पहला कदम: जानें म्युचुअल फंड के टैक्स नियम -
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पहला कदम: जानें म्युचुअल फंड के टैक्स नियम

प्रकाशित Sat, 16, 2016 पर 14:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पहला कदम की मुहिम का मकसद है ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचत और निवेश की जरूरत को समझाना और देश के फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ना। अपनी इस मुहिम को हम देश के स्कूल, कॉलेजों और गांवों तक ले जा रहे हैं और स्कूलों, कॉलेजों में हमें शानदार रिस्पॉन्स भी मिल रहा है। अगर आप भी अपने गांव, रेसिडेंशियल सोसायटी, ऑफिस, कॉलेज या स्कूल में जागरुकता फैलाना चाहते हैं और हमारी टीम की एक्सपर्ट एडवाइस चाहते हैं, तो हमें लिख सकते हैं फेसबुक पर सीएनबीसी-आवाज़ के पेज पर या फिर आप हमारी वेबसाईट www.pehlakadam.in (पहलाकदम डॉट इन) पर भी अपना मेसेज छोड़ सकते हैं।


सीएनबीसी-आवाज चाहता है कि देश में हर शख्स आर्थिक प्रक्रिया से जुड़े और इसी कड़ी में हमने पहल की पहला कदम की। पहला कदम हमारे और आपके बीच मौजूद हर उस शख्स को फाइनेंशियल इन्क्लूजन की प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाना चाहता है जो अब तक उससे दूर रहा है। इस कार्यक्रम में हम आपको निवेश के तौर तरीके ही नहीं बताते बल्कि अपने दिमाग में उठ रहे सवालों के जवाब भी देते हैं। पहला कदम में इस बार हम बात कर रहे हैं म्युचुअल फंड निवेश पर लागू होने वाले टैक्स नियमों की। इस मुद्दे पर बात करने के लिए हमारे साथ हैं पर्सनल फाइंनेंस एक्सपर्ट अर्नब पांड्या।


सबसे पहले तो ये बता दें कि म्युचुअल फंड से डिविडेंड और कैपिटल गेन के जरिए कमाई होती है। म्युचुअल फंड में कमाई के 2 विकल्प होते हैं ये डिविडेंड ऑप्शन और ग्रोथ ऑप्शन। गौरतलब है कि डिविडेंड की कमाई टैक्स फ्री नहीं होती इक्विटी और कमोडिटी में टैक्स नियम अगल-अगल हैं।


इक्विटी फंड में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स 15 फीसदी होता है। यानि 1 साल के भीतर निकलने पर मुनाफे का 15 फीसदी टैक्स के तौर पर चुकाना होगा। लेकिन 1 साल से ज्यादा होल्ड करने पर टैक्स नहीं देना होगा। इक्विटी में 1 साल बाद टैक्स जीरो हो जाता है। वहीं डेट फंड में 3 साल बाद टैक्स में फायदा मिलता है।


डेट फंड में 3 साल से पहले निकलने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है। इसमें टैक्स का कोई फिक्स रेट नहीं, स्लैब के मुताबिक टैक्स देना होता है। 3 साल बाद निकलने पर 20 फीसदी टैक्स देना होता है। इंडेक्सेशन का बैनिफिट मिलता है। इंडेक्सेशन बैनिफिट के साथ करीब 20 फीसदी टैक्स लागू होता है।


एमएफ में कैपिटल लॉस पर छूट का प्रावधान है। शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को दूसरे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के साथ सेट ऑफ यानि नफा-नुकसान बराबर किया जा सकता है। वहीं शेयर के नुकसान को शेयर के मुनाफे से ही सेट ऑफ किया जा सकता है, दूसरे एसेट से नहीं। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को शॉर्ट टर्म लॉस से सेट ऑफ नहीं किया जा सकेगा। 1 साल बाद इक्विटी में नुकसान का सेट ऑफ नहीं होगा। 1 साल के भीतर अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू जरूर करें। शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को 8 साल तक र्शॉर्ट टर्म गेन के साथ सेट ऑफ कर सकते हैं।


डेट फंड में कैपिटल लॉस पर टैक्स में छूट मिलती है। शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के सामने सेट ऑफ यानि टैक्स में छूट मिलती है। इसमें शॉर्ट टर्म लॉस को शॉर्ट टर्म गेन के साथ सेट ऑफ कर सकते हैं। लेकिन लॉन्ग कैपिटल लॉस को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ ही सेट ऑफ किया जा सकेगा।


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