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15 अगस्त तक सोने में हॉलमार्किंग जरुरी: रामविलास पासवान

प्रकाशित Wed, 17, 2017 पर 19:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देश का हर कोई नागरिक देश का कंज्यूमर है। कंज्यूमर मंत्रालय के ऊपर कंज्यूमर के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी होती है और उस मंत्रालय की जिम्मेदारी है। सीएनबीसी आवाज़ ने उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान से खास बातचीत की।


सरकार के 3 साल के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट रामविलास पासवान का कहना है कि पिछले एक साल में कंज्यूमर विभाग सबसे एक्टिव विभाग बना है। सरकार के कार्यकाल में अंतर्राष्ट्रीय मानकों को अपनाया गया और नया कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल तैयार किया है और एक्ट बनने पर बिल को लागू करना आसान होगा। इससे शिकायत करने पर जांच का अधिकार तो मिलेगा ही बल्कि जांच के बाद प्रभावी कार्रवाई भी की जाएंगी। 


क्या कंज्यूमर को हक मिला? इस सवाल पर रामविलास पासवान ने कहा कि सर्विस चार्ज पूरी तरह वैकल्पिक है। अगर कोई सर्विस चार्ज जबरन ले तो शिकायत करें। राज्य सरकारों को भी इस पर एक्शन लेना चाहिए। सरकार ने 14 के बजाय अब 60 कंज्यूमर हेल्पलाइन शुरु की है। हालांकि सरकार उपभोक्ताओं से जुड़े नियमों पर सख्ती करने पर जोर दे रही है। अगले महीने से मॉनिटरिंग शुरू होगी। अगर राज्यों को सहयोग नहीं मिलेगा तो इसपर कड़े कदम भी उठाएं जाएंगे। वैसे भी कंज्यूमर के पास पूरे अधिकार हैं जिसे कंज्यूमर को जानना चाहिए।


उन्होंने आगे कहा कि कंज्यूमर हेल्पलाइन में अलग-अलग विभाग की शिकायतें होती हैं। अब तक 3-4 लाख शिकायतें निपटाई जा चुकी हैं। सोने में हॉलमार्किंग को सरकार कब तक लागू करेगी इसपर रामविलास पासवान ने कहा कि सोने में हॉलमार्किंग जरूरी है जिसे 15 अगस्त तक लागू किया जा सकता है।


महंगाई पर बात करते हुए रामविलास पासवान ने कहा कि पहले किसान दाल की कीमत बढ़ने से परेशान थे लेकिन अब दाल की कीमत घटने से किसान परेशान हैं। जिसके लिए 20 लाख टन का बफर स्टॉक बानाया गया था। हालांकि किसानों को वाजिब कीमत देने कि लिए सरकार बध्द है। फिलहाल दाल पर 10 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी है और दालों से स्टॉक लिमिट हटाई जा चुकी है। अभी दाल को बाहर निकालने की परेशानी है जिसके लिए सरकार रास्ता तलाश रही हैं।


बिहार की राजनीति पर बात करते हुए रामविलास पासवान ने कहा कि नीतीश ने प्रधानमंत्री की तारीफ की है। नीतीश गलत लोगों का साथ दे रहे हैं वह जिन लोगों के साथ वो भ्रष्ट हैं। नीतीश को लालू का साथ छोड़ देना चाहिए। यूपीएससी की तरह इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस न्यायपालिका में होनी चाहिए। इससे हर वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व मिल जाएगा।