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बजट स्पेशल टैक्स गुरु: क्या हैं टैक्सपेयर्स की उम्मीदें

प्रकाशित Fri, 29, 2016 पर 17:45  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

29 फरवरी को जब वित्त मंत्री अरुण जेटली अपना बजट का पिटारा खोलेंगे तो क्या लेकर आएंगे टैक्सपेयर्स के लिए, क्या टैक्सपेयर्स को खुश करेंगे, टैक्स का बोझ कम करेंगे इन्ही तमाम सवालों पर लेंगे एक्सपर्टस की राय।  


टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया की राय


टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया के मुताबिक बजट में कोई डायरेक्ट टैक्स छूट मिलने की उम्मीद नहीं है। लेकिन टैक्सपेयर्स को इनडायरेक्ट फायदा मिल सकता है। वहीं टीडीएस के मामले में भी राहत मिल सकती है। टीडीएस कम होने से ब्याज ज्यादा मिलेगा जिससे टैक्सपेयर्स का फायदा होगा। रिफंड में भी दिक्कत कम होगी। 


क्लियरटैक्स डॉटइन की चीफ एडिटर प्रीति खुराना की राय


प्रीति खुराना का कहना है कि बजट में बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट बढ़ने की उम्मीद कम है, क्योंकि वित्त मंत्री पर वित्तीय घाटा कम करने का दबाव है। बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट को महंगाई दर से जोड़ने का आइडिया अच्छा है। लेकिन सरकार के लिए तुरंत इस पर अमल कर पाना मुश्किल है। ईश्वर कमिटी ने टीडीएस की दर 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की सिफारिश की है। बजट में इफेक्टिव टैक्स रेट कम होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन रिफंड में फंसी रकम कम होगी। और इससे रिफंड के झंझट से छुटकारा मिलेगा। सरकार और टैक्सपेयर्स दोनों को आसानी होगी।


बजट में सेक्शन 80सी में निवेश की सीमा बढ़ाने की जरूरत है। लोगों को बचत और निवेश के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। डायरेक्ट टैक्स कोड टैक्स रिफॉर्म का बढ़िया कदम था। डीटीएच पर फिलहाल तुरंत किसी कदम की उम्मीद नहीं है। बजट में हर तरह के टैक्स अलाउंस की समीक्षा करने की जरूरत है। टैक्स अलाउंस बदलती जरूरतों के मुताबिक होने चाहिए। सरकार को एनपीएस को बढ़ावा देना चाहिए और एनपीएस से पैसे निकालने पर टैक्स लगाने का नियम बदलना चाहिए। उम्मीद है कि एनपीएस भी ई-ई-ई के दायरे में आएगा।


सरकार को बेहतर बचत योजनाओं पर विचार करना चाहिए। सरकार टैक्स के नियम और आसान बनाने चाहिए। बजट में टैक्स नियमों को लेकर कंफ्यूजन दूर करने की जरूरत है। पिछले साल रिटर्न और रिफंड के नियम आसान हुए हैं। इस साल बजट में नियम और आसान बनाए जाने की उम्मीद है। बजट में 80जीजी के नियम बदलने की जरूरत है। 80जीजी में मिलने वाली 2,000 रु की छूट अव्यवहारिक है। लोगों को मेडिकल इंश्योरेंस से मिलने वाली छूट का फायदा उठाना चाहिए। बजट में मेडिकल रिइंबर्समेंट की लिमिट बढ़ने की उम्मीद कम है।


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