अरहर पर नहीं गल रही सरकार की दाल -
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अरहर पर नहीं गल रही सरकार की दाल

प्रकाशित Thu, 18, 2017 पर 19:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दाल कम पैदा हो तो आफत और दाल ज्यादा पैदा हो तो मुसीबत, दालों के मामले में सरकार आगे कुआं पीछे खाई की स्थिति में फंसी है। करीब 20 लाख टन दालों का बफर स्टॉक, ऊपर से बंपर पैदावार की उम्मीद सरकार किसानों को सही कीमत दिलाने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की सोच रही है लेकिन हकीकत ये है कि इससे कोई फायदा होने वाला नहीं।


कभी 200 सौ रुपये किलो तक चली गई ये अरहर इस वक्त बाजार में 84 रुपए किलो मिल रही है। नई फसल आने के बाद दाम और गिर सकते हैं। जो दाल सरकार के पास जमा है उसका कोई खरीदार नहीं मिल रहा। कीमतों में भारी गिरावट न हो इसके लिए सरकार अरहर की इंपोर्ट ड्यूटी को 10 से बढ़ाकर 20 फीसदी कर सकती है। भारत के अलावा म्यानमार और इस्ट अफ्रीकी देश ही अरहर उगाते हैं लेकिन दिक्कत ये है जिन देशों से दाल आती है उनसे हमारा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है यानि वहां से दाल आयात पर टैक्स लगता ही नहीं।


दाल की कीमतें बेकाबू न हों इसके लिए सरकार ने पहली बार दालों का बफर स्टॉक बनाया। 20 लाख टन स्टॉक टारगेट पूरा करने के लिए आनन फानन में विदेशों से भी दाल खरीदी गई। पिछले साल और इस साल मिलाकर 3 लाख टन दाल बाहर से मंगाई गई। एक लाख टन दाल तो इसी साल मंगाई गई। ताज्जुब ये है कि सरकार अंदाजा नहीं लगा पाई कि इस बार देश में बंपर पैदावार होने वाली है। अब कीमतें गिर रही हैं और स्टॉक से कोई खरीदने वाला नहीं है।


तो अब ऐसा में सरकार करे तो क्या करे। दूरगामी काम ये हो सकता है कि सरकार स्टोरेज क्षमता बढ़ाए। और जब तक ये नहीं होता तब तक किसानों को बचाने के लिए महंगा यानी एमएसपी पर खरीदे और सस्ता बेचे, एक अच्छा कदम ये उठाया गया है कि दाल की स्टॉक लिमिट हटा दी गई अब सरकार राज्यों पर भी दाल खरीद के लिए दबाव डाले तो बात बने।