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अच्छी सुविधा के लिए मिनिमम बैलेंस चार्ज जरुरीः अरुंधति भट्टाचार्य

प्रकाशित Fri, 10, 2017 पर 18:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एसबीआई चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने मिनिमम बैलेंस चार्ज पर सफाई दी है। सीएनबीसी-आवाज़ के बैंकिंग एडिटर प्रदीप पंड्या से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने कहा कि ग्राहकों को अच्छी सुविधा देने के लिए ये चार्ज लगाना जरूरी है।


मिनिमम बैलेंस चार्ज पर बात करते हुए अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि निजी बैंकों के चार्ज काफी कम हैं और यह ग्राहकों को अच्छी सुविधा के लिए जरुरी है जिसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 और मेट्रो में 5000 मिनिमम बैलेंस रखा गया हैं। हालांकि जनधन खातों में मिनिमम बैलेंस चार्ज नहीं लगेगा।


नोटबंदी के बाद बैंकों में कैश की सप्लाई पर बात करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि मौजूदा समय में कई राज्यों में कैश की सप्लाई कम हैं लेकिन  सभी राज्यों में कैश की सप्लाई बढ़ेगी। कैश निकालने पर अभी ज्यादा पाबंदी नहीं हैं। वहीं छोटे नोट की कमी को लेकर अरुंधति भट्टाचार्य का कहना है कि 2000 रुपये के नोट की तुलना में लोग छोटे नोट ज्यादा निकाल रहे हैं और 500 रुपये के नोट की सप्लाई बढ़ी हैं। हालांकि छोटे नोट की दिक्कत जल्द खत्म करने की कोशिश की जा रही हैं।


अरुंधति भट्टाचार्य का कहना है कि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कैश ट्रांजैक्शन चार्ज लेना जरुरी हैं। हालांकि कैश ट्रांजैक्शन में काफी खर्च लगता है लेकिन कैश ट्रांजैक्शन का बोझ सरकार उठाती है। खाता धारको के बैंक खाते से क्रेडिट हिस्ट्री बनती है और बैंक खाता होने से लोन लेने में आसानी से मिलता हैं। डिजिटल लेनदेन में ज्यादा कमी नहीं आई हैं। एटीएम के बजाय अब पीओएस पर ज्यादा लेनदेन होने लगी हैं।


कार्ड पेमेंट पर चार्ज किए जा रहे एमडीआर पर बात करते हुए अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि 2000 से ज्यादा भुगतान पर 1 फीसदी चार्ज और उससे कम भुगतान पर 0.5 फीसदी चार्ज लिया जा रहा हैं। कैश लेनदेन में काफी खर्च होता है। कार्ड से लेनदेन में सुविधा ज्यादा है और इसके जरिए हिसाब रखने में आसानी होगी। मौजूदा समय में बैंकों के लिए फ्री सर्विस देना मुश्किल हैं।


डिजिटल लेनदेन में मिलेगी छूट? इस सवाल पर अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि डिजिटल लेनदेन में ज्यादा सब्सिडी मुमकिन नहीं हैं। लेकिन डिजिटल लेनदेन की लागत कम करने की कोशिश की जा रही हैं।


एसबीआई के वीआरएस स्कीम के बारे में बताते हुए अरुंधति भट्टाचार्य का कहना था कि वीआरएस स्कीम ज्यादा उम्र वाले कर्मचारियों को मिलेगी और यह सभी स्तर के कर्मचारियों को मिलेगी। इसका फायदा 10-12 फीसदी कर्मचारियों को मिलेगा। हालांकि इस स्कीम के लिए किसी पर जोर नहीं डालेंगे। वीआरएस स्कीम एसोशिएट बैंकों के लिए आएगी और सभी बैंकों के लिए एक ही स्कीम लाई जायेगी।


आने वाले समय में बैंक की ग्रोथ पर बात करते हुए अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि फिलहाल बैंक को पूंजी की जरूरत नहीं हैं लेकिन बैंक की ग्रोथ के लिए पूंजी जुटाएंगे। ताकि आने वाले समय में ग्रोथ तेज होगी। अगली तिमाही में मर्जर हो जाएगा और मर्जर के बाद ही पूंजी जुटाएंगे।