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छंटनी के शिकार कर्मचारी बना रहे हैं यूनियन

प्रकाशित Tue, 16, 2017 पर 19:50  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आईटी कंपनियों में छंटनी का शिकार हुए कर्मचारी अब इन कंपनियों के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन आईटी विंग बनाया है, जिससे रोजाना सैकड़ों की तादाद में वो आईटी कर्मचारी जुड़ रहे हैं, जिन्हें कंपनियों ने नौकरी से निकाल दिया है। अप्रेजल का ये सीजन आईटी इंप्लॉईज के लिए बुरा सपना क्यों साबित हो रहा है।


कोलकाता के दीप्तिमान सेनगुप्ता ने 2011 में सीनियर सिस्टम एनालिस्ट के रूप में दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी आईबीएम में काम शुरू किया था। अच्छे परफॉर्मेंस की वजह से वो 2013 में  बेस्ट इंप्लाई भी बने। लेकिन पिछले साल ये कंपनी की नॉन-परफॉर्मर लिस्ट में शामिल हुए और अब इन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।


दीप्तिमान की ही तरह कैपजैमिनी के ईशान बनर्जी को भी छंटनी का शिकार होना पड़ा।


आईटी कंपनियों के ये सारे कर्मचारी अब एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने न्यू डेमोक्रैट्स डॉट कॉम वेबसाइट पर आईटी विंग बनाया है, जिसमें आईटी कंपनियों की छंटनी का शिकार हुए कर्मचारी जुड़ रहे हैं। अब 18 मई को डेमोक्रेटिक वन के सभी सदस्य मल्टीनेशनल कंपनियों के खिलाफ आगे की रणनीति तैयार करेंगे।


एक्जीक्यूटिव सर्च फर्म हेडहंटर्स इंडिया का अनुमान है कि अगले 3 सालों में देश में आईटी कंपनियों में पौने दो लाख से दो लाख तक कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। हालांकि आईटी कंपनियों की संस्था नैसकॉम छंटनी की आशंका से इनकार कर रही है।


दरअसल, आईटी सेक्टर में ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का चलन बढ़ने की वजह से लोगों की जरूरत कम होती जा रही है। वहीं ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी जारी रहने का असर आईटी सेक्टर की कंपनियों की ग्रोथ पर भी दिखने लगा है।


वहीं इस पर आइटी सेक्रटरी अरूणा सुंदराजन का कहना है कि, आइटी सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियां नहीं गई हैं। अरूणा सुंदराजन ने आगे कहा कि आईटी सेक्टर पर कोई बड़ा संकट नहीं है और इसका डाटा मंत्रालय के पास है। सेक्टर की स्थिति सामान्य है