Facebook Pixel Code = /home/moneycontrol/commonstore/commonfiles/header_tag_manager.php
Moneycontrol » समाचार » निवेश

पहला कदमः जानें फंड्स से कब पैसे निकालें

प्रकाशित Sat, 23, 2016 पर 15:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी आवाज़ की फाइनेंशियल लिटरेसी की मुहिम पहला कदम में हर हफ्ते हम बचत और निवेश के नए नए तरीकों की चर्चा करते हैं। हमारे एक्सपर्ट आपके जेहन में उठ रहे सवालों के जवाब भी देने की कोशिश करते हैं। अगर आपके पास कोई सवाल है तो आप हमें लिख सकते हैं सीएनबीसी आवाज के फेसबुक पेज पर या फिर हमारी वेबसाइट pehlakadam.in पर अपना संदेश भी छोड़ सकते हैं। पहला कदम के इस एपिसोड में हमने बात करेंगे कि किस तरह म्युचुअल फंड से विद्ड्रॉल की प्लानिंग की जाए।


सीएनबीसी-आवाज़ पहला कदम की मुहिम का मकसद है ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचत और निवेश की जरूरत को समझाना और देश के फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ना। अपनी इस मुहिम को हम देश के स्कूल, कॉलेजों और गांवों तक ले जा रहे हैं और स्कूलों, कॉलेजों में हमें शानदार रिस्पॉन्स भी मिल रहा है। अगर आप भी अपने गांव, रेसिडेंशियल सोसायटी, ऑफिस, कॉलेज या स्कूल में जागरुकता फैलाना चाहते हैं और हमारी टीम की एक्सपर्ट एडवाइस चाहते हैं, तो हमें लिख सकते हैं फेसबुक पर सीएनबीसी-आवाज़ के पेज पर या फिर आप हमारी वेबसाईट www.pehlakadam.in (पहलाकदम डॉट इन) पर भी अपना मेसेज छोड़ सकते हैं।


फंड्स से कब पैसे निकालें?
फंड्स से निकलने की प्लानिंग करना और निवेश से कब पैसे निकालें जाएं ये तय करना भी अहम है। आप निवेश करते वक्त ही प्लान करें कि फंड्स से कब बाहर निकलना है। फाइनेंशियल लक्ष्य के मुताबिक प्लान करना चाहिए। पैसा निकालने की प्लानिंग में टैक्स लायबिलिटी का ख्याल रखना चाहिए और इक्विटी और डेट फंड में टैक्स लायबिलिटी अलग अलग होती है। शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में टैक्स रेट अलग अलग होते हैं। निवेशक डिविडेंड ऑप्शन भी चुन सकते हैं और कैश फ्लो की जरूरत के हिसाब से डिविडेंड ऑप्शन चुने जाने चाहिए।


हरेक फंड में हर ऑप्शन नहीं
डेट एवं इक्विटी में डिविडेंड पेआउट ऑप्शन अलग अलग होते हैं और यहां जानिए कि इनमें क्या अंतर है।


डिविडेंड पेआउट ऑप्शन
हर महीने या 3 महीने पर पैसा निकालने की सुविधा देता है।


सालाना
इक्विटी में सालाना ऑप्शन ही मौजूद होती है और इसमें डिविडेंड की रकम निश्चित नहीं होती है। केवल डेट फंड में डिविडेंड का अनुमान मुमकिन होता है। इक्विटी फंड में डिविडेंड फिक्स नहीं होता है। ओपन एडेंड फंड से पैसा निकालना आसान होता है और ईएलएसएस में 3 साल का लॉन इन होता है। ईएलएसएस में 3 साल से पहले निकलने पर नुकसान होता है। वहीं क्लोज एंडेड फंड में रिडंपशन में मुश्किल आती है। इसलिए पोर्टफोलियो को बैलेंस्ड रखें और सारा पैसा क्लोज एंडेड फंड में ना लगाएं। टैक्स बचाने लायक पैसा ही क्लोज एंडेड फंड में लगाना चाहिए। ईएलएसएस के मुकाबले दूसरे इक्विटी फंड बेहतर रहते हैं और निवेश से निकलते वक्त एग्जिट लोड का हिसाब लगाना चाहिए।


निवेश निकलने के रास्ते
डिविडेंड ऑप्शन लें या ओपन एंडेड फंड में निवेश करें। क्लोज एंडेड फंड का ध्यान रखें और एग्जिट लोड एवं टैक्स का भी ख्याल रखें।


ट्रिगर फैसिलिटी क्या है?
एसडब्ल्यूपी यानि सिस्टमैटिक विदड्रावल प्लान


ट्रिगर फैसिलिटी क्या है?
ट्रिगर फैसिलिटी पैसा निकालने की ऑटोमैटिक सुविधा होती है और फंड एक निश्चित समय बाद ऑटोमैटिक तरीके से एक निश्चित रकम निवेशक को लौटा देता है। कब और कितनी रकम निकालनी है, ये निवेशक पहले से फंड को बता देता है। ट्रिगर फैसिलिटी में एक फंड की रकम दूसरे फंड में निवेश करना भी संभव हो पाता है।


ट्रिगर फैसिलिटी के फायदे?
ट्रिगर फैसिलिटी के फायदे हैं कि इसमें मॉनिटरिंग का झंझट नहीं होता है और खुद खरीदने-बेचने की चिंता नहीं होती है कयोंकि रकम और वक्त पहले से तय हो जाता है।


ट्रिगर फैसिलिटी
हर फंड की ट्रिगर फैसिलिटी अलग अलग होती है और हर स्कीम की ट्रिगर फैसिलिटी अलग अलग होती है।


एसडब्ल्यूपी क्या है?
एसडब्ल्यूपी यानि सिस्टमैटिक विदड्रावल प्लान है जो सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट की तर्ज पर सिस्टमैटिक विदड्रावल प्लान होता है। इसे निवेश से पैसा निकालने की एडवांस प्लानिंग भी कह सकते हैं। ये प्रोसेस ऑटोमैटिक है और इसमें बार बार इंस्ट्रक्शन देने की जरूरत नहीं है। इसमें बार-बार मॉनिटरिंग की जरूरत नहीं होती है और निवेशक का तय अवधि में पैसे का भुगतान हो जाता है। एसडब्ल्यूपी एक तरह से एसआईपी के ठीक उलट है।


वीडियो देखें