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आवाज़ अड्डाः सबसे बड़ी पार्टी फिर भी सत्ता नहीं, हाथ से फिसले गोवा और मणिपुर

प्रकाशित Tue, 14, 2017 पर 21:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दूसरी बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी गोवा में सरकार बनाने में कामयाब हुई है। मणिपुर में भी बीजेपी को राज्यपाल से सरकार बनाने का न्यौता मिल चुका है। सदमे में आई कांग्रेस पार्टी ने गोवा में बीजेपी के सरकार बनाने की कोशिशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई खास राहत नहीं मिली है। कांग्रेस अब बीजेपी पर अनैतिक तरीकों से लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगा रही है।


मनोहर पर्रिकर के चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही गोवा में कांग्रेस का सरकार बनाने का सपना टूट गया है। मनोहर पर्रिकर के शपथ पर रोक लगाने की मांग लेकर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट गई। लेकिन कांग्रेस को वहां से भी सिर्फ फटकार ही मिली।


सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस से पूछा कि अगर उसके पास संख्या बल है तो वो राज्यपाल के पास क्यों नहीं गए। कोर्ट ने पूछा कि क्या उनके पास बहुमत का आंकड़ा है भी? गोवा की गवर्नर मृदुला सिन्हा ने मनोहर पर्रिकर को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मनोहर पर्रिकर को दो दिन में बहुमत साबित करने को कहा। अब 16 मार्च को मनोहर पर्रिकर का शक्ति परीक्षण होगा।


हालांकि दोपहर को दिग्गविजय सिंह कांग्रेस के 17 विधायकों के साथ राज्यपाल से मिलने गए। लेकिन मनोहर पर्रिकर पहले ही राज्यपाल को 21 विधायकों के समर्थन वाली चिट्ठी सौंप चुके थे। लेकिन कांग्रेस की दलील है कि सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उसे मौका मिलना चाहिए था। कांग्रेस ने बीजेपी पर धनबल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी ने करारा पलटवार किया है।


गोवा जैसी कहानी मणिपुर में भी दोहराई जा रही है। वहां भी कांग्रेस 28 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है, लेकिन बीजेपी ने छोटे दलों और निर्दलियों के समर्थन से बहुमत का जुगाड़ कर लिया है। कांग्रेस यहां भी बीजेपी पर पैसे और ताकत के उपयोग का आरोप लगा रही है, लेकिन सवाल यहां भी वही है कि अगर गोवा और मणिपुर में कांग्रेस सबसे पड़ी पार्टी है तो उसने आगे बढ़कर सरकार बनाने का दावा क्यों नहीं किया। क्या कांग्रेस का आलाकमान इंतजार में ही रह गई जबकि बीजेपी बाजी मार गयी।


हालांकि, इससे पहले भी ऐसे कई उदाहरण हैं कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका नहीं मिला है। 2005 में झारखंड की 81 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 30 सीटें जीती थी और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी। लेकिन, 17 विधायकों वाले जेएमएम को सरकार बनाने का मौका मिला। जेएमएम ने दूसरी पार्टियों के साथ बहुमत का दावा किया था।


2002 में जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन पीडीपी और कांग्रेस ने चुनाव के बाद गठबंधन बनाया। पीडीपी और कांग्रेस गठबंधन को सरकार बनाने का मौका मिला। 2013 में दिल्ली में 31 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन बीजेपी के सरकार गठन करने से इनकार के बाद आम आदमी पार्टी को मौका मिला। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी।


इस बार गोवा में बीजेपी ने अपने 13 विधायकों के अलावा एमजीपी के 3, जीएफपी के 3 और 3 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा किया है। 40 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा में बहुमत के लिए 21 विधायकों की जरूरत है, जबकि बीजेपी को 22 विधायकों का समर्थन हासिल होने का दावा किया जा रहा है।


वहीं मणिपुर में बीजेपी ने अपने 21 विधायकों समेत एनपीएफ के 4, एनपीपी के 4, एलजेपी के 1, टीएमसी के 1 और 1 निर्दलीय विधायक के समर्थन से सरकार बनाने का दावा किया है। 60 सदस्यों वाली मणिपुर विधानसभा में बहुमत के लिए 31 विधायकों की जरूरत है, जबकि बीजेपी को 32 विधायकों का समर्थन हासिल होने का दावा किया जा रहा है।