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पहला कदमः कैसे करें अपने फंड की समीक्षा

प्रकाशित Sat, 30, 2016 पर 14:45  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी आवाज़ की फाइनेंशियल लिटरेसी की मुहिम पहला कदम में हर हफ्ते हम बचत और निवेश के नए नए तरीकों की चर्चा करते हैं। हमारे एक्सपर्ट आपके जेहन में उठ रहे सवालों के जवाब भी देने की कोशिश करते हैं। अगर आपके पास कोई सवाल है तो आप हमें लिख सकते हैं सीएनबीसी आवाज के फेसबुक पेज पर या फिर हमारी वेबसाइट pehlakadam.in पर अपना संदेश भी छोड़ सकते हैं। पहला कदम के इस एपिसोड में हम बात करेंगे कि पोर्टफोलियो की समीक्षा कैसे की जा सकती है।


सीएनबीसी-आवाज़ पहला कदम की मुहिम का मकसद है ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचत और निवेश की जरूरत को समझाना और देश के फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ना। अपनी इस मुहिम को हम देश के स्कूल, कॉलेजों और गांवों तक ले जा रहे हैं और स्कूलों, कॉलेजों में हमें शानदार रिस्पॉन्स भी मिल रहा है। अगर आप भी अपने गांव, रेसिडेंशियल सोसायटी, ऑफिस, कॉलेज या स्कूल में जागरुकता फैलाना चाहते हैं और हमारी टीम की एक्सपर्ट एडवाइस चाहते हैं, तो हमें लिख सकते हैं फेसबुक पर सीएनबीसी-आवाज़ के पेज पर या फिर आप हमारी वेबसाईट www.pehlakadam.in (पहलाकदम डॉट इन) पर भी अपना मेसेज छोड़ सकते हैं।


वक्त-वक्त पर फंड की समीक्षा करते रहना चाहिए कि आपका फंड अपनी रणनीति पर कायम है या नहीं। फंड की ओर से शेयरों का चुनाव किया गया था वो ठीक प्रदर्शन कर सकता है। आपका फंड दूसरे फंड से कैसे अलग है। आपके फंड में रिस्क कितना है और फंड का परफॉर्मेंस उम्मीद के मुताबिक है या नहीं इन सब पर आपकी नजर होनी चाहिए।


कैसे करें इक्विटी फंड की समीक्षा
आप अपने स्टॉक्स में होल्डिंग देखें और टॉप होल्डिंग वाले शेयर का एक्सपोजर देखें। पोर्टफोलियो में किसी 1 स्टॉक में 10 फीसदी से ज्यादा होल्डिंग नहीं होना चाहिए। हालांकि सेक्टर या थीमेटिक फंड में 10 फीसदी की सीमा नहीं है। हालांकि ये देखें कि सेक्टर फंड में कितना निवेश किया गया है। डाइवर्सीफाइड फंड में अलग अलग सेक्टर में निवेश से फायदा होता है और एक ही सेक्टर में जरूरत से ज्यादा निवेश नहीं होना चाहिए। एक ही स्टॉक में ज्यादा निवेश नहीं होना चाहिए। स्मॉल और मिडकैप में लंबा नजरिया रखने पर फायदा होता है।


फंड मैनेजर के कामकाज पर नजर
फंड मैनेजर ने कितनी अवधि में शेयर खरीदे-बेचे हैं और फंड मैनेजर की खरीद-फरोख्त से रिटर्न कितना आया है, इस सब पर ध्यान देना जरूरी है। लॉन्ग टर्म निवेश पर फंड मैनेजर की ओर से खरीद -बिक्री पर नजर रखनी चाहिए और आपको फंड मैनेजर की खरीद-बिक्री से होने वाले पर फायदे पर नजर रखनी चाहिए।


कैसे रखें पोर्टफोलियो की सेहत पर नजर


डायनामिक फंड में निवेश
फंड का बेंचमार्क के मुताबिक परफॉर्मेंस है या नहीं ये ध्यान रखना जरूरी है। डायनमिक फंड में निवेश बेहतर होता है। डायनमिक फंड डेट और इक्विटी में निवेश करते हैं और डायनमिक फंड ऑटोमैटिक डेट-इक्विटी में खरीद-बिक्री करते हैं। डायनमिक फंड बाजार के मूड के हिसाब से खरीद-ब्रिकी करते हैं और डायनमिक फंड इक्विटी-डेट के बीच निवेश करते हैं।


इक्विटी फंड का परफॉर्मेंसः कैसे रखें नजर 
बड़े इक्विटी पोर्टफोलियो से रिस्क कम होता है और छोटे पोर्टफोलियो में ज्यादा मुनाफा होता है। बड़े इक्विटी पोर्टफोलियो से कम स्टॉक में बड़ा दांव लगाया जा सकता है। वहीं छोटे पोर्टफोलियो में सेक्टर पर फोकस होना चाहिए। सेक्टर फंड में उसी सेक्टर के शेयर हों और इस तरह सेक्टर के क्लासिफिकेशन पर ध्यान देना चाहिए। डायवर्सीफाइड फंड में एक सेक्टर के ही ज्यादा शेयर नहीं होने चाहिए और ओपन थीम वाले फंड में कोई भी शेयर आ सकता है। हालांकि आपको ओपन एंडेड थीम वाले फंड पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है।


कैसे करें डेट फंड पोर्टफोलियो की समीक्षा
डेट फंड पोर्टफोलियो पर नजर रखना मुश्किल होता है लिहाजा कमजोर पोर्टफोलियो वाले फंड में पैसा ना लगाएं। आप केवल मजबूत पोर्टफोलियो वाले फंड में ही निवेश करें। हालांकि सरकारी सिक्योरिटीज में कोई रिस्क नहीं होता और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट बैंक जारी करते हैं इसलिए इनमें भी रिस्क नहीं होता है। हालांकि कमर्शियल पेपर कॉरपोरेट की रेटिंग देखकर ही खरीदें और कॉरपोरेट बॉन्ड्स में रिस्क भी होता है तो कॉरपोरेट बॉन्ड्स में निवेश कंपनी की रेटिंग देखकर करें तो बेहतर है। एक ग्रुप की अलग अलग कंपनियों का परफॉर्मेंस अलग हो सकता है तो हर कंपनी का परफॉर्मेंस परखें। रेटिंग एजेंसियों की क्रेडिट रेटिंग जरूर देखें और जानें कि कंपनियों की रेटिंग लगातार बदलती रहती है तो किसी एक बॉन्ड या कंपनी में ज्यादा एक्सपोजर नहीं कर रखा हो।


किसी एक ग्रुप की कंपनियों के बॉन्ड में बहुत ज्यादा निवेश नहीं होना चाहिए और छोटी अवधि के बॉन्ड में निवेश में फायदे ज्यादा और रिस्क कम होता है। फिक्स इनकम वाले निवेश में रिस्क नहीं होना चाहिए। डेट फंड में बदलती ब्याज दरों का भी ख्याल रखना चाहिए क्योंकि ब्याज दर बढ़ने पर नुकसान होता है और ब्याज दरें घटने पर फायदा होता है।


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