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किसान है परेशान, मुश्किलों का अंत नहीं!

प्रकाशित Fri, 12, 2017 पर 17:01  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दो सालों के सूखे के बाद आखिरकर इस साल बारिश ने किसानों का साथ दिया। लेकिन किस्मत ने किसानों का साथ नहीं दिया। अच्छे मॉनसून से इस साल तकरीबन सभी फसलों की बंपर पैदावार हुई लेकिन किसानों को फसल के अच्छे दाम तो छोड़िए इतनी भी कीमत नहीं मिली कि वो अपनी लागत निकाल सकें।


गेहूं, गन्ना, तिलहन सभी फसलों का यही हाल है। सबसे ज्यादा मार पड़ी दलहन किसानों पर जिन्होने रिकॉर्ड कीमतों को देखकर जमकर फसल लगाई लेकिन फसल आने पर दलहन के दाम एमएसपी के नीचे आ गए और निचले भावों पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। आखिर किसानों की इस बदहाली का जिम्मेदार कौन है। एमएसपी के नीचे दाम आने पर भी सरकार दलहन की खरीदी क्यों नहीं कर रही है। रिकॉर्ड सरकारी खरीदी के बावजूद गेहूं किसान बेहाल क्यों। अच्छी फसल के बाद भी किसानों के हाथ क्यों खाली हैं। इन तमाम मुद्दों पर आज हम लेकर आए हैं खास पेशकश।


पंजाब सरकार ने 110 लाख टन गेहूं की खरीदारी की है, जबकि हरियाणा सरकार ने 71 लाख टन गेहूं खरीदा है। मध्य प्रदेश सरकार ने 51 लाख टन गेहूं खरीदा है, तो यूपी सरकार ने 30 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया है। हालांकि सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी 1625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन गेहूं का बाजार भाव 1575 रुपये पर आ गया है।


अरहर दाल किसानों की हालत सबसे खराब है। अरहर दाल के भाव एमएसपी से नीचे खिसक गए हैं। 5050 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले बाजार भाव 4000 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। पिछले साल अरहर की एमएसपी 8000-9500 रुपये प्रति क्विंटल थी। इस आलम ये है कि दालों की सरकारी खरीदारी नहीं हो रही है।


वहं अच्छी कीमत की आस में चना किसानों ने होल्डिंग की, लेकिन नाफेड ने अभी तक 20,000 टन चने की खरीद की है। चने की सरकारी खरीद 5326 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर हुई है। चने का उत्पादन 76 लाख टन से बढ़कर 91.2 लाख टन होने की उम्मीद है। वहीं इस साल दालों का कुल उत्पादन 221.4 लाख टन रहने की उम्मीद है।


साल 2016-17 में 202-203 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है। चीनी उत्पादन में कमी की आशंका में फरवरी में दाम बढ़े थे, लेकिन अब भीषण गर्मी के बावजूद चीनी की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। सरकार ने 5 लाख टन ड्यूटी फ्री शुगर इंपोर्ट को मंजूरी दी है।