऐसेट क्लास में हिस्सा ले सकते हैं। आप तभी भी गोल्ड फंड में निवेश कर सकते हैं जब आप फिजिकल गोल्ड में निवेश से होने वाले जोखिम और इसे रखने के झंझट से बचना चाहते हों।


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