मोदी और शाह, सियासत की जोड़ी नंबर-1 -
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मोदी और शाह, सियासत की जोड़ी नंबर-1

प्रकाशित Sat, 11, 2017 पर 18:40  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

यूपी और उत्तराखंड में मोदी की सुनामी के पीछे अमित शाह की ताकत से भला कौन इंकार कर सकता है। लेकिन उत्तर प्रदेश की जीत के बड़े मायने देखे गए हैं। और इस चुनाव के बाद तय हो गया है कि मोदी और शाह की जोड़ी भारत की राजनीति में अब तक की सबसे सुपरहिट जोड़ी है।


उत्तर प्रदेश में तीन चौथाई बहुमत, बीजेपी ही नहीं, संघ परिवार और उसकी विचारधारा से सहमति रखने वालों के लिए सपनों के सच होने जैसा है। इसके साथ ही मोदी और शाह की जोड़ी ने भारत की चुनावी सियासत में सबसे बड़ी लकीर भी खींच दी। अटल-आडवाणी के दौर में बनी ये जोड़ी राजनीति में तीसरा दशक पूरा करेगी।


1995 में जब केशुभाई पटेल के नेतृत्व में गुजरात में बीजेपी की पहली सरकार बनी थी, उस वक्त शाह और मोदी की जोड़ी राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में नंबर दो लीडरों की तलाश कर रहे थे, ताकि कांग्रेस के वर्चस्व को जड़ से खत्म किया जा सके। इसी रणनीति पर काम करते हुए इन दोनों ने गुजरात में को-ऑपरेटिव बैंकों और खेल संघों से कांग्रेस का सफाया किया। 2001 में जब नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया तो अमित शाह को मंत्री बनाया गया। 2002, 2007 और 2012 में गुजरात के चुनाव इसी जोड़ी ने जीते।


मोदी को सार्वजनिक तौर पर अपना बॉस मान चुके शाह, संगठन संभालते हैं और मोदी प्रशासन। इसी फॉर्मूले के तहत 2014 के लोकसभा चुनावों में शाह ने अपने लिए उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटें जीतने की कठिन चुनौती स्वीकार की और उनमें से 73 सीटें जीतकर मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का रास्ता तैयार किया। कहते हैं मोदी के मुख्यमंत्री बनने से भी पहले शाह ने कहा था कि नरेंद्रभाई एक दिन आप देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।


बीजेपी की सरकार बन गई, प्रचंड बहुमत के साथ मोदी प्रधानमंत्री बन गए, लेकिन राज्यसभा में अल्पमत की फांस ने कई फैसलों पर मोदी को कदम वापस खींचने के लिए मजबूर किया। जाहिर है ज्यादा से ज्यादा राज्यों में बहुमत हासिल किए बगैर राज्यसभा में बहुमत संभव नहीं था। इसलिए राज्यों के चुनाव में जीत मोदी सरकार का सबसे बड़ा एजेंडा बन गई। मोदी इसके पोस्टर ब्वॉय बनाए गए तो शाह प्रमुख रणनीतिकार।


इस बीच 2012 के गुजरात चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी के टेक्नो सलाहकार रहे प्रशांत किशोर किनारे लग गए और अमित शाह बीजेपी के अध्यक्ष बन गए। अमित शाह और मोदी की जोड़ी ने 2014 में हुए चारों राज्यों के चुनाव जीते और बीजेपी की सरकार बनवाई। लेकिन 2015 में पहले दिल्ली और फिर बिहार के चुनाव में करारी मिली। लोग कहने लगे कि मोदी का जादू उतर चुका है और शाह की रणनीति पर प्रशांत किशोर भारी पड़ गए।


फिर 2016 में पांच ऐसे राज्यों में चुनाव हुए जहां बीजेपी की कोई खास पहचान नहीं थी। लेकिन असम में बीजेपी ने ना सिर्फ सरकार बनाई बल्कि दिल्ली और बिहार की हार से निराश काडर और समर्थकों में जोश भर दिया। लेकिन उत्तर प्रदेश की बात ही अलग है। कहा जाता है कि देश पर राज करने का असली लाइसेंस यूपी देता है। एक तो यूपी की बड़ी चुनौती ऊपर से नोटबंदी का भार। हवा यही बनाई गई कि नोटबंदी से जनता नाराज है। लेकिन ये आशंकाएं हवा हो गईं और कुछ ऐसी हवा उड़ी कि केसरिया गुलाल के सामने सारे रंग एकदम फीके पड़ गए। एक बार फिर साबित हुआ मोदी-शाह की जोड़ी है सुपरहिट।