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आवाड अड्डाः बीएसएफ से बर्खास्त तेजबहादुर, सच बोलना पड़ा मंहगा!

प्रकाशित Thu, 20, 2017 पर 20:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हमारी सेना और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान हर भारतीय के लिए गर्व के प्रतीक है। उनकी बहादुरी और बलिदान की हम हमेशा दाद देते है। लेकिन जब एक बीएसएफ जवान अपनी नौकरी का जोखिम उठाकर जवानों के साथ हो रहे अन्याय को उजागर करता है तो बजाय उसकी शिकायत पर गौर करने के उसे नौकरी से ही बर्खास्त कर दिया जाता है।


बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव जम्मू के पास बार्डर पर तैनात थे। इस दौरान उन्होंने जवानों को मिल रहे खराब खाने का वीडियो बनाया और उसे फेसबुक पर डाल दिया। ये खुलासा तेज बहादुर को महंगा पड़ा। पहले उसे दिमागी तौर पर बीमार बताने की कोशिश हुई, फिर आदतन अनुशासनहीन बताया गया। आखिरकार कोर्ट ऑफ इनक्वारी के बाद नौकरी से निकाल दिया गया। पेंशन पर भी रोक लगा दी गयी है। तेज बहादुर ने अब इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।


खराब क्वालिटी के खाने की शिकायत बीएसएफ जवान तेजबहादुर को महंगी पड़ गई। उन्हें इसकी कीमत अपनी नौकरी गंवा कर देनी पड़ी। अनुशासनहीनता के आरोप में बीएसएफ ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। 49 साल के तेजबहादुर को पेंशन भी नही मिलेगा। बीएसएफ का कहना है कि खराब खाने की शिकायत का विडियो बनाकर और सार्वजनिक करने से तेजबहादुर ने संस्था की छवि खराब कर दी है।
 
इधर गांव पहुंचे तेजबहादुर का जोरदार स्वागत हुआ। उन्होंने एलान भी कर दिया कि उनके साथ इंसाफ नहीं हुआ है और वो आखिरी सांस तक इंसाफ के लिए लड़ेगे।


पूरा विवाद 9 जनवरी को तेज बहादुर के फेसबुक वॉल पर वीडियो से शुरू हुआ था। वीडियो में उन्होंने सीमा पर जवानों की दयनीय स्थिति के बारे में बताते हुए दिखाया था कि कैसे खराब क्वालिटी का खाना उन्हें दिया जाता है। तेज बहादुर ने अपने सीनियर अफसरों पर जवानों के हक के खाने को बेचने का भी संगीन आरोप लगाया था।


बर्खास्त होने के बाद तेज बहादुर ने कहा कि काफी दिनों से ये प्रकिया चल रही थी, लेकिन मेरी लड़ाई जारी रहेगी। मैंने भी भगत सिंह की तरह अंधे बहरों को जगाने के लिए ये बम फोड़ा था। अगर इस मामले सरकार किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं करती तो वो अदालत जाएंगे।


इतना ही नहीं तेज बहादुर ने कहा कि जवान वेतन और सुविधाओं में बढ़ोतरी नहीं चाहते लेकिन बस अच्छा खाना और वक्त पर छुट्टियां मिलनी चाहिए। तेज बहादुर ने आगे कहा कि उन्हें पहले पेंशन और रिटायरमेंट के कागजात तैयार करने को कहा गया और फिर बाद में सीधा बर्खास्त कर दिया गया। मेरे साथ सही तरीके से ट्रायल नहीं किया गया है। मेरे वीडियो डालने के बाद खाने में लगभग 70 फीसदी तक सुधार आया है।


तेज बहादुर के आरोपों के बाद मानो भूचाल आ गया। बीएसएफ अपने आप को क्लीन चिट दे रही है लेकिन पूरी जांच अभी होनी है। हालांकि फाइनल रिपोर्ट आने के पहले ही तेज बहादुर को मूंह खोलने की सजा मिल गयी। सवाल यह है कि क्या तेज बहादुर को बहादुरी दिखाने की सजा मिली है।