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म्यूचुअल फंडों में निवेश

प्रकाशित Thu, 06, 2010 पर 11:55  |  स्रोत : Hindi.in.com

दीपा वेंकटराघवन

म्यूचुअल फंड्स निवेश का एक तरीका है, जिनके जरिए आप शेयरों या निश्चित आय की संपत्तियों में धन लगा सकते हैं। दौलतमंद होने का तकाजा यह है कि आपके पास जरूरी गुण, व्यवहार और तकनीकी जानकारी नहीं है तो अपने आप निवेश करने के बजाय म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करना बेहतर है। 

अगर आप म्यूचुअल फंड की बुनियादी धारणा और काम के तरीके से परिचित होना चाहते हैं तो आप नीचे लिखे नियमों पर ध्यान दीजिए।

चरण 1: जानिए कि म्यूचुअल फंड की सिफारिश क्यों होती है

हम सब निवेश के जानकार नहीं

म्यूचुअल फंड पेशेवर धन प्रबंधक हैं। उनके पक्ष में यह बात जाती है कि उनका ज्यादा नियमन किया जाता है। निवेशक इन फंडों के ट्रैक रिकार्ड का विश्लेषण करके मूल्यांकन कर सकते हैं।

निवेश हो गया है जटिल

एक समय चीजें बहुत साधारण होती हैं। बाजार हर साल मानसून आने के साथ बढ़ना शुरू होता है और दीवाली तक बढ़ता जाता है। भारत अब दुनिया के साथ जुड़ रहा है। अमेरिका में कम अवधि की ब्याज दर भी असर डालती है।

जोखिम बांट सकते हैं

किसी पोर्टफोलियो का विविधीकरण किसी भी पोर्टफोलियो की पुनररचना का एक कारक है। पोर्टफोलियो धारक को उसमें जोखिम भी कम से कम करना चाहिए। हम लोगों में से ज्यादातर पोर्टफोलियो की रचना में दक्ष नहीं हैं। इसलिए यह काम पेशेवर लोगों के भरोसे छोड़ देना चाहिए। म्यूचुअल फंड में यह विकल्प है।

चरण 2: म्यूचुअल फंड का चुनाव
म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए दूसरे निवेश विकल्पों की तरह ही रणनीति बनानी पड़ती है। यह रणनीति आपकी संपत्तियों के वितरण का स्वाभाविक विस्तार है।इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

उस फंड की तलाश कीजिए जिसके निवेश से आपकी संपत्तियों का वितरण मेल खाता है

जैसे आप कंप्यूटर खरीदते समय अपनी जरूरत और बजट का ख्याल रखते हैं, आपको ऐसा म्यूचुअल फंड खरीदना चाहिए जो आपके जोखिम सहने की क्षमता और बजट का ध्यान रखता हो। म्यूचुअल फंड के निवेश आधारों में फिक्स्ड इनकम या इक्विटी, सामान्य इक्विटी या किसी खास सेक्टर पर केंद्रित, ज्यादा जोखिम या कम जोखिम, ब्लूचिप या टर्नअराउंड, लांग टर्म या शार्ट टर्म लिक्विडटी शामिल रहता है। 

पुराने कामकाज का मूल्यांकन करें

किसी फंड का पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं है, फिर भी इसके जरिए आप यह जान सकते हैं कि उसने अपने लक्ष्यों अथवा अन्य समवर्ती फंडों की तुलना में कैसा प्रदर्शन किया है। इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि पांच सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंडों की पहचान करें, जो आपकी जरूरत के हिसाब से तय अवधि के हों। यानी तीन माह, छह माह, एक साल, दो साल या तीन साल के हो सकते हैं। इन अवधियों में टॉप पांच फंडों का चुनाव करें।

विविधीकरण करें

किसी एक म्यूचुअल फंड पर केंद्रित नहीं करें (ताकि एक ही फंड पर अत्यधिक निर्भरता का जोखिम न रहे)। अगर आपने दो फंड चुने हैं तो मैं 60:40 या तीन फंड चुने हैं तो  50:30:20 के अनुपात में विभाजन करें।

फंड की लागत पर गौर करें

किसी म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश की लागत महत्वपूर्ण है। मैनेजमेंट फीस, फंड के सालाना खर्च और सेल्स लोड आपके लाभ का बड़ा हिस्सा ले जाता है। मैनेजमेंट फीस 1 फीसदी और 0.6 फीसदी अन्य सालाना खर्च के रूप में देने होते हैं।

चरण 3: निवेश, निगरानी और समीक्षा

किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करने के बाद ध्यान देना चाहिए कि यह फंड क्या पहले तय दिशा में काम कर रहा है। क्या इसका प्रदर्शन आशा के अनुरूप है। किसी शेयर या बांड के विपरीत म्यूचुअल फंड की समीक्षा बार-बार नहीं करनी पड़ती। तिमाही में एक बार ही काफी है।
किसी भी फंड के कामकाज की समीक्षा आपके म्यूचुअल फंड को रखने या बेचने के लिहाज से करनी चाहिए।

-आप अपने निवेश की योजना में बदलाव करें। जैसे आपकी उम्र बढ़ रही है तो ज्यादा सुरक्षित निवेश की योजना बनाएं।

-एक फंड भी अपनी रणनीति बदलता है। इसलिए कोई फंड निवेश का लक्ष्य या रणनीति में बदलाव करता है वह आपकी रणनीति के मुताबिक नहीं हो सकता है।

-किसी भी फंड के कमजोर नतीजे बने रहते हैं। अगर कोई फंड कुछ खास शेयरों में निवेश करता है और उन्हें बदलने के बारे में सोचता है, उस फंड का कमजोर कामकाज उस कंपनी की कामकाज में विशेषज्ञता की झलक दिखाता है।

आप समझ गए होंगे कि म्यूचुअल फंड में निवेश एक प्रक्रिया है।