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ब्रांड बाजारः ब्रांड्स ने बदला महिलाओं को दिखाने का अंदाज

प्रकाशित Sun, 12, 2017 पर 13:15  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पिछले एक दो साल में दुनीयाभर में महिलाओं  को जिस तरह से विज्ञापनों में दिखाया जाता है, इसको लेकर नजरिया बदला है। एजेंसियां और ब्रांड दोनों ही समान अधिकारों की बात कर रहे हैं और महिलाओं के ऑब्जेक्टिफिकेशन से दूर हो रहे हैं। महिलाओं को लेकर कई चीजें ऐसी हैं जिनके बारे मे सालों से ये मान लिया गया की महिलाएं ही करेंगी। या कई ऐसे काम हैं जो सोच लिये गये हैं की महिलाएं नहीं कर सकती। और हमारी फिल्मों से लेकर विज्ञापनों तक सभी ने इनहीं विचारों पर काम किया और किसी ने इसे चुनौती नहीं किया। लेकिन पिछले 2 साल में कुछ कंपनियों ने ये शुरूआत की और ऐसे कैंपेन आए जो लोगों की सोच बदलने के लिए बनाए गए।


इन सब में सबसे प्रभावशाली रहे पी एंड जी का लाइफ ए गर्ल्स, डव ब्यूटी स्केच, कवच के तहत अंडर कवच का आई विल व्हाट आई वान्ट। दुनिया भर में आए इस बदलाव का असर अब हमारा देश में दिख रहा है। महीलाओं को लेकर बने रूढ़िवादी तोड़े जा रहा हैं। ब्रांड बाजार के आज के स्पेशल एपीसोड में हम एसे ही कुछ कैंपेन और विज्ञापनों के बारे में बात करेंगे और जांनेंगे इंडस्ट्रीज की कुछ महिलाओं की इन पर राय।


कपडे धोना महिलाओं का काम है। ये बात महिलाएं सालों से सुनती आ रही हैं। और वॉशिंग पाउडर के विज्ञापनों में हर बार सालों से इस बात जोर दिया गया। लेकिन अब यही ब्रांड्स महिलाओं से जुड़े इस स्टीरियोटाइप को तोड़ने की कोशिश में जुटी हैं। जैसे निरमा का ये विज्ञापन, महिला शक्ति का अहम संदेश देता है। इस विज्ञापन में महिलाएं कपडे धोती नहीं बल्कि दलदल में फसी गाड़ी को निकालते हुए दिखाइ दे रही हैं। इस विज्ञापन में महिलाओं को होम- मेकर्स से बढ़कर चेंज- मेकर्स के तौर पर दिखाया गया है।


लेकिन इससे भी असर दार और बात को सीधे अंदाज में कहता नजर आया एरियल - शेयर द लॉड - इस सीरीज के विज्ञापनों में कहीं बड़े सहज अंदाज में तो कहीं एक संदेश देने की नीयत के साथ ये साफ कर दिया गया की कपड़े धोना सिर्फ औरतों का काम नहीं है। घर-घर के स्टीरियोटाइप पर सवाल उठाते हुए इस सीरीज के जरिए कुछ और अहम सवाल जैसे - क्या घर का और घर के लोंगों का ख्याल रखना केवल महिलाओं का काम है, भी उठाए गए। और साथ ही मर्दों को महिलाओं का हाथ बटाने के लिए प्रेरिरत किया गया। बीबीडीओ इंडिया के बनाए इन कैपेन्स को बानाया और ऐजेंसी को कान्स में ग्लास लायन भी मिला।


कुछ ऐसा ही था डाबर वाटिका हेयर ऑयल का ब्रेव एंड ब्यूटिफूल कैंपेन। हेयर ऑइल ब्रांड अकसर सिर्फ महीलाओं की खुबसुरती को दर्शाते हुए सुंदर घने लंबे बालों की बात करते हैं। पर डाबर वाटिका हेयर ऑयल का ब्रेव एंड ब्यूटिफूल महिला कैंसर सवाइवर की स्ट्रगल पर फोकस करता है। खासकर वो महिलाएं जो अपने सारे बाल कीमोथेरेपी में गवा देती हैं। इस विज्ञापन में ऐसी ही एक महिला है। सामज में लोगों की नजरों और सोच से परेशनी में है की कैसे बाहर कदम रखें। लेकिन उसे अपनी पति और ऑफिस में लोगों का सपोर्ट मिलता है। एक हेयर ऑयल ब्रांड के लिए ऐसा कैंपेन करना अपने आप में एक बोल्ड मुव था। ये कैंपन अगर आत्मविश्वास जगाता है तो यूनाइटेड बीहाफ विश्वास दिलाता है की हम मर्दो के साथ बराबरी के हिस्सेदार हैं। इस साल वैलेंनटाइन डे पर लांच हुए इस विज्ञापन ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। यूनाइटेड कलर ऑफ बेनेटटन का ये नया कैंपेन देश में इस मुद्दे को एक नई दिशा और उचाईं दे रहा है। यूनाइटेड बीहाफ नाम का ये कैम्पेन लड़कियों को लड़कों का इक्वल पार्टनर होने की बात पर जोर देता है।


