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बीमा को निवेश माध्यम ना मानें!

प्रकाशित Sat, 20, 2010 पर 13:32  |  स्रोत : Hindi.in.com

20 नवंबर 2010

सीएनबीसी आवाज़



अपना पैसा डॉट कॉम के हर्ष रूंगटा के मुताबिक कोई भी व्यक्ति अपनी आय के 12 गुना राशि के कवर की ही जीवन बीमा पॉलिसी ले सकता है। अधिक कवर की पॉलिसी लेने में कठिनाई हो सकती है। बीमा कंपनियां मानती हैं कि व्यक्ति की आय कितनी है इस आधार पर व्यक्ति को लाइफ कवर मिलना चाहिए। केवल निवेश के नजरिए से या टैक्स बचाने के नजरिए से बीमा पॉलिसी में निवेश नहीं करना चाहिए।


 


हर्ष रूंगटा का कहना है कि निवेश और बीमा को पूरी तरह अलग-अलग रखना चाहिए। बीमा को निवेश माध्यम नहीं मानना चाहिए। निवेश माध्यमों में ईएलएसएस, बैंक सेविंग स्कीम, म्यूचुअल फंड अच्छे साधन हैं और बीमा के लिए टर्म प्लान में पूंजी लगाने की सलाह दी जाती है जिससे आपको जोखिम पर कवर की सुविधा मिल सके।


हर्ष रूंगटा के अनुसार यूलिप एक ऐसा माध्यम है जिसे इंश्योरेंस के साथ निवेश विकल्प भी माना जाता है क्योंकि इसमें फिलहाल टैक्स छूट मिल रही है। हर्ष रूंगटा के मुताबिक अगर 10 साल के लिए यूलिप में बने रहते हैं तो ज्यादा फायदेमंद रहेगा क्योंकि ये बाजार के आधार पर रिटर्न देती हैं। पिछले 15 सालों में निफ्टी इंडैक्स ने 16 फीसदी का रिटर्न दिया है।


हालांकि एक बात का ख्याल रखना चाहिए कि डीटीसी लागू होने के बाद यूनिप निवेश पर मिलने वाली टैक्स छूट समाप्त की जाने की संभावना है।



हर्ष रूंगटा का कहना है कि फैमिली फ्लोटर लेने से इंडीविजुएल पॉलिसी लेना बेहतर है। फैमिली फ्लोटर में पॉलिसी कॉस्ट कम होती है लेकिन इसमें फ्लेक्सिबिलिटी भी कम होती है। अगर पॉलिसी लेने वाला ना रहे तो फैमिली फ्लोटर होने की वजह से परिवार के बाकी सदस्यों के ऊपर से भी लाइफ-कवर की छाया हट जाती है। इसके अलावा फैमिली फ्लोटर के तहत बच्चों के वयस्क होने के बाद अलग से लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेनी ही पड़ती है।


इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए परिवार के सभी सदस्यों के लिए इंडीविजुएल पॉलिसी लेना बेहतर रहता है।



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