डंपिंग की मार, देसी बाजार में घुसी चीन की सुई -
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डंपिंग की मार, देसी बाजार में घुसी चीन की सुई

प्रकाशित Sat, 15, 2017 पर 13:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

स्टील जैसे बड़े आइटम ही नहीं बल्कि सिलाई मशीन की सूई, मछली पकड़ने वाले नेट तक का देश में औने पौने दाम पर इंपोर्ट हो रहा है। आलम ये है कि इन आइटम को बनाने वाली घरेलू इंडस्ट्री को अपने माल के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। अब सरकार इन छोटे मोटे आइटम के इंपोर्ट पर भी भारी ड्यूटी लगाने की तैयारी में है।


सिलाई मशीन से तैयार होने वाले कपड़ों की छोड़िये, इनमें इस्तेमाल होने वाली सुई तक चीन से इंपोर्ट हो रही है। वो भी इतने कम दाम पर कि देसी कंपनियां इनका मुकाबला नहीं कर पा रही हैं। देसी सुई की कीमत जहां करीब 1.5 रुपये होती है वहीं चीनी सुई चंद पैसे में आ जाती है। एक समय ऐसा भी आया जब टीवीएस सिविंग नीडल्स को अपना प्रोडक्शन बंद करना पड़ गया। एलटेक बिसेल लिमिटेड जैसे तैसे मुश्किल से अपना प्रोडक्शन कर पा रही है।


सिर्फ सिलाई मशीन की सुई ही नहीं बल्कि कपड़े का नाप लेने वाला टेप भी थाईलैंड, मलेशिया, वियतनाम जैसे देशों से इंपोर्ट हो रहा है। अब उद्योग मंत्रालय ने इस टेप पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की है।


सस्ते इंपोर्ट की कहानी यहीं नहीं रुकती है। मछली पकड़ने वाले जाल यानी फिशिंग नेट चीन और बांग्लादेश से आ रहा है। इसका भी इंपोर्ट होगा ये सरकार ने सोचा भी नहीं था। शायद यही वजह है कि इस प्रोडक्ट के इंपोर्ट के लिए कोई कोड भी तय नहीं किया गया है।


एक और चौंकाने वाला प्रोडक्ट है ताश का पत्ता यानी प्लेइंग कार्ड्स। इसे बनाने वाली कंपनियां जैसे पार्कसंस ग्राफिक्स और टी एम प्रिंटर्स को जब ये लगा कि सस्ते इंपोर्ट से वो मुकाबला नहीं कर पाएंगी तो सरकार से इस पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने की गुहार लगाई। फिलहाल सरकार मामले की जांच कर रही है।