जहां एक तरफ महिलाएं घर की जिम्मेदारियों में मर्दो के साथ कदम से कदम मिला रहीं हैं वहीं दुसरी ओर उनहें असमानता से देखा जाना आज भी देश में एक बड़ी समस्या है। इसी तर्ज पर बना है अनूक का ये कैंपेन। 2.26 मिनट की इस फिल्म में एक गाड़ी में बैठी एक महिला अपनी बॉस से बातचीत कर रही है। राधिका जो शाहीन का किरदार निभा रहीं है वो गर्भवती हैं। और उनकी बॉस उमा उनकी जैकेट को बधाई करती हैं और कहती हैं के जैकट उनके बेबी बम्प को अच्छे से छुपाता है। शाहीन विशय उठाती हैं के किस तरह से उनकी प्रेग्नेंसी उन्हें प्रमोशन और असाइनमेंट  ना मिलने का कारण बन गई है। उमा मैनजमेंट पर इसका इलजाम डालते हुए ये कहती हैं की ये उनका निर्णय था। इस बात पर उनकी बॉस उन्हे प्रेग्नेंसी के बाद अगले साल वापिस आकर प्रमोशन क्लेम करना ये ऑफर करती है। तो शाहीन गाड़ी से निकलकर अपना नया ऑफिस दिखाती हैं और ये कहती हैं के वो खुदका स्टा्रटअप शुरु कर रही हैं।


वुमेन आंत्रप्रेन्योर को सलाम करते भी कई कैम्पेन्स आए और ज्वेलरी और एक्सेसरीज के ब्रांड जो पहले महिलाओं की ब्यूटी और शादी पर विज्ञापन बनाते थे अब उनहें एक नए अवतार में दिखा रहे हैं। लॉ का ये वीडियो निलोफर बाय तनिष्क एक यंग वुमेंन आंत्रप्रेन्योर की कहानी बयान करता है जिसे अपनी कामयाबी के लिये सराहा गया है। यही महिला अपनी थैंक्स स्पीच में ये कहती है की महिला होते हुए सॉरी स्पीच  उसके लिए आसान बात होती क्यों की उसे ये कभी घर पर और कभी ऑफिस में बोलने की आदत पड़ गई है। पर आज थैंक्स यू बोलना है तो थोड़ी घबराहट हो रही है।


ब्रांड तनिष्क ने कई और ऐसे विज्ञापन बनाए जिनहोंने महिलाओं से जुड़े अलग अलग मुद्दे उठाये। तनिष्क का रीमैरिज कैंपेन कंज्युमर में काफा हीट रहा। अपनी मिया रेंज के लिए तनिष्क लाया मिया एट विक। जिसमें ये दिखाया गया की महिलाएं दफ्तर में किस तरह तैयार होकर आएं इस पर बात की गई। यही नहीं उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग उनहें अतिरेक समझें।


तनिष्क की बदली हुइ सोच से कइ और ब्रांड भी प्रेरित हुए और वो महिलाओं की आजा़दी और सश्कितकरण की बात करने लगे। पीसी ज्वेलरी ने कैंपेन निकाला नए जमाने के हिरे। इस विज्ञापन को बनाया सोहो स्क्वायर ने और इसमें एक पार्टी में दो पति- पत्नी एक दुसरे को नमस्कार करते हुए दिखाइ दिये। जहां एक का पती निवेश बैंकर है और ऐसा दिखाया गया है की उसके लिये डायमंड इयरिंग अफॉर्ड करना कोइ बड़ी बात नही। वहीं दुसरा पति ये कहता है की उसने छ महीने से नौकरी छोड़ी हुई है और वो घर पर बैठा है और उसकी पत्नी घर चला रही है। हर विज्ञापन ने कोई न कोई मुद्दा उठाया है और उसे बधूबी अपने ब्रांड के साथ जोड़ा है। ब्रांड्स की ये कोशिश काफी हद तक कारगर भी साबित हुई है।