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आवाज अड्डाः चुनाव आयोग की खुली चुनौती, क्या पाक-साफ साबित होगी ईवीएम!

प्रकाशित Fri, 12, 2017 पर 20:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानि ईवीएम पर विवाद खत्म करने के लिए चुनाव आयोग ने खुली चुनौती दी है। आयोग ने सर्वदलीय बैठक के बाद कहा कि राजनीतिक पार्टियों को मशीनों में टेंपरिंग साबित करने की चुनौती दी गई है। हालांकि ये कब होगा, इसकी तारीख अभी तय नहीं है। लेकिन आयोग ने ये जरूर साफ कर दिया है कि पुरानी मशीनों से अब कोई चुनाव नहीं होगा। भविष्य के सभी चुनाव वीवीपीएटी मशीनों से होंगे यानी ऐसी मशीने, जिनमें वोट डालने के बाद पर्ची निकलेगी।


साढ़े सात घंटे तक चली इस बैठक में चुनाव आयोग ने ईवीएम को टैंपरप्रूफ साबित करने की पुरजोर कोशिश की। सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए नेताओं के सामने प्रेजेंटेशन दिए गए। ये समझाने की कोशिश की गई कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित है। फिर भी आयोग ने कहा कि अगर कुछ नेताओं को लगता है कि गड़बड़ी है तो साबित करें।


ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी पर सबसे ज्यादा बात करने वाली आम आदमी पार्टी ने इस चुनौती को स्वीकार किया है। विधानसभा के भीतर टैंपरिंग का लाइव डेमो करने वाली आप कह रही है कि आयोग की मशीनों में गड़बड़ी साबित की जा सकती है।


आम आदमी पार्टी ही नहीं कई और राजनीतिक दलों को का भी कहना है कि जो संदेह हैं वो दूर होना चाहिए।


विपक्षी पार्टियां ही नहीं बीजेपी भी एक समय ईवीएम पर सवाल उठा चुकी है। ईवीएम के नेता जीवीएल नरसिम्हा राव तो 2009 डेमोक्रेसी एट रिस्क, कैन वी ट्रस्ट आवर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन नाम की किताब भी लिख चुके हैं। हालांकि अब वो ईवीएम पर सवाल उठाने वाली पार्टियों पर ही सवाल उठाते हैं।


बता दें कि बीजेपी भी ईवीएम पर सवाल उठा चुकी है। 2009 में लालकृष्ण आडवाणी ने ईवीएम पर सवाल उठाए थे। उन्होंने लोकसभा चुनावों में हार के बाद ईवीएम पर संदेह जताया था। आडवाणी ने परंपरागत मतपत्रों की वापसी की मांग की थी। जी वी एल नरसिम्हा राव ने ईवीएम में गड़बड़ी पर किताब भी लिखी है। किताब का नाम डेमोक्रेसी एट रिस्क, कैन वी ट्रस्ट आवर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन था। इस किताब की भूमिका लालकृष्ण आडवाणी ने लिखी है। किताब में ईवीएम से धोखाधड़ी पर विस्तार से चर्चा की गई है। सुब्रमणियन स्वामी तो ईवीएम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गए।


बता दें कि पारदर्शिता में कमी के चलते नीदरलैंड में ईवीएम को बैन कर दिया गया। 3 साल के रिसर्च के बाद आयरलैंड में भी ईवीएम को बैन कर दिया गया। ईवीएम को असंवैधानिक बताते हुए जर्मनी ने बैन किया हुआ है। इटली में भी ईवीएम बैन हो चुकी है वहीं अमेरिका के कई राज्यों में ईवीएम पर बैन है।


भारत में ईवीएम के सफर की बात करें तो 1998 में देश में पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल शुरू हुआ। 16 विधानसभा क्षेत्रों में से इसकी शुरुआत हुई थी। 1999 में लोकसभा चुनाव में कुछ सीटों पर ईवीएम का इस्तेमाल हुआ था। 2004 से सभी चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल हो रहा है। बता दें कि एक ईवीएम में 3840 वोट दर्ज हो सकते हैं।


अभी ये तय नहीं है कि चुनाव आयोग की तरफ से पार्टियों को ईवीएम में टैंपरिंग साबित करने का मौका कब मिलेगा। लेकिन मौका जब भी मिले, सवाल तो यही है कि क्या ये मशीने पाक-साफ साबित हो पाएंगी। अगर गड़बड़ी साबित हुई तो क्या होगा।