आवाज अड्डाः बाबरी केस में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, क्या भरेंगे घाव! -
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आवाज अड्डाः बाबरी केस में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, क्या भरेंगे घाव!

प्रकाशित Wed, 19, 2017 पर 21:14  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एल के आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोषी सहित 13 लोगों पर अब बाबरी मस्जिद को गिराने के षड़यंत्र के आरोप में केस चलेंगे। 25 सालों से चल रहे कानूनी मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। अब से 4 हफ्तों में इस केस की रोजाना सुनवाई होगी औऱ 2 साल के अंदर निचली अदालत को फैसला सुनाना है। ये अहम फैसला ऐसे समय पर आया है जब सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर मामले में दोनो पक्षों से आम सहमति बनाने की गुहार लगा चुका है।


बाबरी केस में 25 सालों से चली आ रहा अदालती और कानूनी दांव-पेंच में आज एक और नया मोड आया। देश की सबसे बड़ी अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 13 लोगों पर धारा 120 बी के तहत आपराधिक षडयंत्र का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। राज्यपाल होने की वजह से कल्याण सिंह पर फिलहाल केस नहीं चलेगा। इन सभी पर बाबरी मस्जिद गिराने के लिए कार्यकर्ताओं पर उकसाने का आरोप है।


सुप्रीम कोर्ट ने 2 साल के अंदर इस केस को निपटाने के भी आदेश दिए है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सियासी भूचाल आना लाजमी था। केंद्र सरकार में मंत्री उमा भारती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देने में जरा भी देरी नहीं की ,उन्होंने कहा कि जो हुआ खुल्लम खुल्ला हुआ और वो राम मंदिर के लिए कोई भी सजा भुगतने को तैयार है।  विनय कटिया भी उमा भारती के सुर से सुर मिलाते दिखे।


कोर्ट ने ये भी कहा है इस दौरान सुनवाई कर रहे जज का ट्रांसफर न किया जाए। इसके अलावा कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया है कि सुनवाई के दौरान उनका वकील कोर्ट में मौजूद रहे। इधर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी दलों ने तुरंत उमा भारती का इस्तीफा मांग लिया फिर क्या था उमा भारती के इस्तीफे की विपक्ष की मांग को सरकार ने तुरंत खारिज कर दिया।


गौरतलब है कि दिसंबर 1992 को बाबरी केस में 2 एफआईआर दर्ज की गई थी। पहली एफआईआर में अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ मस्जिद ढहाने का आरोप था। तो दूसरी एफआईआर में आडवाणी, जोशी, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतम्भरा और अन्य लोगों के नाम दर्ज किया गया था। इन सभी पर मस्जिद ढहाने के लिए भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया था जिसकी सुनवाई लखनऊ कोर्ट में हुई थी। लोअर कोर्ट ने आडवाणी, जोशी सहित 13 नेताओं से साजिश का आरोप हटा दिया था और उस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। जिसके बाद सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसके बाद मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट ने आडवाणी, जोशी सहित 13 नेताओं आपराधिक साजिश का केस चलाने का फैसला सुनाया है।


अयोध्या विवाद के इतिहास पर नजर डाले तो सन 1528 में बनी बाबरी मस्जिद पर 1853 में अंग्रेजों के शासनकाल में पहली बार दंगे शुरु हुए थे और सन 1859 में अंग्रेजों ने ही विवादित स्थल पर बाड़ लगाते हुए भीतरी हिस्से में मुसलमानों और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना की इजाज़त दे दी थी। उसके बाद सन 1949 में मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियां पाई गईं। फिर दोनों पक्षों ने मुकदमा दायर कराया और विवादित स्थल पर ताला लगा। साल 1984 वीएचपी की अगुवाई में राम मंदिर निर्माण के लिए समिति का गठन किया गया और 1986 में डीएम ने पूजा के लिए विवादित स्थल का ताला खोलने का आदेश दिया। जिसके बाद मुसलमानों के विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति बनाई गईं। तब जाकर सन 1989 वीएचपी ने विवादित स्थल के पास राम मंदिर की नींव रखी।
 
सन 1992 में 6 दिसंबर को विवादित ढांचा गिराया गया और जनवरी 2002 में विवाद सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी ने अयोध्या समिति बनाई है और फरवरी 2002 में वीएचपी ने 15 मार्च से राम मंदिर निर्माण शुरू करने की घोषणा की थी। जिसके 2 दिन पहले यानि 13 मार्च 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में यशास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2003 में विवादित स्थल पर पूजा पाठ की इजाजत देने की केंद्र की अपील ठुकराई। अप्रैल 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर पुरातत्व विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई शुरू की और खुदाई की रिपोर्ट में मंदिर से मिलते-जुलते अवशेष मिलने का दावा किया गया।


जिसके बाद मई 2003 में सीबीआई ने आडवाणी समेत 8 लोगों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। आडवाणी ने अप्रैल 2004 में अयोध्या में पूजा कर मंदिर निर्माण का संकल्प किया और 30 जून 2009 को लिब्रहान आयोग ने 17 साल बाद पीएम मनमोहन सिंह को रिपोर्ट सौंपी और इस रिपोर्ट को संसद के दोनों ही सदनों में पेश किया गया। सितंबर 2010 में हाईकोर्ट ने विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया जिसपर साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई दी।


सीबीआई की दलील है कि आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत 13 लोगों पर आपराधिक साजिश का केस चलाएं जाये। हालांकि इस केस से जुड़े कई बड़ी हस्तियों का निधन हो चुका है जिनमें बाल ठाकरे, गिरिराज किशोर, अशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ और परमहंस राम चंद्र जैसे नाम शामिल है।


सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह पर जब तक पद पर हैं तब तक उनपर केस दर्ज नहीं होगा लेकिन इस फैसले के बाद विपक्ष कल्याण सिंह पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा सकती है। वहीं राष्ट्रपति की दौड़ में शामिल लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के दावेदारी को झटका लग सकता है।


फैसले के बाद तारीखों में कैद बाबरी मस्जिद केस को एक और तारीख  मिल गई है। बाबरी केस में इंसाफ की आस जरूर बढ़ी है लेकिन इसके सियासी नफे नुकसान का भी पार्टियों ने समीक्षा शुरू कर दी है।