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ओबामाकेयर की तर्ज पर मोदीकेयर, सबको मुफ्त इलाज की सुविधा

प्रकाशित Thu, 16, 2017 पर 18:38  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

क्या अमेरिका के ओबामाकेयर की तरह हमें भारत में मोदीकेयर मिलने जा रहा है? सरकार ने नई हेल्थ पॉलिसी से पर्दा उठाया है जिसके मुताबिक मुफ्त इलाज का हक हर भारतीय नागरिक को होगा। तो क्या होगा इस पॉलिसी में और इस महत्वकांक्षी योजना को कैसे अमल में लाया जाएगा, इस पर हम आज खास चर्चा कर रहे हैं।


दरअसल सरकार ने अमेरिका के ओबामाकेयर की तर्ज पर देश में भी नई हेल्थ पॉलिसी को हरी झंडी दी है। आज सदन में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पॉलिसी की खूबियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अब सबको इलाज मिलेगा और अगर कोई हॉस्पिटल इलाज से इनकार करते हैं तो उसके खिलाफ शिकायत करने के लिए ट्रिब्यूनल बनाया जाएगा। जे पी नड्डा ने कहा कि नई पॉलिसी मरीजों को सशक्त बनाएगा और इलाज के टेंशन को कम करेगा। उन्होंने इसे पहले की पॉलिसी से पूरी तरह अलग बताया।


सरकार की नई हेल्थ पॉलिसी में प्रीपेड हेल्थकेयर सर्विस की सुविधा दी जाएगी। सस्ती दर पर सबको बेहतर इलाज की सुविधा दी जाएगी। सभी लोगों की डायबिटीज और ब्लडप्रेशर की जांच की जाएगी। नई हेल्थ पॉलिसी के तहत मरीज को इलाज करने के लिए एक रकम दी जाएगी। सरकार का नई हेल्थ पॉलिसी के जरिए मातृ और शिशु मृत्यु दर घटाने पर ध्यान है। इसके योजना के तहत सरकार की ओर से हॉस्पिटल में दवाइयां पहुंचाई जाएंगी और सभी हॉस्पिटल में जांच के उपकरण मिलेंगे।


सरकार की हेल्थ सेक्टर में डिजिटाइजेशन को बढ़ावा देने की योजना है। इसके अलावा जिला अस्पताल सरकारी नियंत्रण से बाहर किए जाएंगे। प्राथमिक चिकित्सा को मजबूत करने पर जोर है, और इसके लिए मुफ्त दवा और मुफ्त जांच की सुविधा दी जाएगी। सरकार का 2017 के अंत तक कालाजार का खात्मा करने का लक्ष्य है। साथ ही 2025 तक दृष्टिहीनता 25 फीसदी तक घटाने का लक्ष्य है।


नई हेल्थ पॉलिसी से सरकारी खजाने पर करीब 3 लाख करोड़ रुपये का बोझ आएगा। स्वास्थ्य पर खर्चा जीडीपी का 2.5 फीसदी हो जाएगा, जबकि अभी स्वास्थ्य पर जीडीपी का 1.05 फीसदी खर्च होता है। इस योजना के तहत इलाज के लिए निजी अस्पताल को राशि मिलेगी।


गौरतलब है कि अभी हेल्थ सेक्टर पर निजी अस्पतालों का दबदबा है। प्राइवेट हेल्थ केयर इंडस्ट्री करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की है और निजी सेक्टर का 70-80 फीसदी बाजार पर कब्जा है। सिर्फ 20 फीसदी लोग ही सरकारी इलाज पर निर्भर हैं। हेल्थ सेक्टर में सालाना निवेश सिर्फ 12,500 करोड़ रुपये का होता है। नई हेल्थ स्कीम में खर्च का अनुपात पहले की तरह 60:40 का होगा। राज्य और केंद्र मिलकर खर्च उठाएंगे। पहाड़ी राज्यों में खर्च 90 फीसदी हिस्सा केंद्र वहन करेगा। नई हेल्थ पॉलिसी पर किसी तरह का सेस नहीं लगेगा।


यही नहीं सरकार की जरूरी दवाओं के दाम करने का प्रयास भी जारी है। जन औषधि और अमृत सेंटर के जरिए दाम कम होंगे। सरकार ने पिछले 2 साल में स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाया है। आने वाले समय में सरकार की 1.5 लाख सब हेल्थ सेंटर को वेलनेस सेंटर में बदलने की योजना है। इस साल 22,000 वेलनेस सेंटर में बदलने का लक्ष्य है। बताना चाहेंगे कि हेल्थकेयर के हिसाब से भारत काफी आकर्षक देश है और दुनिया का दूसरा सबसे आकर्षक देश है।