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उत्तराखंड, गोवा में सरकार बनाने की कोशिशें तेज

प्रकाशित Sun, 12, 2017 पर 11:40  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

यूपी के अलावा उत्ताखंड और गोवा में भी कोशिशें तेज हो गई है। उत्तराखंड में जहां भारतीय जनता पार्टी के सीएम पद के लिए आज नाम पर अंतिम फैसला लेगी, वहीं गोवा में सरकार बनाने लिए पार्टी में सभी तरह के सियासी समीकरण बैठाने की कोशिश कर रही है।


गोवा के चुनावी नतीजों में भले ही भारतीय जनता पार्टी दूसरे नंबर पर रही हो, लेकिन प्रदेश में उसकी सरकार बन सकती है। राज्य में 13 सीटें जीतने वाली भाजपा, रविवार को ही सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। सूत्रों का दावा है कि बीजेपी को छोटी पार्टियों और कुछ निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल गया है। इसके साथ ही ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मौजूदा रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की गोवा के सीएम के रूप में वापसी हो सकती है।


रविवार को गोवा के बीजेपी नेता राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मिलने का समय मांगेंगे। इसके साथ ही वो राज्यपाल को समर्थन की चिट्ठी भी सौंप सकते हैं। चुनाव में 3-3 सीट हासिल करने वालीं महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी और गोवा फॉर्वर्ड फ्रंट के अलावा 2 निर्दलीय के समर्थन से बीजेपी दावा पेश कर सकती है। कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी इस सिलसिले में गोवा पहुंच गए हैं। साथ ही ऐसा माना जा रहा है कि गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे मनोहर पर्रिकर फिर सीएम पद संभाल सकते हैं।


खुद पर्रिकर ने भी चुनावी नतीजों के बाद इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी जो तय करती है उससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा और जो पार्टी कहेगी उसे मैं मानूंगा। इसके साथ ही पर्रिकर ने कहा है कि भले ही बीजेपी को स्पष्ट बहुमत न मिला हो लेकिन प्रदेश में उनकी सरकार बनने की पूरी उम्मीद है।


उधर राज्य में सबसे ज्यादा 17 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने भी राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। इससे ये साफ है कि कांग्रेस भी राज्य में सत्ता पर काबिज होने की पेशकश करेगी। गौरतलब है कि 40 सीटों की गोवा विधानसभा में, सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी तो 21 सीटों का बहुमत हासिल करना होगा।


वहीं उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार बनना तो तय हो गया है, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसको तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री की रेस में त्रिवेंद्र सिंह रावत, सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूरी और रमेशचंद्र पोखरियाल के नाम आगे बताये जा रहे हैं।